सांवेर उपचुनाव: खर्च करने में आगे रहे सिलावट क्या वोटों की रेस में प्रेमचंद गुड्डू से आगे निकल पाएंगे

सांवेर सीट पर पूरे प्रचार अभियान के दौरान तुलसी सिलावट विवादों में घिरे रहे, कांग्रेस को प्रेम चंद गुड्डू से हैं बड़ी उम्मीदें

Updated: Nov 10, 2020, 12:29 AM IST

सांवेर उपचुनाव: खर्च करने में आगे रहे सिलावट क्या वोटों की रेस में प्रेमचंद गुड्डू से आगे निकल पाएंगे
Photo Courtesy: Naidunia

सांवेर। मध्य प्रदेश की 28 विधानसभा सीटों के उपचुनाव में सबसे ज़्यादा नज़रें सांवेर सीट पर टिकी हैं। उपचुनाव में सबसे हाई प्रोफाइल कही जा रही इस सीट पर बाज़ी किसके हाथ लगेगी यह अबसे कुछ ही देर में साफ हो जाएगा। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के निशान पर चुनाव जीतने वाले सिलावट इस बार बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि कांग्रेस की ओर से प्रेमचंद गुड्डू मैदान में हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा प्रताड़ित किए जाने के बाद कांग्रेस छोड़ बीजेपी में चले गए थे। लेकिन जैसे ही सिंधिया ने कांग्रेस छोड़ी, गुड्डू ने घर वापसी कर ली। उपचुनाव की सबसे हाई प्रोफाइल सीट पर बाज़ी किसके हाथ लगेगी यह अबसे कुछ ही देर में इसकी तस्वीर साफ हो जाएगी। 

प्रचार में सबसे ज़्यादा खर्च सिलावट ने किया 
पूरे प्रचार अभियान में तुलसी सिलावट ने प्रेमचंद गुड्डू के मुकाबले ज़्यादा खर्च किए हैं। सिलावट ने 18 लाख 34 हजार 770 रुपये बताया है। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी प्रेमचंद गुडडू ने 14 लाख दो हजार 81 रुपये खर्च किए हैं।इसी क्रम में तीसरे स्थान पर बसपा (बहुजन समाज पार्टी) उम्मीदवार विक्रमसिंह गेहलोत हैं। उन्होंने छह लाख 45 हजार 845 रुपये खर्च का विवरण दिया है। 

हालांकि इस बार सिलावट के लिए सांवेर की सीट निकालना आसान नहीं रहने वाला है। पिछले चुनाव में सिलावट बीजेपी प्रत्याशी राजेश सोनकर से महज़ 2 हज़ार 945 वोट से जीते थे। यही वजह है कि सिलावट शुरू से ही क्षेत्र में अपना प्रचार अभियान शुरू कर चुके थे। पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने सिलावट के समर्थन में घर घर तुलसी अभियान भी चलाया था। बीजेपी हाई कमान ने भी सिलावट के प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तो सिलावट को जीत दिलाने के लिए मंच से घुटने तक टेक दिए। खुद सिलावट की सभा में वोटरों को सुपारी की कसम दिलाई गई। 

एक नवंबर को जब प्रचार अभियान तो 28 सीटों पर समाप्त हो गया लेकिन, तुलसी सिलावट का प्रचार अभियान खत्म नहीं हुआ। सिलावट के समर्थक क्षेत्र में महिला वोटरों को साड़ियां बाँटते दिखाई दिए। हालांकि जब इसकी भनक कांग्रेस कार्यकर्ताओं को लगी तो सिलावट की साड़ियां ज़ब्त कर ली गई। प्रचार अभियान के दौरान सिलावट पर वोटरों को लुभाने और धार्मिक भावनाओं को भड़काने का भी आरोप लगा।  

सांवेर सीट का इतिहास क्या कहता है ?  

सांवेर सीट पर पिछले तीन चुनावों की बात करें तो 2008, 2013 और 2018 में सिलावट और बीजेपी नेता राजेश सोनकर दो बार आमने सामने रहे। एक बार सिलावट तो एक बार राजेश सोनकर को जीत मिली। 2008 में सिलावट ने निशा सोनकर को 3 हज़ार 417 वोटों से हराया था। हालांकि 2018 के चुनाव में राजेश सोनकर ने तुलसी सिलावट को 18 हज़ार से ज़्यादा वोटों से हराया था।  इस दफा सिलावट खुद भगवाधारी हैं लेकिन बीजेपी का अपना कैडर सिलावट के समर्थन में आया या नहीं ईवीएम के बक्से के खुलने के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

सांवेर विधानसभा क्षेत्र में कुल 2,46,485 मतदाता हैं। जिनमें 1,27,495 पुरुष वोटर हैं। वहीं महिला वोटरों की संख्या 1,19,180 महिला वोटर हैं। इस दफा सांवेर सीट पर 78 फीसदी मतदान हुए हैं। 2018 में इस सीट पर 80 फीसदी मतदान हुए थे। तो वहीं 2013 और 2008 में क्रमशः 78 और 73 फीसदी मतदान हुए थे।