अब देशद्रोह की सीमा परिभाषित करने का वक़्त आ गया है, सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने तेलुगु टीवी चैनलों को दी राहत, आंध्र प्रदेश सरकार नहीं कर पाएगी देशद्रोह की कार्रवाई, शीर्ष न्यायालय ने कहा, अब राष्ट्रद्रोह की सीमा तय करनी होगी

Updated: May 31, 2021, 04:21 PM IST

अब देशद्रोह की सीमा परिभाषित करने का वक़्त आ गया है, सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
Photo Courtesy: ABP

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को देशद्रोह को लेकर एक अहम टिप्पणी की है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि अब राष्ट्रद्रोह को परिभाषित करने और उसकी सीमा तय करने का समय आ गया है। न्यायालय ने तेलुगु टीवी चैनलों के खिलाफ देशद्रोह के मुकदमे में कार्रवाई करने पर रोक लगा दी है। साथ ही कहा है कि यह एफआईआर टीवी चैनलों की आजादी को खत्म करने की कोशिश है।

दरअसल, वाईएसआर के बागी सांसद के रघुराम कृष्ण राजू के आपत्तिजनक भाषण दिखाने को लेकर आंध्र प्रदेश पुलिस ने TV 5 और ABN आंध्रज्योति के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया था। मामले में दोनों टीवी चैनलों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए न्यायालय से अपने खिलाफ एफआईआर रद्द करने की मांग की थी।

याचिकाओं में कहा गया था कि मीडिया पर अंकुश लगाने के लिए राज्य के इस कदम का मीडिया घरानों पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से इसपर हस्तक्षेप करने की अपील करते हुए कहा था कि मीडिया चैनलों को बिना किसी पुलिस उत्पीड़न के अपने पेशे को आगे बढ़ाने की अनुमति देनी चाहिए।

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मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, एल नागेश्वर राव और एस रविंद्र भट्ट की पीठ ने सोमवार को कहा कि प्रथम दृष्टया यह FIR मीडिया की आजादी को खत्म करने की कोशिश प्रतीत होती है। पीठ ने कहा, 'हमारा मानना है कि IPC के 124A (देशद्रोह) और 153 (समुदायों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) के प्रावधानों को परिभाषित करने की जरूरत है।' 

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि खासकर अभिव्यक्ति की आजादी और मीडिया को लेकर देशद्रोह की सीमा को तय करने का समय आ गया है। बेंच ने आंध्र सरकार से चार हफ्तों के भीतर जवाब मांगा है। साथ ही टीवी चैनल और उसके किसी भी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई या उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दिया है।

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सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल मार्च के शुरुआती हफ्ते में देशद्रोह को लेकर कहा था कि सरकार से भिन्न मत रखने वाले लोगों की अभिव्यक्ति की आजादी को देशद्रोह नहीं कहा जा सकता। यह मामला कश्मीर के पूर्व सीएम फारूख अब्दुल्ला के एक बयान से जुड़ा हुआ था जिसमें उन्होंने कथित रूप से जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 की पुनः बहाली के लिए चीन से मदद मांगी थी।