दफ्तर दरबारी: क्यों असहाय साबित हुए सीएस अनुराग जैन, देर कर दी हुजूर आते आते
MP IAS: इंदौर में दूषित पानी से 15 जानें गंवाने के बाद निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव सहित दो आईएएस अधिकारी हटा दिए गए। जितनी देर इन अफसरों ने जनता की शिकायत सुनने में की, उतनी ही देर सरकार ने इन्हें हटाने में की। इस प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं।
इंदौर के भागीरथपुरा में गंदा पानी पीने से अब तक 15 लोग दम तोड़ चुके हैं। करीब 200 लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। हालांकि, सरकार ने हाईकोर्ट में मात्र 4 मौत होना स्वीकार किया है। खासी किरकिरी के बाद सख्त एक्शन दिखाने के लिए नगर निगम के जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई की। इंदौर नगर निगम के अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया को तत्काल प्रभाव से हटाया गया। इंदौर नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव को सुबह कारण बताओ नोटिस दिया गया जबकि रात होते-होते उनका भी भोपाल तबादला कर दिया। राज्य सरकार ने सहायक यंत्री और प्रभारी सहायक यंत्री को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया, जबकि प्रभारी उपयंत्री को सेवा से पृथक कर दिया गया है।
सरकार ने दोषी अफसरों पर कार्रवाई तो की लेकिन इस प्रक्रिया में देरी और उस पर भी केवल हटाए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। निगम के दोषी माने गए छोटे अफसरों पर दंडात्मक कार्रवाई हुई है लेकिन आईएएस अफसरों को केवल तबादले की सजा मिली है। जबकि नगरीय विकास एवं प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और महापौर पुष्यमित्र भार्गव सहित इंदौर के नेता बार-बार कह रहे हैं कि अफसर उनकी सुन नहीं रहे हैं।
माना जा रहा है कि अफसरों इतने ताकतवर हैं कि स्थानीय नेताओं के वे सुनते तक नहीं है और यह ताकत उन्हें भोपाल से मिलती है। अफसरों पर कार्रवाई में भी ऐसा ही। प्रशासनिक मुखिया अनुराग जैन ने सुबह समीक्षा बैठक की तो निगम आयुक्त को नोटिस जारी किया था। कहा गया कि यह कार्रवाई मुख्यमंत्री के निर्देश पर की गई है। फिर देर शाम को सीएम डॉ. मोहन यादव ने नगर निगम कमिश्नर दिलीप कुमार यादव को हटाने की जानकारी खुद दी। यह कार्य सुबह मुख्य सचिव अनुराग जैन भी कर सकते थे लेकिन श्रेय मुख्यमंत्री के खाते में गया।
इसके पीछे तर्क दिया गया कि आईएएस दिलीप कुमार यादव की नियुक्ति मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के करीबी होने के कारण की गई थी। इसलिए उन्हें हटाने का फैसला मुख्य सचिव भी नहीं कर पाए अन्यथा जिस सख्त तेवर के साथ सीएम कार्य करते हैं, इंदौर नगर निगम के दोषी अफसरों पर बहुत पहले कार्रवाई हो जानी थी। यानी, अफसरों की ताकत के आगे इंदौर के स्थानीय नेता ही नहीं असहाय नहीं है, खुद सीएम अनुराग जैन भी अफसरों को हटाने की ताकत नहीं दिखा पाए।
दो आईएएस अफसरों ने उतार दिया आर्टिफिशियल पानी
इंदौर में दूषित पानी ने जहां सरकार का पानी उतार दिया है, वहीं खंडवा में पीएम मोदी के प्रोजेक्ट जल संचय मिशन में राष्ट्रपति के हाथों 2 करोड़ का पुरस्कार पाने वाले 2 आईएएस भी चर्चा में हैं। 6 वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार के तहत खंडवा जिले की ग्राम पंचायत कावेश्वर को सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत श्रेणी में द्वितीय पुरस्कार दिया गया। 18 नवंबर 2025 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता और जिला पंचायत सीईओ डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा यह पुरस्कार ग्रहण किया था।
मीडिया ने खुलासा किया है कि अवॉर्ड के लिए एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से बनाई गई तस्वीरें और गलत आंकड़े अपलोड किए गए। सोशल मीडिया पर यह प्रचारित है कि छोटे गड्ढों को कुआं बताकर काम दिखाया गया। इस गड़बड़ी का खुलासा पुरस्कार के लिए अपलोड की गई तस्वीरों में एआई वॉटरमार्क के कारण हुआ है।
देश भर से सवाल उठने के बाद खंडवा जिला कलेक्टर आईएएस ऋषव गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि जिला प्रशासन द्वारा ब्लॉक स्तर एवं जिला स्तर पर गहन जांच में सत्यापित फोटो ही पोर्टल पर अपलोड की गई थीं। उधर, जल शक्ति मंत्रालय ने भी कहा कि जो फोटो सोशल मीडिरूा पर वायरल हैं वे सही है यानी एआई द्वारा निर्मित है लेकिन इन्हीं फोटो के आधार पर पुरस्कार नहीं दिया गया है। पुरस्कार दूसरे फोटों के आधार पर मिला है।
स्पष्टीकरण तो जारी हो गए लेकिन पुरस्कार और आईएएस अधिकारियों की कार्य प्रक्रिया पर सवाल तो उठ ही रहे हैं। यदि यह मान भी लिया जाए कि एआई निर्मित फोटो से पुरस्कार नहीं मिला है लेकिन सवाल तो यह है कि वेबसाइट पर एआई से निर्मित फोटो अपलोड किए ही क्यों गए? आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि ओरिजनल फोटो की जगह आर्टिफिशियल फोटो अपलोड किए गए।
एक आईएएस ने लगा दी आग...
