विरासत में मिली है जितिन प्रसाद को बगावत, पार्टी छोड़ने पर कांग्रेस ने कहा थैंक्यू

जितिन प्रसाद के पिता ने सोनिया गांधी के खिलाफ की थी बगावत, सोनिया के खिलाफ चुनाव में मुंह की खानी पड़ी थी, उत्तरप्रदेश कांग्रेस में लगातार उठ रही थी जितिन के खिलाफ कार्रवाई की मांग

Updated: Jun 09, 2021, 04:20 PM IST

विरासत में मिली है जितिन प्रसाद को बगावत, पार्टी छोड़ने पर कांग्रेस ने कहा थैंक्यू
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नई दिल्ली। उत्तरप्रदेश के दिग्गज कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद ने आज बीजेपी का दामन थाम लिया है। विधानसभा चुनाव से ठीक एक साल पहले प्रसाद का बीजेपी जॉइन करना ध्रुवीकरण के दृष्टिकोण से काफी अहम माना जा रहा है। हालांकि, कांग्रेस के लिए जितिन प्रसाद का बगावत हैरान करने वाली बात नहीं है। कांग्रेस ने तो पार्टी छोड़ने के लिए जितिन प्रसाद को धन्यवाद भी कह है। उत्तरप्रदेश कांग्रेस लंबे से पार्टी हाईकमान से यह मांग कर रही थी कि जितिन के खिलाफ कार्रवाई की जाए। 

दरअसल, बगावत करना जितिन प्रसाद को विरासत में मिला है। जितिन के पिता जितेंद्र प्रसाद भी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ बगावत कर चुके हैं। कांग्रेस सांसद रहते हुए जितेंद्र प्रसाद ने सोनिया गांधी के पार्टी अध्यक्ष बनने का विरोध किया था। इतना ही नहीं साल 2000 में तो वे सोनिया के खिलाफ अध्यक्ष पद का चुनाव भी लड़ गए थे। लेकिन पार्टी कार्यकर्ताओं ने सोनिया पर भरोसा जताया और जितेंद्र प्रसाद को मुंह की खानी पड़ी थी।

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इसके बावजूद कांग्रेस ने चार साल बाद उनके बेटे जितिन को टिकट दिया और वे सांसद बनकर लोकसभा पहुंचे। जितिन को साल 2008 में यूपीए सरकार में मंत्री भी बनाया गया, इस दौरान वह सबसे कम उम्र के मंत्री थे। जितिन प्रसाद की गिनती सचिन पायलट और ज्योतिरादित्य सिंधिया की तरह कांग्रेस से जुड़े परिवारों की विरासत संभालने वाले युवा नेताओं में होती थी। हालांकि, ज्योतिरादित्य के पाला बदलने के एक साल बाद जितिन ने भी भगवा पार्टी का दामन थाम लिया।

ब्राह्मण वोटों के ध्रुवीकरण के लिए जितिन की एंट्री अहम

भगवा दल में जितिन की एंट्री ब्राह्मण वोटों के ध्रुवीकरण के लिहाज से काफी अहम मानी जा रही है। दरअसल, बीजेपी का राज्य के ब्राह्मण वोटों पर खासा वर्चस्व रहा है। लेकिन योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में यूपी में ब्राह्मणों की उपेक्षाएं की खबरें लगातार आती रही। राजनीतिक पंडितों के मुताबिक योगी सरकार के मन में एक खास समुदाय के लिए सॉफ्ट कॉर्नर होने की वजह से अन्य सवर्ण मतदाताओं में काफी गुस्सा है। सीएम योगी के रवैए से सबसे ज्यादा ब्राह्मण कार्यकर्ता और नेता भड़के हुए हैं।

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उधर जितिन प्रसाद ने ब्राह्मण चेतना परिषद नाम का संगठन बनाकर एक जाति विशेष के लिए लगातार काम करते रहे हैं। उन्होंने पूरे प्रदेश में घूमकर ब्राह्मणों के बीच खासी पैठ भी बनाई है। ऐसे नाजुक समय में जब सत्ता के लिए निर्णायक ब्राह्मण मतदाताओं की सीएम योगी से नाराजगी हो और कई विद्यायकों ने भी योगी के खिलाफ मोर्चा खोल लिया है, तब जितिन को अपने पाले में कर पार्टी हाईकमान ने ब्राह्मण वोटों के ध्रुवीकरण के लिए बड़ा दांव चल दिया है। 

उम्मीद की जा रही है कि अटल बिहारी वाजपेयी, कलराज मिश्र, मुरली मनोहर जोशी के बाद बीजेपी में ब्राह्मण चेहरे को लेकर जो खालीपन आया है, उसे जितिन प्रसाद थोड़ा कम कर सकें। वैसे तो दिनेश चंद्र शर्मा, रीता बहुगुणा जोशी और सुब्रत पाठक जैसे कई ब्राह्मण चेहरे बीजेपी के पास हैं, लेकिन वे अपने बिरादरी को इस तरह से गोलबंद कर पाने में सक्षम नहीं माने जाते हैं कि ब्राह्मणों का एकमुश्त वोट बीजेपी को मिल सके। बहरहाल इस खालीपन को भरने में जितिन प्रसाद कितना सफल होंगे यह आने वाला वक्त ही बताएगा।