अगस्त क्रांति मैदान में भारत छोड़ो आंदोलन दिवस का आयोजन, सोनिया गांधी का पत्र लेकर पहुंचे दिग्विजय सिंह

97 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जीजी पारिख के नेतृत्व में भारत छोड़ो आंदोलन का 80वाँ वर्षगांठ मनाया गया, कार्यक्रम में वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह भी शामिल हुए, सिंह ने डॉ पारिख को सोनिया गांधी का पत्र भी सौंपा जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष ने उनसे "भारत जोड़ो अभियान" के लिए समर्थन मांगा है

Updated: Aug 09, 2022, 08:35 PM IST

अगस्त क्रांति मैदान में भारत छोड़ो आंदोलन दिवस का आयोजन, सोनिया गांधी का पत्र लेकर पहुंचे दिग्विजय सिंह

मुंबई। भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के अंतिम चरण में 9 अगस्त 1942 को महात्मा गाँधी ने मुंबई एक मैदान में एक सार्वजनिक सम्मेलन में जनता को ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ का मूलमंत्र दिया था। जिस मैदान में बापू ने इस अभियान की नींव रखी थी, उसे अब अगस्त क्रांति मैदान के नाम से जाना जाता है। महान स्वतंत्रता सेनानी डॉ जीजी पारिख के नेतृत्व में इस साल यहां भारत छोड़ो आंदोलन के 80वें वर्षगाँठ के मौके पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया और देश के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। इस कार्यक्रम में वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह भी शामिल हुए और उन्होंने 97 वर्षीय स्वतंत्रता सेना डॉ पारिख को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का एक पत्र सौंपा।

डॉ पारिख को संबोधित पत्र में सोनिया गांधी ने लिखा है कि, 'मैंने भारत छोड़ो आंदोलन की 80वीं वर्षगांठ मनाने के लिए आपकी और आपके हमवतन साथियों की राष्ट्रीय अपील पढ़ी है। आज हमारे देश के सामने जो संकट है, उससे कांग्रेस पार्टी पूरी तरह वाकिफ है। आवश्यक वस्तुओं के असहनीय मूल्य वृद्धि से करोड़ों परिवार प्रभावित हैं, युवा निराशा में हैं क्योंकि बेरोजगारी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई है, हमारे किसानों और खेत मजदूरों, आदिवासियों, दलितों और अन्य कमजोर वर्गों के अधिकार, आजीविका और सम्मान संकट में है। सामाजिक और सांप्रदायिक तनाव चरम पर है, जबकि हम सीमाओं पर अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरों का सामना कर रहे हैं।'

कांग्रेस अध्यक्ष ने आगे लिखा कि, 'जिन लोगों ने हमारे देश के स्वतंत्रता आंदोलन में कभी हिस्सा नहीं लिया, और जिनकी विचारधाराओं के कारण महात्मा गांधी की हत्या हुई, उन्होंने अपनी नफरत की राजनीति के माध्यम से हमारे महान राष्ट्र पर यह संकट खड़ा किया है। इससे संविधान और हमारे स्वतंत्रता संग्राम के मूल्यों में विश्वास करने वाले भारतीयों में भय और निराशा पैदा कर हुई है। कई लोग जो तानाशाही मोदी शासन के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाना चाहते हैं, और अपने सपनों का भारत बनाना चाहते हैं, वे आज खुद को अकेला महसूस करते हैं। इसलिए हम सबके सामने एक ही काम है- भारत जोड़ो। इस उद्देश्य के लिए कांग्रेस पार्टी ने उदयपुर चिंतन शिविर में हमारे 'नव संकल्प' में 15 मई को कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत जोड़ो यात्रा की घोषणा की है।' 

सोनिया गांधी ने आगे लिखा कि, 'इस पदयात्रा में कांग्रेस के कई नेता और कार्यकर्ता कम से कम 12 राज्यों में लगभग 3,500 किलोमीटर की पैदल यात्रा करेंगे। यह पदयात्रा अकेले कांग्रेस की नहीं है। हमने 14 जुलाई को उन सभी भारतीयों से एक खुली अपील की है कि जो भी हमारे संविधान के मूल्यों की रक्षा करना चाहते हैं, नफरत की राजनीति के खिलाफ खड़े हैं, और जो भारत के लोगों के सामने आने वाली गंभीर चुनौतियों का समाधान करना चाहते हैं, साथ आएं' इस पत्र के माध्यम से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने डॉ पारिख और तमाम देशभक्तों से अपील की है कि वह भारत जोड़ो यात्रा में शामिल हों।

