सुलेमानिया स्कूल के पास रातों रात काट दिए आधा दर्जन पेड़, स्कूल के भवन को नुकसान पहुंचने की आशंका

पुरातत्व महत्व का है सुलेमानिया स्कूल, स्कूल से सटे ज़मीन पर निर्माण कार्य करने से पहुंचेगा भवन को नुकसान, पूर्व पार्षद रईसा मलिक ने लगाए आरोप

Publish: Jun 21, 2021, 10:38 AM IST

सुलेमानिया स्कूल के पास रातों रात काट दिए आधा दर्जन पेड़, स्कूल के भवन को नुकसान पहुंचने की आशंका
प्रतीकात्मक तस्वीर

भोपाल। राजधानी भोपाल के मोती मस्जिद के समीप स्थित सुलेमनिया स्कूल से लगी हुई ज़मीन पर आधा दर्जन से ज़्यादा पेड़ रातों रात काट दिए गए हैं। स्कूल से लगी ज़मीन पर निर्माण कार्य करने की तैयारी है। जिस वजह से पुरातत्व महत्व के स्कूल भवन को नुकसान पहुंचने की आशंका है। 

दरअसल सुलेमानिया स्कूल के पास मौजूद सरकारी ज़मीन पर पहले पार्क बनाए जाने का प्रस्ताव था। पार्क बनाए जाने का प्रस्ताव पहले खुद विधायक आरिफ मसूद और रईसा मलिक ने तैयार किया था। लेकिन यह ज़मीन अब ज़िला प्रशासन ने किसी ओर को आवंटित कर दी। रविवार को इस ज़मीन पर काम भी शुरू कर दिया। जिसके परिणाम स्वरूप ज़मीन पर मौजूद करीब तीस से चालीस साल पुराने आधे दर्जन पेड़ों को काट दिया गया।

पूर्व पार्षद रईसा मलिक ने ज़िला प्रशासन के इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। पूर्व पार्षद ने कहा है कि इस ज़मीन से ही सुलेमानिया स्कूल का भवन भी लगा हुआ है। जो कि पुरातत्व महत्व का है। भवन के पास जेसीबी से काम किया जा रहा है। पूर्व पार्षद ने कहा कि स्कूल के भवन के पास ही गड्ढे खोदने की तैयारी है। जिस कारण स्कूल के भवन को काफी नुकसान पहुंच सकता है। 

पूर्व पार्षद ने कहा है कि वे इस मामले में कानूनी लड़ाई लड़ने से भी पीछे नहीं हटेंगी। उन्होंने पर्यावरण प्रेमियों और पुरातत्व महत्व को समझने वाले लोगों से आगे आने की अपील की है। वहीं नगर नियम की उद्यानिकी शाखा के उपायुक्त विशाल सिंह ने कहा है कि पेड़ों को काटे जाने का मामला उनके संज्ञान में नहीं है। विशाल सिंह ने कहा है कि अगर बिना अनुमति के पेड़ काटे गए हैं, तो दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। 

पेड़ काटे जाने के मामला सामने आने के बाद कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने शासन से स्पष्टीकरण देने के लिए कहा है। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने सीएम शिवराज पर निशाना साधते हुए कहा है कि एक तरफ़ शिवराज जी उर्फ़ मामू फ़ोटो खिंचवा कर पौधे लगाने की नौटंकी कर रहे हैं, दूसरी तरफ़ पुरातत्व महत्व के स्कूल की भूमि जिसे सुरक्षित रख कर पार्क बनाने का प्रस्ताव है उसे बताया जा रहा है किसी निजी व्यक्ति को आवंंटित कर दी गई। शासन को स्पष्टीकरण देना चाहिए।