MP Ministers Portfolios : मलाई के लिए बिल्लियों की तरह लड़ रहे हैं स्वंभू टाइगर 

Jitu Patwari : मिस्टर विभीषण के लिए किसान कर्जमाफी मुद्दा नहीं बचा, उनकी priority मलाईदार विभाग हो गई

Publish: Jul-10, 2020, 09:13 PM IST

MP Ministers Portfolios : मलाई के लिए बिल्लियों की तरह लड़ रहे हैं स्वंभू टाइगर 

भोपाल। मध्यप्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार होने के एक सप्ताह बीतने के बाद भी अबतक विभागों का बंटवारा नहीं हो पाया है। प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष व पूर्व मंत्री जीतू पटवारी ने ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया और मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर आरोप लगाया है कि दोनों ने मलाईदार विभागों की लड़ाई के लिए पूरे देश में बदनाम कर दिया। उन्होंने दोनों पर तंज कसते हुए कहा कि स्वंभू टाइगर आज बिल्लियों की तरह मलाई के लिए लड़ रहे हैं। 

शुक्रवार 10 जुलाई को मीडिया को संबोधित करने के दौरान शिवराज सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। पटवारी ने कहा, 'दो बिल्लियां मलाईदार विभागों के लिए प्रदेश के भविष्य को गर्त में ले जा रहे हैं। मंत्रिमंडल विस्तार और विभागों का बंटवारा मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार होता है लेकिन चार बार के मुख्यमंत्री इतने कमजोर हैं कि यह भी नहीं कर सकते। लोकतंत्र की हत्या कर कुर्सी हथियाने वाले शिवराज आज किसानों के ऋण माफी की योजना पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। मैं उन्हें चुनौती देता हूं कि जहां चाहें वहां इस मुद्दे पर बहस कर लें कांग्रेस पार्टी तैयार है।'

किसानों के ऋण माफी को पाप बता रही है सरकार

पटवारी ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि जब हम किसानों के ऋण माफी की बात करते हैं तो मध्यप्रदेश सरकार के कृषि मंत्री उसे पाप बताते हैं। यह प्रदेश के किसानों के साथ अत्याचार है। बीजेपी सरकार किसानों के साथ मजाक कर रही है। उन्होंने कहा, 'बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा कहते हैं कि कमलनाथ सरकार ने किसानों का सिर्फ 6 हजार करोड़ रुपए माफ किया। सरकार बहाना बनाना बंद करे प्रदेश का किसान सब देख रहा है।'

कब सड़क पर उतरेंगे मिस्टर "विभीषण" ?

कांग्रेस नेता ने हाल ही में कांग्रेस से बागी होकर बीजेपी में जाने वाले सिंधिया को इशारों में मिस्टर विभीषण बताया है। उन्होंने कहा, 'मिस्टर विभीषण ने कहा था कि किसानों का अगर ऋण माफ नहीं होगा या उसमें देरी होगी तो मैं सड़क पर आऊंगा। अब आप कब और किस तरह से सड़क पर आएंगे दो लाख रुपए ऋण माफ नहीं हुए तो। अब मिस्टर विभीषण के लिए किसान कर्जमाफी मुद्दा नहीं बचा, अब उनके लिए प्रायोरिटी मलाईदार विभाग हो गयी है। क्या हुआ उन मुद्दों का जिसके लिए उन्होंने सरकार गिराया था ? क्यों भूल गए अतिथि विद्वानों को ? हमने नए पदों का सृजन कर विद्वानों को काम पर लगाने की व्यवस्था बनाई थी। केवल उन्हें आमंत्रण पत्र देना बाकी था लेकिन चार महीनों में सरकार यह भी नहीं पाई।' 

विकास दुबे की गाड़ी नहीं पलटती तो कई सरकार पलट जाते

इस दौरान पटवारी ने विकास दुबे एनकाउंटर पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि, 'जिस कानपुर का विकास दुबे है वहीं के नरोत्तम मिश्रा प्रभारी थे। अब सवाल यह खड़ा हो रहा है कि उसे मध्यप्रदेश में किसने शरण दी थी। मध्यप्रदेश अपराधियों के लिए शरणस्थली बन चुकी है और कानून व्यवस्था का हाल बद से बदतर है। एक प्राइवेट संस्था के गार्ड ने विकास को पकड़ा था और वह यहां सरेंडर करने ही आया था। लेकिन शिवराज सरकार अपनी वाहवाही लेने में व्यस्त है। शिवराज एक अद्भुत कमजोर मुख्यमंत्री हैं।'

बता दें कि मध्यप्रदेश में 100 दिनों में मंत्रिमंडल विस्तार होने के बाद अब विभाग के बंटवारे में भी 10 दिन हो गए लेकिन विभाग सुनिश्चित नहीं किया जा सका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक एक और सिंधिया अपने समर्थकों को अहम विभाग दिलाना चाहते हैं वहीं दूसरी ओर सीएम शिवराज अहम विभाग अपने नजदीकी मंत्रियों को सौंपना चाहते हैं। बीजेपी के कई नेता शुरुआत में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर नाराज थे वहीं अब विभाग के बटवारे में सिंधिया समर्थकों द्वारा अहम विभाग की मांग का भी पार्टी के पुराने दिग्गज नेता विरोध कर रहे हैं।