MP: बांधवगढ़ में बाघ का आतंक, आंगन में सो रही महिला को मार डाला, दो ग्रामीण घायल

उमरिया के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघ ने आंगन में सो रही महिला पर हमला कर उसकी जान ले ली। जबकि, दो ग्रामीण गंभीर घायल हो गए। घटना के बाद ग्रामीण भड़क उठे और वन विभाग की टीम पर हमला कर दिया।

Updated: May 24, 2026, 02:33 PM IST

उमरिया। मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पनपथा बफर क्षेत्र में शनिवार देर रात बाघ के हमले से एक महिला की मौत हो गई। जबकि,दो ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए। बताया गया कि खेरवा टोला गांव में महिला अपने घर के आंगन में सो रही थी। तभी बाघ ने उस पर हमला कर दिया था। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई।

मृत महिला की पहचान 48 वर्षीय फूलबाई के रूप में हुई है। वहीं, दसैय्या और फुल्ला नामक ग्रामीण घायल हुए हैं। उन्हें मानपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ग्रामीणों के अनुसार, हमला करने के बाद बाघ घर के पास ही बैठा रहा और लगातार दहाड़ता रहा था जिससे लोग भयभीत हो गए थे।

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची लेकिन आक्रोशित ग्रामीणों ने अधिकारियों के खिलाफ नाराजगी जताते हुए उन पर हमला कर दिया। इस दौरान परिक्षेत्र अधिकारी प्रतीक श्रीवास्तव के सिर में चोट आई। जबकि, पतौर रेंजर अंजू वर्मा के साथ भी मारपीट की गई। वनरक्षक और डिप्टी रेंजर भी ग्रामीणों के निशाने पर आए। हालात को संभालने के लिए अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घटना पर दुख जताते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, “बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान अंतर्गत ग्राम खेरवा टोला, जिला उमरिया में बाघ के हमले में एक महिला की मृत्यु और कुछ नागरिकों के घायल होने का समाचार दुखद है। शोकाकुल परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। हमले में मृतक के परिजनों को 25 लाख रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान करने तथा घायलों के निःशुल्क उपचार एवं आवश्यक मुआवजा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। ईश्वर से दिवंगत की शांति एवं घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना करता हूं।”

वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, बाघ एक घर के अंदर घुसकर बैठ गया था और उसे सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। ग्रामीणों की भारी भीड़ और शोर-शराबे के बावजूद बाघ मौके से नहीं भागा। इससे इलाके में डर और ज्यादा बढ़ गया है। प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में अलर्ट जारी कर निगरानी तेज कर दी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगल से सटे गांवों में बाघों की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। मई महीने में अब तक बाघ के हमले से तीन लोगों की मौत हो चुकी है। इससे पहले 3 मई को पनपथा कोर क्षेत्र में महुआ और लकड़ी बीनने गए रज्जू कोल की बाघ के हमले में मौत हो गई थी। वहीं, 16 मई को कुदरी गांव में तेंदूपत्ता तोड़ने गई एक महिला भी बाघ के हमले का शिकार हुई थी।

इसके अलावा 11 मई को मानपुर बफर क्षेत्र में तेंदूपत्ता संग्रह के दौरान निरसिया बैगा घायल हुआ था। जबकि, 12 मई को धर्मेंद्र नामक युवक पर बाघ ने हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया था। लगातार हो रही इन घटनाओं के बाद जंगल से लगे गांवों में भय और नाराजगी दोनों बढ़ती जा रही हैं।