जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों को मिली बड़ी कामयाबी, जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकी मुठभेड़ में ढ़ेर

जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में सुरक्षाबलों ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। रामनगर के जंगलों में एक गुफा के भीतर छिपे जैश-ए-मोहम्मद के टॉप कमांडर रुबानी समेत दो आतंकियों को मार गिराया।

Updated: Feb 04, 2026, 05:45 PM IST

उधमपुर। जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में सुरक्षाबलों ने पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकवादियों को मार गिराया है। मारे गए आतंकियों में संगठन का टॉप कमांडर रुबानी उर्फ अबू माविया भी शामिल बताया जा रहा है। वह लंबे समय से इस इलाके में सक्रिय था। यह कार्रवाई रामनगर-बसंतगढ़ क्षेत्र के जाफर जंगल में चलाए गए संयुक्त अभियान के दौरान की गई। यहां दोनों आतंकी एक गुफा में छिपे हुए थे।

सुरक्षाबलों ने यह ऑपरेशन सेना की काउंटर इंसर्जेंसी फोर्स डेल्टा, व्हाइट नाइट कोर, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम के साथ चलाया गया था। खुफिया सूचना के आधार पर मंगलवार दोपहर करीब चार बजे जंगल क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया था। सुरक्षाबलों ने जाफर, गुजरादा और चिगला बालोथा के जंगलों में आतंकवादियों की मौजूदगी का पता लगाया जिसके बाद गुफा में छिपे आतंकियों को घेर लिया गया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच करीब एक घंटे तक भीषण गोलीबारी चलती रही थी।

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मुठभेड़ के दौरान एक आतंकी घायल हुआ लेकिन वह अपने साथी के साथ गुफा के भीतर घुस गया। शाम करीब साढ़े सात बजे आतंकियों ने अंधेरे का फायदा उठाकर गुफा से बाहर निकलकर भागने की कोशिश की। इस दौरान फिर गोलीबारी और तेज धमाकों की आवाजें सुनाई दी। स्थिति को देखते हुए सुरक्षाबलों ने अतिरिक्त टुकड़ियां, पैराट्रूपर्स और डॉग स्क्वॉड को मौके पर तैनात किया और पूरे इलाके की घेराबंदी और मजबूत कर दी।

ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों ने आतंकियों को निष्क्रिय करने के लिए अंडर बैरल ग्रेनेड लॉन्चर का इस्तेमाल किया जिससे गुफा के एंट्री पॉइंट को विस्फोट के जरिए ध्वस्त कर दिया गया। कार्रवाई के बाद एक आतंकवादी का शव गुफा के मुहाने पर मिला जबकि दूसरा शव गुफा के भीतर गहराई में पाया गया। सुरक्षाबलों ने आतंकियों के पास से अमेरिकी निर्मित एम4 कार्बाइन, एके47 असॉल्ट राइफल और भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया है। सेना ने इस पूरे ऑपरेशन का वीडियो भी जारी किया है।

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सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह उधमपुर क्षेत्र में पिछले डेढ़ महीने में दूसरी बड़ी मुठभेड़ है। इससे पहले 15 दिसंबर को सौन गांव में हुई मुठभेड़ में एक पुलिसकर्मी की मौत हुई थी। हालांकि, इस दौरान आतंकी घने जंगल और अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे थे। जनवरी महीने में भी जम्मू क्षेत्र के कई जिलों में लगातार आतंकरोधी अभियान चलाए गए थे।

बीते 23 जनवरी को कठुआ जिले में सुरक्षाबलों ने जैश-ए-मोहम्मद के पाकिस्तानी कमांडर उस्मान को मार गिराया था। वह पिछले दो सालों से डोडा, उधमपुर और कठुआ क्षेत्र में सक्रिय था। उस ऑपरेशन में भी एम4 राइफल समेत भारी मात्रा में हथियार बरामद हुए थे।

इसके अलावा किश्तवाड़ जिले में बीते 18 जनवरी से ऑपरेशन त्राशी-1 लगातार जारी है। चतरू बेल्ट के मंडराल, सिंहपोरा और सोनार गांव के जंगलों में आतंकियों की तलाश के दौरान अब तक चार बार मुठभेड़ हो चुकी है। शुरुआती मुठभेड़ में आतंकियों के ग्रेनेड हमले में आठ जवान घायल हुए थे। इनमें हवलदार गजेंद्र सिंह ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। इसके बाद 22 और 24 जनवरी को अलग-अलग स्थानों पर फिर गोलीबारी हुई थी। जबकि, 31 जनवरी को डोलगाम इलाके में एक और मुठभेड़ हुई थी।

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सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि किश्तवाड़ और आसपास के जंगलों में अभी भी जैश के दो से तीन आतंकी छिपे हो सकते हैं। जम्मू क्षेत्र के ऊपरी पहाड़ी इलाके जैसे कठुआ, डोडा, किश्तवाड़, राजौरी और पूंछ में आतंकियों की सक्रियता को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बनी हुई है। अमरनाथ यात्रा और सीमा सुरक्षा को देखते हुए इन इलाकों में सर्दियों के दौरान भी अभियान तेज किए गए हैं।