कृषि बिल पर शिरोमणि अकाली दल का विरोध कितना सच्चा

Harsimrat Kaur Badal Resigned: शिरोमणि अकाली दल की मंत्री हरसिमरत कौर बादल के इस्तीफे पर सवाल, किसान विरोधी बिल पास कराने वाली सरकार को समर्थन क्यों

Updated: Sep-18, 2020, 08:19 PM IST

कृषि बिल पर शिरोमणि अकाली दल का विरोध कितना सच्चा
बादल गांव में प्रकाश सिंह बादल के घर के बाहर किसानों का धरना

कृषि विधेयकों के मसले पर मोदी मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने वाले शिरोमणि अकाली दल के विरोध में कितनी सच्चाई, कितनी ईमानदारी है? पार्टी सांसद हरसिमरत कौर बादल के केंद्रीय मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बावजूद ये सवाल इसलिए उठ रहा है, क्योंकि इस मसले पर शिरोमणि अकाली दल ने अब तक दोहरा रवैया अपना रखा है। एक तरफ तो हरसिमरत कौर बादल सरकार से इस्तीफा दे रही हैं और दूसरी तरफ उनके पति और अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल कह रहे हैं कि हम एनडीए का हिस्सा बने रहेंगे और मोदी सरकार को बाहर से समर्थन देना भी जारी रखेंगे। 

बिल का विरोध, तो सरकार का समर्थन क्यों?

हरसिमरत कौर बादल ने इस्तीफ़ा देने के बाद ट्विटर पर लिखा कि मैंने केंद्रीय मंत्री पद से किसान विरोधी अध्यादेशों और बिल के ख़िलाफ़ इस्तीफ़ा दे दिया है. ये भी कहा कि उन्हें किसानों की बेटी और बहन के रूप में उनके साथ खड़े होने पर गर्व है। लेकिन अगर उनका दावा वाकई सच्चा है तो उनकी पार्टी ऐसे “किसान विरोधी” विधेयक लाने वाली सरकार को अब भी समर्थन क्यों दे रही है?

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 क्या किसानों के कोप से बचने के लिए किया बिल का विरोध?

यह कैसा विरोध है, जिसमें एक तरफ तो आप सरकार पर किसान विरोधी कानून बनाने का आरोप लगाते हैं और दूसरी तरफ ऐसी ज़िद पर अड़ी असंवेदनशील सरकार को समर्थन जारी रखने का एलान भी करते हैं? क्या इसका यह मतलब निकाला जाए कि शिरोमणि अकाली दल किसान विरोधी विधेयकों की मुखालफत का दिखावा सिर्फ पंजाब में किसानों के कोप से बचने के लिए कर रहा है?  

किसानों का एलान, बिल समर्थक सांसदों को गांव में घुसने नहीं देंगे 

आपको ध्यान दिला दें कि पंजाब के किसान मोदी सरकार के कृषि विधेयकों से बेहद खफा हैं। कुछ किसान संगठनों ने तो यह चेतावनी भी दी थी कि अगर राज्य के किसी भी सांसद ने संसद में इन विधेयकों का समर्थन किया तो उसे गांव में घुसने नहीं दिया जाएगा। किसानों का एक समूह बिल के विरोध में दबाव बनाने के लिए बादल परिवार के गांव में उनके घर पर तीन दिन तक धरना डालकर बैठा रहा। जाहिर है किसानों के इन तेवरों के बीच शिरोमणि अकाली दल अगर संसद में कृषि विधेयकों का समर्थन कर देता तो उसके लिए किसानों के दबदबे वाली पंजाब की सियासत में वापसी के रास्ते और भी मुश्किल हो जाते। ध्यान रहे कि पंजाब में करीब डेढ़ साल बाद ही अगले विधानसभा चुनाव होने हैं। 

लोकसभा में भाषण देते सुखबीर सिंह बादल

 बिल सरकार लाई, लेकिन SAD के निशाने पर कांग्रेस

कृषि विधेयकों के मसले पर शिरोमणि अकाली दल के दोहरे रुख की एक और मिसाल संसद में भी देखने को मिली। पार्टी के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने लोकसभा में कृषि विधेयकों का विरोध करते हुए कहा कि ये विधेयक किसानों, खेतिहर मजदूरों और आढ़तियों को तबाह कर देंगे। लेकिन इसके बाद उन्होंने अपने भाषण में ऐसे घातक बिल लाने वाली मोदी सरकार से ज़्यादा तीखे हमले विधेयक का खुलकर विरोध कर रही प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस पर किए। 

 विरोध को सच्चा साबित करने की चुनौती

अब ये दारोमदार शिरोमणि अकाली दल के नेताओं पर है कि वो कृषि विधेयकों का दिखावटी विरोध करने के आरोपों को किस तरह गलत साबित करते हैं। इसका सबसे सीधा तरीका तो यही है कि वो उस सरकार से समर्थन पूरी तरह वापस लें, जिसने उन विधेयकों को लोकसभा में पारित करवाया है, जो खुद उनकी राय में किसानों-मज़दूरों-आढ़तियों को तबाह करने वाले हैं।