उज्जैन: बोरवेल में फंसे 3 वर्षीय भागीरथ की मौत, घंटों मशक्कत के बाद निकाला गया शव

उज्जैन के झालरिया गांव में 75 फीट गहरे बोरवेल में गिरे 3 साल के मासूम भागीरथ को बचाया नहीं जा सका। NDRF-SDRF का 22 घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन नाकाम रहा और शुक्रवार को बच्चे का शव बाहर निकाला गया।

Updated: Apr 10, 2026, 07:37 PM IST

उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के बड़नगर तहसील स्थित झालरिया गांव में बोरवेल में गिरे 3 वर्षीय मासूम भागीरथ देवासी को बचाने की 22 घंटे लंबी कोशिश आखिरकार नाकाम रही। शुक्रवार को SDRF और NDRF की संयुक्त टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद बच्चे का शव बोरवेल से बाहर निकाला। बच्चा करीब 200 फीट गहरे बोरवेल में गिरा था। वह बोरवेल के भीतर लगभग 70–75 फीट की गहराई पर फंसा हुआ था।

पुलिस अधीक्षक प्रदीप मिश्रा ने बताया कि बच्चे के शव को झालरिया गांव से बड़नगर के शासकीय अस्पताल भेज दिया गया है। जहां आगे की प्रक्रिया की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की जांच की जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जिसकी भी लापरवाही सामने आएगी उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने रेस्क्यू ऑपरेशन में सहयोग करने वाली सभी टीमों और लोगों का आभार भी जताया।

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यह हादसा गुरुवार शाम करीब 7:30 से 8 बजे के बीच हुआ था। राजस्थान के पाली जिले का रहने वाला भागीरथ अपने परिवार के साथ क्षेत्र में भेड़ चराने आया हुआ था। खेलते समय वह पलदूना रोड के पास एक खुले बोरवेल के करीब पहुंच गया था। परिजनों के अनुसार, बोरवेल पत्थर से ढका हुआ था। जिसे हटाकर बच्चा झांकने लगा और संतुलन बिगड़ने से अंदर गिर गया था। उस दौरान उसकी मां ने उसे बचाने की कोशिश भी की थी लेकिन तब तक वह गहराई में जा चुका था।

घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और राहत एजेंसियां सक्रिय हो गई थी। उज्जैन कलेक्टर और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में भोपाल से आई NDRF टीम के साथ इंदौर, हरदा और उज्जैन की SDRF टीमें मौके पर पहुंचीं और तुरंत बचाव अभियान शुरू किया गया था। बोरवेल में कैमरा डालकर बच्चे की स्थिति का पता लगाया गया और उसे ऑक्सीजन सपोर्ट देने के लिए पाइप लाइन भी डाली गई थी। इम्प्रोवाइज्ड वॉयस किट के जरिए उससे संपर्क बनाए रखने की कोशिश की जाती रही थी।

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रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बोरवेल के समानांतर पोकलेन और जेसीबी की मदद से एक सुरंग भी खोदी गई थी। करीब 40 फीट तक खुदाई के बाद चट्टानें आने से काम में बाधा आ गई थी। जिसके बाद हैमर मशीन की मदद से चट्टानों को तोड़ा गया थी। साथ ही रेस्क्यू टीम ने बच्चे के हाथ में रस्सी की रिंग डालकर उसे ऊपर खींचने की भी कोशिश की थी। हालांकि, टीम की इन सभी प्रयासों के बावजूद बच्चे को बचाया नहीं जा सका।