Dr. Kafeel Khan: फिर से झूठे मामले में फंसा सकती है योगी सरकार

UP Govt: साढ़े सात महीनों से रासुका के तहत मथुरा जेल में बंद थे डॉ. कफील खान, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रासुका को गैरकानूनी बताते हुए किया है रिहा

Updated: Sep 02, 2020 12:51 PM IST

Dr. Kafeel Khan: फिर से झूठे मामले में फंसा सकती है योगी सरकार
Photo Courtesy: ANI Twitter

लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के करीब 12 घंटे बाद डॉक्टर कफील खान आखिरकार मथुरा जेल से एक सितंबर देर रात रिहा हो गए। रिहा होने के बाद उन्होंने कहा कि प्रशासन उन्हें अब भी रिहा करने को तैयार नहीं था लेकिन लोगों की दुआ की वजह से वह रिहा हुए हैं, लेकिन आशंका है कि सरकार उन्हें फिर किसी मामले में फंसा सकती है।

कफील के वकील इरफान गाजी ने बताया कि मथुरा जेल प्रशासन ने रात करीब 11 बजे उन्हें यह सूचना दी कि डॉक्टर कफील को रिहा किया जा रहा है। उसके बाद रात करीब 12 बजे उन्हें रिहा कर दिया गया। जेल से रिहाई के बाद कफील ने अदालत का शुक्रिया अदा किया। साथ ही कहा कि वह उन तमाम शुभचिंतकों के भी हमेशा आभारी रहेंगे जिन्होंने उनकी रिहाई के लिए आवाज उठाई। कफील ने कहा कि वह अब बिहार और असम के बाढ़ ग्रस्त इलाकों में जाकर पीड़ित लोगों की मदद करना चाहेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘रामायण में महर्षि वाल्मीकि ने कहा था कि राजा को राजधर्म निभाना चाहिए लेकिन उत्तर प्रदेश में राजा राज धर्म नहीं निभा रहा बल्कि वह 'बाल हठ' कर रहा है।’’ कफील ने कहा कि गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में हुए ऑक्सीजन कांड के बाद से ही सरकार उनके पीछे पड़ी है और उनके परिवार को भी काफी कुछ सहन करना पड़ा है।

कफील नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ पिछले साल अलीगढ़ में भड़काऊ भाषण देने के आरोप में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत करीब साढ़े सात महीने से मथुरा जेल में बंद थे। इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह की पीठ ने कफील को तत्काल रिहा करने के आदेश दिए थे।

हालांकि कफील की तत्काल रिहाई नहीं हो सकी। उनके वकीलों और परिजनों की तमाम कोशिशों के बाद एक सितंबर रात करीब 12 बजे कफील को मथुरा जेल से रिहा किया गया। इससे पहले, कफील को फिर से किसी और इल्जाम में फंसाने की साजिश से आशंकित परिजनों ने उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर करने का फैसला किया था।

हाई कोर्ट का आदेश आने के बाद कफील के परिजन उनकी रिहाई के लिये मथुरा जेल पहुंचे थे लेकिन अधिकारियों ने आदेश ना मिलने का हवाला देते हुए उन्हें रिहा करने से इनकार कर दिया था।

कफील के भाई अदील खां ने अधिकारियों पर टालमटोल का आरोप लगाते हुए आशंका जताई थी कि कहीं प्रशासन उनके भाई को किसी और इल्जाम में फंसाने की साजिश तो नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि अगर आज कफील को जेल से रिहा नहीं किया गया तो वह दो सितंबर को हाई कोर्ट में अवमानना की याचिका दाखिल करेंगे।

इस बीच, मथुरा के जिलाधिकारी सर्वज्ञ राम मिश्र ने कहा कि हाई कोर्ट का जो भी आदेश होगा, उसका समुचित अनुपालन किया जाएगा। चूंकि कफील पर रासुका की कार्यवाही अलीगढ़ के जिलाधिकारी ने की थी, लिहाजा रिहाई के बारे में उनसे बात की जाए। उधर, अलीगढ़ के जिलाधिकारी चंद्र भूषण सिंह से कई बार बात करने की कोशिश की गई लेकिन बात नहीं हो सकी।

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गौरतलब है कि अगस्त 2017 में गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में आक्सीजन की कमी से बड़ी संख्या में मरीज बच्चों की मौत के मामले के बाद कफील चर्चा में आए थे। डॉक्टर कफील खान को पिछले साल दिसंबर में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में सीएए के विरोध में भड़काऊ भाषण देने के आरोप में इस साल जनवरी में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें मथुरा जेल भेजा गया था। फरवरी में उन्हें अदालत से जमानत मिल गई थी, लेकिन जेल से रिहा होने से ठीक पहले 13 फरवरी को उनके ऊपर रासुका के तहत कार्यवाही कर दी गई थी, जिसके बाद से वह जेल में थे।

कफील की रासुका अवधि गत छह मई को तीन महीने के लिए बढ़ाई गई थई। गत 16 अगस्त को अलीगढ़ जिला प्रशासन की सिफारिश पर राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने गत 15 अगस्त को उनकी रासुका की अवधि तीन महीने के लिए और बढ़ा दी थी।