अवैध खनन रोकने में नाकाम है मध्य प्रदेश सरकार, चंबल में रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी

मुरैना में अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। हालात को चिंताजनक बताते हुए अदालत ने राज्य सरकार को फटकार लगाई है।

Updated: Apr 14, 2026, 11:02 AM IST

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के मुरैना में अवैध रेत खनन के मामले पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार को फटकार लगाई। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने हालात को चौंकाने वाला बताते हुए इसे प्रशासनिक विफलता करार दिया और तत्काल ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने चंबल नदी पर बने पुल की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे। जानकारी दी गई कि खनन माफिया पुल के खंभों की नींव तक खुदाई कर रहे हैं जिससे इसकी स्थिरता पर खतरा मंडरा रहा है। वरिष्ठ अधिवक्ता निखिल गोयल ने बताया कि यह पुल 32 खंभों पर टिका है और मध्य प्रदेश तथा राजस्थान को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। कोर्ट ने स्पष्ट पूछा कि अगर पुल को नुकसान होता है या वह ढहता है तो इसकी जिम्मेदारी कौन तय करेगा।

मामले में वनरक्षक हरिकेश गुर्जर की मौत को भी अदालत ने गंभीरता से लिया। न्यायालय ने कहा कि रेत माफिया द्वारा वन अधिकारियों को कुचलने जैसी घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं और यह दर्शाता है कि अवैध गतिविधियां प्रशासन की नजर के सामने ही चल रही हैं।

पुलिस की ओर से मुरैना के हेडक्वार्टर डीएसपी विजय भदौरिया ने कोर्ट को बताया कि इस घटना में शामिल तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। साथ ही घटना में इस्तेमाल किया गया ट्रैक्टर भी जब्त कर लिया गया है। इस कार्रवाई पर अदालत ने संतोष जताया लेकिन वन विभाग की रिपोर्ट को लेकर असंतोष प्रकट किया है।

यह पूरा मामला नेशनल चंबल अभयारण्य में हो रहे अवैध खनन और उससे जलीय जीवों पर पड़ रहे असर से जुड़ा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस तरह की गतिविधियों पर तुरंत रोक लगाने के लिए प्रभावी रणनीति जरूरी है। अगली सुनवाई 17 अप्रैल को तय की गई है जिसमें वन विभाग को विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करनी होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने रोकथाम के लिए कुछ सुझाव भी दिए हैं। इनमें खनन क्षेत्रों में हाई-रेजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाने और भारी मशीनों में जीपीएस सिस्टम अनिवार्य करने की बात शामिल है। साथ ही वनरक्षक की हत्या से जुड़े मामले में विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट भी अदालत ने मांगी है।