ममता बनर्जी ने की शरद पवार से बात, विपक्षी एकता के लिए जा सकते हैं दिल्ली

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी और एनसीपी प्रमुख शरद पवार के बीच बातचीत की जानकारी महाराष्ट्र सरकार के मंत्री और एनसीपी नेता नवाब मलिक ने दी

Updated: Dec 22, 2020, 04:41 PM IST

ममता बनर्जी ने की शरद पवार से बात, विपक्षी एकता के लिए जा सकते हैं दिल्ली
Photo Courtesy: Times Of India

कोलकाता/मुंबई। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने के मकसद से एनसीपी प्रमुख शरद पवार से बात की है। ममता और शरद पवार के बीच हुई बातचीत की पुष्टि एनसीपी नेता और महाराष्ट्र की उद्धव सरकार में मंत्री नवाब मलिक ने की है। 

नवाब मलिक ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और एनसीपी प्रमुख शरद पवार के बीच बातचीत के दौरान राज्य सरकारों के अधिकारों में केंद्र की तरफ से की जा रही दखलंदाज़ी के मसले पर भी बात हुई। खासतौर पर पिछले कुछ अरसे में पश्चिम बंगाल सरकार को लेकर केंद्र सरकार का जो रवैया रहा है, उस पर बातचीत हुई है। नवाब मलिक ने कहा है कि शरद पवार बीजेपी के इन हथकंडों के विरुद्ध विपक्षी पार्टियों को एकजुट करने के मकसद से दिल्ली जा सकते हैं। इतना ही नहीं, अगर ज़रूरत महसूस हुई तो शरद पवार पश्चिम बंगाल भी जाएंगे। 

झूठ का सारा कचरा बीजेपी के पास है : नवाब मलिक 

एनसीपी प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा कि पश्चिम बंगाल में तैनात तीन आईपीएस अधिकारियों को केंद्र सरकार जिस तरह सत्ता का दुरुपयोग करके जबरन दिल्ली बुला रही है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि केन्द्र सरकार सत्ता का दुरुपयोग कर अपने राजनीतिक बदला लेना चाहती है। नवाब मलिक ने कहा कि बीजेपी एक धोखेबाज पार्टी है और झूठ का सारा कचरा उसके पास है।

दरअसल जेपी नड्डा की पश्चिम बंगाल यात्रा के दौरान उनके काफिले पर पथराव हुआ था। बीजेपी ने इसके लिए तृणमूल कांग्रेस और पश्चिम बंगाल सरकार को कसूरवार ठहराया। जबकि तृणमूल कांग्रेस ने इसे बीजेपी की साज़िश और अंदरूनी लड़ाई का नतीजा करार दिया। केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने इस मामले में राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी को दिल्ली तलब कर लिया, जबकि कानून व्यवस्था पूरी तरह से राज्य सरकार का विषय है। ममता सरकार ने गृह मंत्रालय के इस आदेश को खारिज करते हुए अपने आला अफसरों को दिल्ली में पेशी के लिए भेजने से इनकार कर दिया।

इसके बाद मोदी सरकार ने पश्चिम बंगाल के अफसरों पर दबाव डालने के लिए एक नया तरीका निकाला। उसने नड्डा की यात्रा के दौरान सुरक्षा के लिए जिम्मेदार तीन आईपीएस अफसरों को डेप्युटेशन पर दिल्ली भेजने का इकतरफा आदेश दे दिया। हालांकि आम तौर पर राज्य में तैनात अफसरों को केंद्र सरकार की सेवा में भेजने का फैसला दोनों सरकारों की सहमति से होता है। लेकिन मोदी सरकार ने इमरजेंसी प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए सीधे आदेश जारी कर दिया। अब स्थिति यह है कि ममता सरकार इस आदेश को भी मानने से इनकार कर चुकी है। कुल मिलाकर स्थिति यह है कि पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले केंद्र और राज्य की सरकारों के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। इन्हीं हालात के बीच ममता बनर्जी ने अब विपक्षी दलों को एकजुट करने के लिए शरद पवार से बात की है।