हरियाणा के मंत्री अनिल विज़ टीका लगवाने के बावजूद हुए कोरोना पॉज़िटिव

हरियाणा के गृह मंत्री को Covaxine का टीका लगाया गया था, फिर भी उन्हें कोरोना संक्रमण होने पर भारत बॉयोटेक ने सफाई दी है, कंपनी का कहना है कि अनिल विज़ को टीके का दूसरा डोज़ लगना बाकी था

Updated: Dec 05, 2020, 10:45 PM IST

हरियाणा के मंत्री अनिल विज़ टीका लगवाने के बावजूद हुए कोरोना पॉज़िटिव
Photo Courtesy : The Economic Times

अंबाला। बीजेपी नेता व हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज़ को कोरोना वायरस का संक्रमण हो गया है। अनिल विज़ ने आज खुद ट्वीट करके इस बात की जानकारी दी है। खास बात यह है कि विज़ को कुछ दिन पहले ही कोवैक्सीन के ट्रायल के दौरान टीका लगाया गया था। यही वजह है कि उनके कोरोना की चपेट में आने पर भारत में बन रही इस कोवैक्सीन की सफलता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। 

अनिल विज ने शनिवार को ट्वीट करके बताया, 'मैं कोरोना संक्रमित पाया गया हूं। मैं सिविल अस्पताल अंबाला कैंट में भर्ती हूं। बीते दिनों जो लोग भी मेरे संपर्क में आए हैं वे कोरोना की जांच कराएं।'

कोवैक्सीन को लेकर देशभर में सवाल उठने पर अब यह वैक्सीन बना रही कंपनी भारत बॉयोटेक ने सफाई दी है। कंपनी की तरफ से कहा गया है कि कोवैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल दो डोज़ के शेड्यूल पर आधारित है जो 28 दिन के अंतराल पर दिए जाते हैं। इस वैक्सीन का प्रभाव दूसरे डोज के 14 दिन बाद पता चलेगा। दोनों खुराक लेने के बाद ही कोवैक्सीन प्रभावी होती है।

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कई स्वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों का भी कहना है कि अनिल विज़ के कोरोना पॉजिटिव होने के लिए वैक्सीन पर सवाल उठाना ठीक नहीं है। एम्स के पूर्व डायरेक्टर एमसी मिश्रा का कहना है कि इसकी दो वजहें हो सकती हैं। पहली ये कि किसी भी वैक्सीन के ट्रायल के दौरान कुछ लोगों को प्लेसेबो (दवा की जगह कोई न्यूट्रल पदार्थ) दिया जाता है और कुछ को वैक्सीन की डोज़ दी जाती है। यह बताया भी नहीं जाता। सिर्फ डेटा में लिखा जाता है।

मिश्रा के मुताबिक संभव है कि अनिल विज को प्लेसेबो दिया गया हो न कि असली वैक्सीन। ऐसे में उनका पॉजिटिव होना लाजमी है। दूसरी वजह ये हो सकती है कि भले ही अनिल विज को असली टीका दिया गया हो,  फिर भी किसी वैक्सीन को कारगर होने में  28 दिन का समय लगता है। 28 दिन के दौरान शरीर में एंटीबॉडीज बनती हैं। जबकि अनिल विज़ को वैक्सीन लिए हुए अभी 15 दिन ही हुए हैं। यानी उनके शरीर में अभी पर्याप्त  एंटीबॉडीज नहीं बनी हैं और वे संक्रमण की चपेट में आ गए हैं।

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बता दें कि कि कोरोना महामारी के बचाव के लिए भारत बायोटेक और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद की दवा कोवैक्सीन के तीसरे चरण का परीक्षण चल रहा है। पहले और दूसरे चरण के ह्यूमन ट्रायल में करीब एक हजार वॉलंटियर्स को यह वैक्सीन दी गई थी। इस वैक्सीन के तीसरे चरण का परीक्षण भारत में 25 केंद्रों में 26,000 लोगों के साथ किया जा रहा है। यह भारत में कोविड-19 वैक्सीन के लिए आयोजित होने वाला सबसे बड़ा ह्यूमन क्लिनिकल ट्रायल है।