पूर्व मंत्री व दिग्गज कांग्रेस नेता तेजीलाल सरेयाम का निधन, 71 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

छिंदवाड़ा के दिग्गज कांग्रेस नेता और पूर्व वन मंत्री तेजीलाल सरेयाम का 71 वर्ष की आयु में सोमवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। तीन बार विधायक रहे सरेयाम जुन्नारदेव सीट से विधायक रहे थे।

Updated: Feb 24, 2026, 07:52 PM IST

छिंदवाड़ा। मध्यप्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वन मंत्री तेजीलाल सरेयाम का सोमवार को 71 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। सोमवार सुबह करीब 11 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही कांग्रेस पार्टी में शोक की लहर दौड़ गई। सरेयाम को पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबी नेताओं में गिना जाता था और छिंदवाड़ा जिले के आदिवासी समाज में उनका विशेष प्रभाव था।

सरेयाम छिंदवाड़ा जिले की जुन्नारदेव विधानसभा सीट से तीन बार विधायक रह चुके हैं। वे साल 1990, 1993 और 1998 में विधानसभा पहुंचे थे। साथ ही उन्होंने दिग्विजय सिंह सरकार में वन मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी। जुन्नारदेव विधानसभा क्षेत्र के मोरडोंगरी नीमकुही उनके राजनीतिक जीवन का केंद्र रहा और यही उनका गृह ग्राम भी था। आदिवासी समाज के सशक्त प्रतिनिधि के रूप में उन्होंने क्षेत्रीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई थी।

उनका अंतिम संस्कार सोमवार शाम 4 बजे उनके गृह ग्राम नीमकुही में ही किया गया। अंतिम यात्रा में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए थे। उनकी मृत्यु के बाद क्षेत्र में शोक का माहौल देखा गया और समर्थकों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शोक संदेश जारी करते हुए लिखा कि जुन्नारदेव के पूर्व विधायक और मध्यप्रदेश शासन के पूर्व मंत्री तेजीलाल सरेयाम के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और परिजनों को धैर्य प्रदान करने की प्रार्थना की।

छिंदवाड़ा से सांसद बंटी विवेक साहू ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा कि ईश्वर स्वर्गीय सरेयाम को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और परिवार को इस कठिन समय में शक्ति प्रदान करें। वहीं, भाजपा जिलाध्यक्ष शेषराव यादव ने उन्हें सच्चा आदिवासी नेता बताते हुए श्रद्धांजलि दी। तेजीलाल सरेयाम का राजनीतिक जीवन तीन दशकों से अधिक समय तक सक्रिय रहा था। कांग्रेस संगठन में उनकी मजबूत पकड़ और आदिवासी समाज में व्यापक समर्थन के कारण वे क्षेत्रीय राजनीति का महत्वपूर्ण चेहरा बने रहे थे।