इंदौर में जल संकट पर फूटा लोगों का गुस्सा, कई जगह प्रदर्शन, घंटों रहा चक्काजाम
इंदौर में भीषण गर्मी के बीच पानी संकट को लेकर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। कांग्रेस पार्षदों के नेतृत्व में कई चौराहों पर चक्काजाम और प्रदर्शन किए गए।
इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में भीषण गर्मी के बीच गहराते जल संकट ने रविवार को बड़ा जनआंदोलन का रूप ले लिया। शहर के अलग-अलग इलाकों में पानी की किल्लत से परेशान रहवासियों ने कांग्रेस पार्षदों के नेतृत्व में सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया और कई प्रमुख चौराहों पर चक्काजाम कर दिया। इससे शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई और सैकड़ों लोग घंटों तक जाम में फंसे रहे। बाद में नगर निगम और प्रशासनिक अधिकारियों के आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त किया गया।
सुबह से ही पालदा चौराहा और दीनदयाल उपाध्याय चौराहा (सुखलिया जोन-5) प्रदर्शन का केंद्र बने रहे थे। पालदा चौराहे पर वार्ड-75 और वार्ड-64 के रहवासी कांग्रेस पार्षद कुणाल सोलंकी के नेतृत्व में सड़क पर बैठ गए। वहीं, सुखलिया क्षेत्र में वार्ड-27 के पार्षद राजू भदौरिया के साथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने पानी संकट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। दोनों जगहों पर सड़क जाम होने से वाहनों की लंबी कतारें लग गई थी।
जाम का सबसे ज्यादा असर आम यात्रियों पर पड़ा था। सिटी बसों में सफर कर रहे बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे तेज धूप में घंटों फंसे रहे थे। कई लोगों को गर्मी और यातायात बाधित होने के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ा था।
प्रदर्शन के दौरान लोगों ने नगर निगम प्रशासन और महापौर के खिलाफ नारेबाजी की। महिलाओं और पुरुषों ने खाली बर्तन लेकर विरोध जताया और आरोप लगाया कि क्षेत्र में पानी वितरण की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। वार्ड-27 के रहवासियों का कहना था कि पहले इलाके में निःशुल्क पानी वितरण की सुविधा मिलती थी लेकिन उसे बंद कर दिए जाने से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
कांग्रेस पहले भी शहर के 22 जोनल कार्यालयों पर जल संकट को लेकर विरोध प्रदर्शन कर चुकी है। हाल के दिनों में कई इलाकों के लोग पानी दो-पानी दो के नारे लगाते हुए विधायक रमेश मेंदोला के निवास तक पैदल मार्च भी कर चुके हैं। लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों से साफ है कि शहर में पानी की समस्या अब गंभीर राजनीतिक और जनसामान्य का मुद्दा बन चुकी है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों के मुताबिक, इंदौर के कई इलाकों में जल संकट के पीछे तीन बड़ी वजहें सामने आ रही हैं। पहली कई नई कॉलोनियों और वार्डों में अब तक नर्मदा जल पाइपलाइन नहीं पहुंच सकी है। दूसरी जिन क्षेत्रों में पाइपलाइन नहीं है वहां लोग पूरी तरह पानी के टैंकरों पर निर्भर हैं लेकिन पर्याप्त संख्या में टैंकर उपलब्ध नहीं हो पा रहे। तीसरी वजह लगातार बढ़ती गर्मी के कारण भूजल स्तर का नीचे जाना है। जिसकी वजह से बोरवेल और बोरिंग सूख चुके हैं।
घंटों तक चले प्रदर्शन और चक्काजाम के बाद नगर निगम और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त टैंकर भेजने और पानी सप्लाई सुधारने के लिए जल्द स्थायी व्यवस्था करने का भरोसा दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन समाप्त कर दिया।
हालांकि, कांग्रेस नेताओं और पार्षदों ने प्रशासन को चेतावनी भी दी है। उनका कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में पानी की समस्या का समाधान नहीं हुआ और टैंकरों की संख्या नहीं बढ़ाई गई तो पूरे शहर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।




