पंजाब में सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी बीजेपी

बीजेपी महासचिव तरुण चुघ का एलान, 2022 में पंजाब की सभी विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए पार्टी ने युद्ध स्तर पर शुरू की तैयारी, कृषि क़ानूनों के विरोध में NDA से अलग हो चुका है अकाली दल

Updated: Nov 17, 2020, 01:27 PM IST

पंजाब में सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी बीजेपी
Photo Courtesy: Indian Express

चंडीगढ़। बीजेपी ने अभी से एलान कर दिया है कि वो 2022 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव में सभी सीटों पर उम्मीदवार खड़े करेगी। पार्टी ने अकेले चुनाव लड़ने का एलान शिरोमणि अकाली दल के साथ अपना बरसों पुराना गठजोड़ टूटने के बाद किया है। सोमवार को बीजेपी की तरफ से यह एलान पार्टी के महासचिव तरुण चुघ ने किया। चुघ ने दावा किया कि बीजेपी ने 2022 में पंजाब की सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए अभी से युद्ध स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है।

चुघ ने बताया कि बीजेपी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा 19 नवंबर को 10 जिलों में पार्टी ऑफिस का ऑनलाइन उद्धाटन करेंगे। बाद में चुनावी तैयारियों का जायजा लेने और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाने के मकसद से वे पूरे प्रदेश का तीन दिन का दौरा भी करेंगे। पार्टी महासचिव ने बताया कि राज्य के 23 हज़ार मतदान केंद्रों पर संगठन के ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। इसी के साथ पंजाब में मोदी सरकार की 160 लोक कल्याणकारी योजनाओं को लोकप्रिय बनाने और उनसे जुड़े कामों से लोगों को अवगत कराया जाएगा।

करीब 30 साल बाद ऐसा होगा जब बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल एक साथ चुनाव नहीं लड़ेंगे। 1992 से दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन था। जहां विधानसभा की 117 सीटों में से बीजेपी सिर्फ 23 सीटों पर ही अपने प्रत्याशी उतारती थी, जबकि बाकी सभी सीटों पर अकाली दल चुनाव लड़ता था। इसी तरह लोकसभा की 13 सीटों में से 3 पर बीजेपी और बाकी 10 पर आकाली दल के प्रत्याशी चुनाव लड़ते थे।

इस साल मोदी सरकार के नए कृषि कानूनों के मसले पर बीजेपी और अकाली दल का दशकों पुराना साथ छूट गया। अकाली दल ने नए कृषि कानूनों को किसान विरोधी बताते हुए उन्हें वापस लेने की मांग की, लेकिन बीजेपी इस मसले पर किसी की सुनने को तैयार नहीं थी। मोदी सरकार की ज़िद और अड़ियल रवैये ने शिरोमणि अकाली दल को उसका साथ छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया। पंजाब में किसानों की तरफ से कृषि कानूनों के भारी विरोध के मद्देनज़र अकाली दल के पास बीजेपी से अलग होने के अलावा कोई रास्ता भी नहीं बचा था। ऐसे में अब देखना यह होगा कि जिन कृषि कानूनों का पंजाब में सबसे ज़्यादा विरोध हो रहा है, उन्हें हर हाल में लागू करने पर अड़ी बीजेपी को राज्य के चुनाव में कितना समर्थन मिलता है। देखने वाली बात यह भी होगी कि क्या चुनाव के बाद बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल एक बार फिर से साथ आ जाएंगे या उनका अलगाव जारी रहेगा। इस बीच, बिहार चुनाव के नतीजों ने बीजेपी को यह विश्वास भी दिया है कि माहौल उसके कितना भी खिलाफ नज़र आ रहा हो, मतदान के बाद EVM से आने वाले नतीजे उसके पक्ष में ही रहते हैं।