दिल्ली के बाद लेह-लद्दाख में कांपी धरती, 5.7 तीव्रता का आया भूकंप, सरकार ने जारी की एडवाइजरी

हिमालयी क्षेत्र वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भूकंप के जोन 4 और जोन 5 में आता है। इसका मतलब है कि यह इलाका भूकंप के लिहाज से दुनिया के सबसे संवेदनशील इलाकों में आता है।

Updated: Jan 19, 2026, 07:21 PM IST

लेह। दिल्ली NCR के बाद अब केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और आसपास के इलाकों में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। यहां भारतीय समयानुसार सुबह 11:51 बजे भारत के लेह-लद्दाख क्षेत्र में महसूस किए गए। भूकंप के झटकों की तीव्रता 5.8 थी। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने बताया कि भूकंप का केंद्र 36.71° उत्तर और 74.32° पूर्व में स्थित था और इसकी गहराई 171 किलोमीटर थी। भूकंप के ये झटके काफी तेज थे, हालांकि तत्काल भूकंप के झटकों, हताहतों या बड़े नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है।

राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने सोमवार को दिल्ली और लेह, लद्दाख में आए दो भूकंपों की सूचना दी है। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, दिल्ली में 2.8 तीव्रता का भूकंप आया, जिसकी गहराई 5 किलोमीटर दर्ज की गई, जबकि लेह, लद्दाख में 5.7 तीव्रता का एक और भूकंप आया। दोनों भूकंपों में किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है।

लेह लद्दाख में जब भूकंप आया, लोग अपने काम में लगे थे। अचानक तेज झटके लगे। कई लोग गिर पड़े। लोगों में हड़कंप मच गया। जो लोग घरों के या इमारत के अंदर थे, वे बाहर निकल आए। हर तरफ हलचल मच गई। किसी तरह के जानमाल के नुकसान की खबर नहीं आई है। हालांकि, प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। लोगों के लिए एडवाइजरी जारी करके सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

प्रशासन ने संभावित 'आफ्टरशॉक्स' को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी है और स्थानीय निवासियों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। बता दें कि हिमालयी क्षेत्र वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भूकंप के जोन 4 और जोन 5 में आता है। इसका मतलब है कि यह इलाका भूकंप के लिहाज से दुनिया के सबसे संवेदनशील इलाकों में आता है। टेक्टोनिक प्लेटों में होने वाली हलचल के कारण लेह-लद्दाख और जम्मू- कश्मीर में अक्सर भूकंप के झटके लगते हैं।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में पूरे हिमालयी क्षेत्र और पड़ोसी देश अफगानिस्तान में भूकंपीय गतिविधियों में तेजी देखी गई है। लद्दाख में आए इस झटके से ठीक एक दिन पहले अफगानिस्तान में 4.1 तीव्रता का भूकंप आया था, जहां पिछले एक सप्ताह में 4.2 और 3.8 तीव्रता के कई झटके दर्ज किए जा चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि उथले भूकंप, जिनकी गहराई कम होती है, वे गहरे भूकंपों की तुलना में अधिक खतरनाक होते हैं क्योंकि उनकी तरंगों को सतह तक पहुंचने में कम दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे नुकसान की संभावना बढ़ जाती है। बता दें कि इससे पहले आज सुबह ही दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 2.8 दर्ज की गई।