MCC ने क्रिकेट के नियमों में किए 73 संशोधन, टेस्ट मैच में अब हर हाल में खेला जाएगा आखिरी ओवर
एमसीसी ने क्रिकेट के नियमों में 73 बड़े बदलाव किए हैं जो 1 अक्टूबर से लागू होंगे। अब टेस्ट में दिन का आखिरी ओवर पूरा कराया जाएगा चाहे विकेट गिरे। बाउंड्री कैच, डेड बॉल और ओवरथ्रो के भी नियम बदले गए हैं।
क्रिकेट के नियम बनाने वाली संस्था मेरिलबोन क्रिकेट क्लब ने खेल के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। एमसीसी ने क्रिकेट के कानूनों में कुल 73 संशोधन किए हैं। ये नए नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे। साल 2022 के बाद क्रिकेट नियमों में यह सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इन संशोधनों का उद्देश्य खेल को ज्यादा निष्पक्ष, आधुनिक, स्पष्ट और सुलभ बनाना है। इन नियमों के लागू होने के बाद टेस्ट क्रिकेट की रणनीति, अंपायरिंग प्रक्रिया और ग्रासरूट लेवल पर क्रिकेट के खेल में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
टेस्ट मैच में दिन के आखिरी ओवर का नियम बदला
नए नियम के तहत अब टेस्ट मैचों में दिन का आखिरी ओवर हर हाल में पूरा कराया जाएगा भले ही उस ओवर के दौरान विकेट गिर जाए। एमसीसी के अनुसार, पहले बल्लेबाजी टीम को नया बल्लेबाज भेजने से बचने का फायदा मिल जाता था जिससे खेल का रोमांच कम हो जाता था। साथ ही बची गेंदें अगले दिन पूरी करनी पड़ती थी जिससे समय की बचत भी नहीं होती थी। नए नियम से अब गेंदबाजी टीम को अंतिम ओवर में भी आक्रामक रणनीति अपनाने का मौका मिलेगा।
ओवरथ्रो और मिसफील्ड की स्पष्ट परिभाषा
एमसीसी ने ओवरथ्रो और मिसफील्ड के बीच अंतर स्पष्ट कर दिया है। अब ओवरथ्रो केवल उस स्थिति को माना जाएगा जब फील्डर जानबूझकर विकेट पर गेंद फेंकता है और गेंद उससे आगे निकल जाती है। जबकि, यदि फील्डर बाउंड्री पर गेंद रोकते समय उसे पकड़ नहीं पाता और गेंद निकल जाती है तो उसे मिसफील्ड माना जाएगा। इससे स्कोरिंग और अंपायरिंग से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही भ्रम की स्थिति खत्म होगी।
डेड बॉल नियम में बदलाव
अब गेंद को डेड बॉल घोषित करने के लिए यह जरूरी नहीं होगा कि गेंद गेंदबाज या विकेटकीपर के पास ही हो। यदि गेंद किसी भी फील्डर के पास भी है या मैदान पर स्थिर हो गई है और अंपायर को लगता है कि बल्लेबाज रन नहीं ले सकता तो वह गेंद को डेड बॉल घोषित कर सकता है। इससे रन लेने की अव्यवस्थित परिस्थितियों में स्पष्टता आएगी।
लेमिनेटेड बैट को सशर्त मंजूरी
एमसीसी ने लेमिनेटेड या टाइप-डी बैट को ओपन एज क्लब क्रिकेट में इस्तेमाल की अनुमति दे दी है। यह बल्ला लकड़ी के दो या तीन टुकड़ों को जोड़कर बनाया जाता है और पारंपरिक बल्लों की तुलना में सस्ता होता है। एमसीसी के परीक्षण में पाया गया कि इससे खिलाड़ियों को अतिरिक्त प्रदर्शन लाभ नहीं मिलता। इस फैसले का मकसद क्रिकेट उपकरणों की बढ़ती लागत को कम करना और ज्यादा खिलाड़ियों को खेल से जोड़ना है।
