भोपाल में देश का पहला एल्गी ट्री, 25 पेड़ों के बराबर करेगा एयर प्योरिफिकेशन

भोपाल के अशोका गार्डन में देश का पहला एल्गी ट्री लगाया गया है। 20-25 प्राकृतिक पेड़ों के बराबर ऑक्सीजन देने वाली यह अत्याधुनिक स्मार्ट मशीन हवा से भारी मात्रा में प्रदूषण सोखती है।

Updated: May 23, 2026, 05:49 PM IST

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक नई पहल की है। यहां देश का पहला एल्गी ट्री लगाया गया है। शहर के अशोका गार्डन स्थित स्वामी विवेकानंद पार्क में लगाए गए इस आधुनिक सिस्टम का उद्देश्य शहर की वायु गुणवत्ता को बेहतर बनाना और प्रदूषण कम करना है। खास बात यह है कि यह तकनीक प्राकृतिक पेड़ों की तुलना में कहीं अधिक तेजी से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर शुद्ध ऑक्सीजन छोड़ती है।

यह एल्गी ट्री दरअसल एक अत्याधुनिक फोटो बायोरिएक्टर है। इसे खास तौर पर वायु शुद्धिकरण के लिए तैयार किया गया है। इसके भीतर कांच का एक टैंक लगाया गया है जिसमें पानी और विशेष प्रकार के सूक्ष्म शैवाल मौजूद हैं। यह प्रणाली सूर्य की रोशनी की मदद से प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया को तेज गति से संचालित करती है। इसके जरिए वातावरण में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड को सोखा जाता है और बदले में ऑक्सीजन निकलता है।

यह भी पढ़ें:इंदौर में गहराया जल संकट, टैंकरों पर निर्भर हुए हजारों परिवार, विरोध में सड़कों पर उतरे लोग

विशेषज्ञों के अनुसार, एक एल्गी ट्री लगभग 20 से 25 बड़े पेड़ों के बराबर पर्यावरणीय लाभ देता है। यह हर साल करीब 1.5 टन कार्बन डाइऑक्साइड को सोखने की क्षमता रखता है। इसके अलावा यह हवा में मौजूद सूक्ष्म धूल कणों, खासकर पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे प्रदूषकों को भी कम करने में प्रभावी माना जा रहा है। ऐसे क्षेत्रों में जहां आबादी अधिक है और हरित क्षेत्र सीमित हैं वहां यह तकनीक काफी उपयोगी साबित हो सकती है।

इस परियोजना को स्मार्ट सिटी मिशन के तहत विकसित किया गया है। पूरी मशीन सौर ऊर्जा से संचालित होती है। जिसकी वजह से यह पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल बनी रहती है। इसे तैयार करने में करीब दो सालों का समय लगा और लगभग 50 विशेषज्ञों की टीम ने इस पर काम किया। भोपाल में इस प्रयोग की सफलता के बाद अब इसे देश के अन्य बड़े शहरों में भी लागू करने की तैयारी की जा रही है।

यह भी पढ़ें:देवास पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट: अस्पताल में भर्ती 2 और लोगों ने तोड़ा दम, मृतकों की संख्या बढ़कर 8 हुई