देश में कस्टोडियल डेथ के मामलों में बढ़ोतरी, पिछले 5 सालों में 669 लोगों की पुलिस हिरासत में हुई मौत

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों का हवाला देते हुए पुलिस हिरासत में हुई मौतों की जानकारी दी है।

Updated: Feb 10, 2023, 04:21 AM IST

नई दिल्ली। देश में पुलिस हिरासत में मौतों के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा राज्यसभा में दी गई जानकारी के अनुसार देश भर में पिछले पांच सालों में पुलिस हिरासत में मौत के कुल 669 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा 175 मामले 2021 से 2022 के बीच में सामने आए।

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के आंकड़ों का हवाला देते हुए एक लिखित उत्तर में राज्यसभा में बताया कि साल 2021 से 2022 के बीच पुलिस हिरासत में मौत के कुल 175, 2020 से 2021 में 100, 2019 से 2020 में 112, 2018 से 2019 में 136 और 2017 से 2018 में 146 मामले दर्ज किए गए हैं। यानी 1 अप्रैल 2017 से लेकर 31 मार्च 2022 तक पुलिस हिरासत में मौत के कुल 669 मामले दर्ज हुए।

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गृह राज्य मंत्री राय ने बताया कि केंद्र सरकार समय समय पर एडवाइजरी जारी करती है और उसने मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 भी अधिनियमित किया है, जिसमें लोक सेवकों द्वारा मानवाधिकारों के कथित उल्लंघनों की जांच करने के लिए एनएचआरसी और राज्य मानव अधिकार आयोगों की स्थापना किए जाने का प्रावधान किया गया है।

नित्यानंद राय ने कहा कि जब एनएचआरसी को मानव अधिकारों के कथित उल्लंघनों की शिकायतें प्राप्त होती हैं, तो आयोग द्वारा मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत निर्धारित प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाती है। लोक सेवकों को मानव अधिकारों और विशेष तौर पर हिरासत में व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा की बेहतर समझ प्रदान करने के लिए एनएचआरसी समय समय पर कार्यशालाएं और सेमिनार भी आयोजित करते हैं।