सरकार सबसे बड़ी मुकदमेबाज है, जानबूझ कर मामलों को अटकाती है, PM मोदी के सामने बोले CJI

राज्यों के मुख्यमंत्रियों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के संयुक्त सम्मेलन के दौरान सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस का बड़ा बयान, सरकार को बताया सबसे बड़ा मुकदमेबाज

Updated: Apr 30, 2022, 05:32 PM IST

सरकार सबसे बड़ी मुकदमेबाज है, जानबूझ कर मामलों को अटकाती है, PM मोदी के सामने बोले CJI

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों का संयुक्त सम्मेलन शुरू हो गया है। इस सम्मेलन में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी रमना, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कानून व न्याय मंत्री किरेन रिजिजू भी मौजूद थे। उद्घाटन सत्र के दौरान सीजेआई रमना ने सरकार सबसे बड़ी मुकदमाबाज करार दिया है।

सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमना ने कहा कि सरकारें देश में सबसे बड़ी मुकदमेबाज है। देशभर के 50 फीसदी से ज्यादा मामलों में सरकार पक्षकार है। कई बार सरकार ही मामलों को जानबूझ कर अटकाती है। चीफ जस्टिस ने कहा कि नीति बनाना हमारा काम नहीं है, लेकिन कोई नागरिक इन मुद्दों को लेकर आता है तो हमें बताना पड़ता है। CJI ने उच्च न्यायालयों में स्थानीय भाषाओं में सुनवाई की वकालत की। उन्होंने कहा कि स्थानीय भाषाओं में हाईकोर्ट में सुनवाई हो ताकि न्याय आम जनता के करीब जाए। CJI ने मुताबिक इस बारे में आगे बढ़ने का अब समय आ गया है।

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प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने भी CJI की इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि सामाजिक न्याय के लिए उच्च न्यायालयों में स्थानीय भाषा को प्रोत्साहन देने की जरूरत है। इससे सामान्य नागरिक का न्याय में भरोसा बढ़ेगा। अच्छा हुआ कि ये मुद्दा सीजेआई ने ही उठाया और मीडिया को सुर्खियां मिलीं। प्रधानमंत्री मोदी ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा, ‘राज्य के मुख्यमंत्रियों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की ये संयुक्त सम्मेलन हमारी संवैधानिक खूबसूरती का सजीव चित्रण है।'

पीएम मोदी ने आगे कहा कि, 'हमारे देश में जहां एक ओर न्यायपालिका की भूमिका संविधान संरक्षक की है, वहीं विधायिका नागरिकों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती है। मुझे विश्वास है कि संविधान की इन दो धाराओं का यह संगम, यह संतुलन देश में प्रभावी और समयबद्ध न्याय व्यवस्था का रोडमैप तैयार करेगा। आजादी के इन 75 वर्षों ने न्यायपालिका और कार्यपालिका दोनों की ही भूमिका और जिम्मेदारियों को निरंतर स्पष्ट किया है। जहां जब भी जरूरी हुआ, देश को दिशा देने के लिए दोनों संस्थाओं के बीच का यह संबंध लगातार विकसित हुआ है।'

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उन्होंने आगे कहा कि, '2047 में जब देश अपनी आजादी के 100 साल पूरे करेगा, तब हम देश में कैसी न्याय व्यवस्था देखना चाहेंगे? हम किस तरह अपनी न्यायिक व्यवस्था को इतना समर्थ बनाएं कि वह 2047 के भारत की आकांक्षाओं को पूरा कर सके, उन पर खरा उतर सके, इस प्रश्न का जवाब ढूंढना आज हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। भारत सरकार ज्यूडिशियल सिस्टम में टेक्नोलॉजी की संभावनाओं को डिजिटल इंडिया मिशन का एक जरूरी हिस्सा मानती है। उदाहरण के तौर पर, ई-कोर्ट्स प्रोजेक्ट को आज मिशन मोड में इम्प्लीमेंट किया जा रहा है। हम न्यायिक व्यवस्था में सुधार के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।'