हिट विकेट नियम को और स्पष्ट किया गया
नए नियम के अनुसार यदि बल्लेबाज शॉट खेलने के बाद संतुलन खोकर स्टंप्स पर गिर जाता है तो उसे आउट माना जाएगा चाहे गेंद कितनी भी दूर क्यों न चली गई हो। हालांकि, यदि बल्लेबाज किसी फील्डर से टकराने के कारण स्टंप्स पर गिरता है तो उसे आउट नहीं दिया जाएगा। यदि बल्लेबाज के हाथ से बल्ला छूटकर सीधे स्टंप्स पर लग जाता है तो उसे आउट माना जाएगा लेकिन यदि बल्ला पहले किसी फील्डर या विकेटकीपर से टकराकर स्टंप्स से लगे तो बल्लेबाज नॉट आउट रहेगा।
बाउंड्री कैच के नियम में बदलाव
अब बाउंड्री के बाहर हवा में मौजूद फील्डर गेंद को केवल एक बार छू सकता है। इसके बाद उसे पूरी तरह मैदान के अंदर उतरना होगा। रस्सी के बाहर रहते हुए बार-बार गेंद छूने वाली रिले कैच तकनीक अब बाउंड्री मानी जाएगी।
विकेटकीपर की पोजीशन से जुड़ा नियम बदला
अब विकेटकीपर को गेंदबाज के रनअप के दौरान स्टंप्स के बराबर खड़े रहने पर दंडित नहीं किया जाएगा। यह प्रतिबंध केवल गेंद छोड़े जाने के बाद लागू होगा। एमसीसी के अनुसार, यह बदलाव आधुनिक खेल की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया गया है।
फील्डिंग टीम को स्ट्राइक तय करने का अधिकार
कुछ विशेष परिस्थितियों जैसे जानबूझकर शॉर्ट रन लेना या बल्लेबाज द्वारा खेल में बाधा डालने की स्थिति में अब फील्डिंग टीम यह तय कर सकेगी कि अगली गेंद पर कौन सा बल्लेबाज स्ट्राइक पर रहेगा। यह बदलाव मैच के अहम क्षणों में रणनीतिक भूमिका निभा सकता है।
महिला और जूनियर क्रिकेट के लिए गेंद के नए साइज
एमसीसी ने महिला और जूनियर क्रिकेट के लिए गेंदों को तीन साइज में बांटा है।
साइज-1: यह गेंद अब तक क्रिकेट के खेल में इस्तेमाल किया जाता है। मेंस क्रिकेट में अब भी इसे ही इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।
साइज-2: यह गेंद आम गेंद के थोड़ी हल्की और छोटी होगी। इसे महिला और जूनियर क्रिकेट में इस्तेमाल किया जाएगा।
साइज-3: कम उम्र के बच्चों के लिए सबसे हल्की और छोटी गेंद लाई जाएगी। हालांकि, तीनों गेंदों में गुणवत्ता, मजबूती और सुरक्षा मानक समान रहेंगे।
एमसीसी का कहना है कि नए नियम खेल को आधुनिक, स्पष्ट और समावेशी बनाने के लिए तैयार किए गए हैं। संस्था अब प्रतिक्रियात्मक नहीं बल्कि भविष्य को ध्यान में रखकर नियम बनाने की दिशा में काम कर रही है। इन बदलावों से टेस्ट क्रिकेट की रणनीति, अंपायरिंग निर्णय और ग्रासरूट स्तर पर क्रिकेट की लोकप्रियता में वृद्धि होने की उम्मीद है।
साल 1787 में लंदन में स्थापित एमसीसी दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित क्रिकेट क्लबों में से एक है। इस संस्था ने 1788 में क्रिकेट के पहले आधिकारिक नियम बनाए थे। इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल बनने के बाद भी क्रिकेट के नियमों का कॉपीराइट अब भी एमसीसी के पास ही है और वही समय-समय पर खेल के कानून तय करती है।




