गोवा में कांग्रेस सांसद को SIR का नोटिस मिला, चुनाव आयोग ने नागरिकता साबित करने के लिए बुलाया

भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी विरियातो फर्नांडीस ने कहा कि निर्वाचन आयोग के SIR का लक्ष्य वैध मतदाताओं के नामों को मतदाता सूची से हटाना और उन्हें मतदान प्रक्रिया में भाग लेने से रोकना है।

Updated: Jan 09, 2026, 05:06 PM IST

पणजी। देशभर में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। नोबल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन के बाद अब कांग्रेस के एक सांसद को SIR के तहत नोटिस मिला है। निर्वाचन आयोग ने दक्षिण गोवा से कांग्रेस के लोकसभा सदस्य विरियातो फर्नांडीस को अपनी नागरिकता साबित करने को कहा है।

विरियातो फर्नांडीस सांसद होने के साथ ही भारतीय नौसेना के रिटायर्ड अधिकारी भी हैं। भारत निर्वाचन आयोग ने उन्हें एक नोटिस भेजकर मतदाता सूची में अपना नाम बनाए रखने के लिए अपनी पहचान साबित करने वाले दस्तावेजों के साथ अपने समक्ष पेश होने के लिए कहा है। नोटिस मिलने के बाद फर्नांडीस ने निर्वाचन आयोग की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं।

फर्नांडीस ने कहा कि एक सांसद को इस तरह की जांच के दायरे में लाना विपक्ष द्वारा उठाई गई इस चिंता की पुष्टि करता है कि निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का लक्ष्य वैध मतदाताओं के नामों को मतदाता सूची से हटाना और उन्हें मतदान प्रक्रिया में भाग लेने से रोकना है।

फर्नांडीस ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, ‘मुझे निर्वाचन आयोग से नोटिस मिला है जिसमें मुझसे मतदाता सूची में अपना नाम बनाये रखने के लिए पहचान साबित करने वाले दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग ने 2024 के लोकसभा चुनाव में मेरे समेत हर उम्मीदवार को चुनाव लड़ने की अनुमति देने से पहले उच्चतम स्तर की जांच की थी, इसके बावजूद यह नोटिस आया है।

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘वैसे, मैं 1989 में मतदान के लिए पात्र होने के बाद से मतदान कर रहा हूं। इसका सारा श्रेय दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी जी को जाता है जिन्होंने 18 साल के युवाओं को मताधिकार देने की पहल की।’ उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना में अपनी 26 साल की सेवा के दौरान वह लोकसभा, विधानसभा या जिला पंचायत चुनाव में अपना वोट डालने के लिए कई बार सैन्य तैनाती के दूरस्थ स्थानों से गोवा की यात्रा कर चुके हैं।

उन्होंने कहा, ‘अगर एक सांसद को इस तरह की जांच का सामना करना पड़ सकता है, तो ऐसे में आम आदमी की हालत सोचकर आश्चर्य होता है। विपक्षी दलों और गैर सरकारी संगठनों/नागरिकों द्वारा उठाई गई उस चिंता की पुष्टि होती है कि निर्वाचन आयोग वैध मतदाताओं के नाम हटाने और उन्हें मतदान की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने से रोकने के लिए एसआईआर करा रहा है।'

बता दें कि इसके पहले इसी तरह के एक अन्य मामले में निर्वाचन आयोग पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के तहत नोबल पुरस्कार विजेता प्रख्यात अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन और क्रिकेटर मोहम्मद शमी को नोटिस भेजकर विवाद खड़ा कर चुका है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे व टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग पर बंगाली हस्तियों को जलील करने का आरोप लगाया था।