इससे पहले कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने एक ट्वीट थ्रेड में लिखा कि, 'आज से 80 साल पहले 8 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी जी की सदारत में कॉंग्रेस ने अंग्रेजों को “भारत छोड़ो” की चुनौती दी थी। देशवासियों को “करो या मरो” के लिए आव्हान किया था। सभी वरिष्ठ कॉंग्रेस नेताओं को अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर लिया था। अरुणा आसफ अली जी की अध्यक्षता में मुंबई के गोआलिया टेंक मैदान में 9 अगस्त 1942 को तिरंगा फहराया गया था। हम सभी देशवासी, आज़ादी के 75वें वर्ष में उन सभी स्वतंत्र संग्राम सेनानियों को स्मरण करते हैं जिन्होंने शहादत दी, जेल गए, अंग्रेज़ी हुकूमत की यातनाएँ सहीं और देश को आज़ाद किया।'

सिंह ने लिखा कि, 'आज कुछ धार्मिक उन्माद और नफरत फैलाने वाली शक्तियाँ देश के स्थापित भाईचारे में विघ्न डाल रहे हैं।“सर्व धर्म सम भाव” की सनातनी परंपरा को बिगाड़ रहे हैं। ये वही शक्तियॉं हैं जिन्होंने आज़ादी की लड़ाई में अंग्रेजों का साथ दिया था। भारत की “अनेकता में एकता” सबसे बड़ी शक्ति है। इसे क़ायम रखने के लिए अब “भारत जोड़ो” अभियान का समय आ गया है। उदयपुर में आयोजित कॉंग्रेस के चिंतिन शिविर के “नव संकल्प” में कॉंग्रेस  अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कन्याकुमारी से कश्मीर तक की “भारत जोड़ो यात्रा” की घोषणा की थी जो कि 7 सितंबर 2022 से कन्याकुमारी से प्रारंभ हो रही है।'

राज्यसभा सांसद ने आगे लिखा कि, 'भारत के वे सारे लोग जो कि भारत की “अनेकता में एकता” व सर्व धर्म सम भाव में विश्वास करते हैं उन्हें भारत के वरिष्ठ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जीजी पारिख जी ने “भारत जोड़ो” अभियान चलाने के लिए आव्हान किया। जिसकी शुरुआत आज से करने का निर्णय लिया था। कॉंग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का “भारत जोड़ो” अभियान को सहयोग व समर्थन पत्र लेकर मैं जीजी पारिख जी के आयोजन में आज शामिल हो रहा हूँ। हमें उम्मीद है कि गॉंधी जी के प्रेम सद्भाव सत्य व अहिंसा के संदेश को जन जन तक पहुँचाने के लिए, भारत के करोड़ों समाजसेवी व वे सब जो इस विचारधारा में विश्वास रखते हैं, कॉंग्रेस के “भारत जोड़ो यात्रा” में शामिल हो कर समर्थन करेंगे।'

बता दें कि 'भारत छोड़ो' आंदोलन को आज़ादी से पहले भारत का सबसे बड़ा आंदोलन माना जाता है। लाखों भारतीय इस आंदोलन में कूद पड़े थे। देश भर में जेलें क़ैदियों से भर गई थी। इस आंदोलन ने ब्रिटिश हुकूमत को चौंका दिया था। इस आंदोलन की शुरुआत तब हुई जब 8 अगस्त 1942 की शाम मुंबई की गोवालिया टैंक मैदान में लाखों लोग जुटे थे। ये मैदान खचाखच भरा था और भीड़ के सामने मंच पर एक 73 साल का बूढ़ा खड़ा था। लोग कान लगाए उत्सुकता से उस व्यक्ति का भाषण सुन रहे थे। उस बुज़ुर्ग ने ब्रिटिश हुकूमत को ललकारते हुए हुए अपने हाथ उठाए और करो या मरो के प्रण के साथ दो शब्द कहे। ये दो शब्द ही भारत में ब्रिटिश साम्राज्य के ताबूत में कील साबित हुए। वो दो शब्द था- 'भारत छोड़ो'। यह नारा देने वाले मंच पर जो बुज़ुर्ग व्यक्ति खड़े थे वह थे मोहनदास करमचंद गांधी। तब मुंबई के आसमान में ब्रिटिश हुकूमत विरोधी नारे गूंज रहे थे और डूबता हुआ सूरज आजादी का सपना दिखा रहा था।