तहलका मैगजीन के फाउंडर तरुण तेजपाल रेप केस में बरी, गोवा सेशन कोर्ट का बड़ा फैसला

साल 2013 में एक महिला पत्रकार ने तरुण तेजपाल के खिलाफ फाइव स्टार होटल के एक लिफ्ट में यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया था, साल 2014 से जमानत पर बाहर हैं तेजपाल

Updated: May 21, 2021, 12:18 PM IST

तहलका मैगजीन के फाउंडर तरुण तेजपाल रेप केस में बरी, गोवा सेशन कोर्ट का बड़ा फैसला
Photo Courtesy: Livelaw

पणजी। मशहूर पत्रकार व तहलका मैगजीन के पूर्व एडिटर इन चीफ तरुण तेजपाल को बड़ी राहत मिली है। महिला सहकर्मी का यौन उत्पीड़न मामले में गोवा सेशन कोर्ट ने तेजपाल को बरी कर दिया है। तरुण तेजपाल पर पिछले आठ साल से यह मामला चल रहा था। वे साल 2014 से ही जमानत पर बाहर हैं।

साल 2017 में इस मामले में तरुण तेजपाल के खिलाफ कोर्ट ने रेप, यौन शोषण के आरोप तय किए थे। तेजपाल ने इन आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। शीर्ष न्यायालय यह आदेश दिया था 6 महीने में मामले का निपटारा किया जाए। हालांकि, यह मामला लंबा खींचता चला गया और आज गोवा सेशन ने तेजपाल को बरी कर दिया।

तेजपाल के खिलाफ तहलका में काम करने वाली ही एक महिला पत्रकार ने यौन शोषण का आरोप लगाया था। तेजपाल की जूनियर सहकर्मी ने नवंबर 2013 में एक फाइव स्टार होटल की लिफ्ट के अंदर यौन उत्पीड़न करने का केस दर्ज किया था। महिला ने अपनी शिकायत में बताया था कि गोवा में तहलका मैगजीन का एक इवेंट था, उस रात जब वह एक गेस्ट को उसके कमरे तक छोड़ कर वापस लौट रही थी, तो होटल के एक लिफ्ट के सामने उसे मैगजीन के संपादक और उसके बॉस तरुण तेजपाल मिले। 

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लिफ्ट से बाहर निकलते ही तेजपाल ने महिला को वापस लिफ्ट के अंदर खींच लिया। गोवा पुलिस को दिए गए बयान में लड़की ने कहा था, वह कुछ समझ पाती तबतक तेजपाल ने ऐसे बटन दबाए की लिफ्ट न तो कहीं रुकी और न उसके दरवाजे खुले। इसके बाद तेजपाल ने उसके साथ बंद लिफ्ट के भीतर उसका रेप किया। पुलिस ने तहलका मैगजीन के फाउंडर तरुण को 30 नवंबर 2013 को गिरफ्तार कर लिया था।

देश के मशहूर पत्रकार रहे तेजपाल के खिलाफ लगे इन आरोपों ने मीडिया जगत में सनसनी मचा दी थी। गोवा पुलिस ने इस मामले में फरवरी 2014 में तेजपाल के खिलाफ 2,846 पन्नों की चार्जशीट दायर की थी। 2014 के ही मई में तरुण को जमानत दे दी गई थी। इसके बाद से वे जमानत पर बाहर हैं। तेजपाल के खिलाफ आईपीसी की धारा 342, 354, 354-A, 376 (2), 376 (2) के तहत मुकदमा चल रहा था।