समाज को बांटने की राजनीति करने वालों की बांछे खिली हुई हैं। आईएएस संतोष कुमार वर्मा ने एक बयान से वह काम कर दिया है जो नेता नहीं कर पा रहे थे। ब्राह्मण की बेटी को लेकर दिए गए इस बयान के विरोध और समर्थन में जातीय राजनीति सक्रिय हो गई है। अगले 15 दिनों तक संतोष कुमार वर्मा के समर्थन और विरोध में प्रदेश भर में आंदोलन हो रहे हैं।
भोपाल में सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. हीरालाल त्रिवेदी की अध्यक्षता में सर्वसमाज की एक बैठक हुई। बैठक में ब्राह्मण, कायस्थ, वैश्य गहोई, साहू समाज, करनी सेना एवं सपाक्स के पदाधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में कहा गया कि सरकार ने आईएएस संतोष वर्मा पर सरकार की कार्रवाई पक्षपात पूर्ण है। इसका विरोध करते हुए आईएएस संतोष वर्मा पर कार्रवाई की मांग को लेकर सोमवार को मुख्य सचिव एवं डीजीपी को ज्ञापन दिया जाएगा। मंगलवार को जिला मुख्यालय पर पुलिस अधीक्षक कार्यालय तथा अन्य नगर एवं कस्बा क्षेत्रों में संबंधित थाने पर सर्व समाज के लोग एकत्रित हो कर हनुमान चालीसा पाठ करेंगे। 7 से 11 जनवरी तक सभी सांसदों, मंत्रियों एवं विधायकों को उनके क्षेत्र में ज्ञापन सौंपे जाएंगे। सुनवाई न होने पर 18 जनवरी को मध्य प्रदेश बंद का आह्वान किया जाएगा। जनवरी अंत में राजधानी भोपाल में विशाल प्रदर्शन किया जाएगा।
विरोध शुरू हुआ तो आईएएस संतोष वर्मा के पक्ष में अजाक्स यानी एससी-एसटी कर्मचारियों का संगठन मैदान में उतर आया है। रविवार को अजाक्स संघ की जिला स्तरीय बैठक आयोजित हुई। अजाक्स अपने प्रांताध्यक्ष आईएएस संतोष वर्मा के समर्थन में 6 जनवरी को काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन करेगा। 13 जनवरी को एससी-एसटी महिला संगठनली निकालकर सभी कलेक्टरों को ज्ञापन इेंगे। 18 जनवरी को भोपाल में जनसभा होगी।
आईएएस संतोष वर्मा के बयान बाद सुप्त पड़ी ब्राह्मण राजनीति और राजनेता सक्रिय हो गए हैं। यानी इस बयान ने उन्हें अपनी राजनीतिक किस्मत चमकाने का मौका दे दिया है। उनका दबाव सरकार पर इतना ही हुआ है कि सरकार ने आईएएस संतोष वर्मा को पद से हटा दिया है। अनियमितता कर आईएएस पाने जैसे गंभीर मामले पर भी कार्रवाई अभी लंबित है। यह विडंबना ही है कि कदाचरण की बात बयान के विवाद में पीछे छूट गई है। आईएएस की लगाई आग को बुझाने में किसी की दिलचस्पी नहीं है। सब अपने हिस्से का ताप बटौर लेना चाहते हैं।
आईएएस ने चेताया था, अब बर्बादी देखते रहो
भोपाल मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट की ब्लू लाइन के लिए को रायसेन रोड आईटीआई के सामने वर्षों पुराने पेड़ काट दिए गए। इसकी अनुमति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। उच्चस्तरीय समिति ने सेंट्रल वर्ज के 67 पेड़ कटाई को मंजूर किया था लेकिन रोड किनारे ही पेड़ काट दिए गए। 11 मील से बंगरसिया की ओर पीडब्ल्यूडी की सात किमी लंबी रोड के लिए भी कोर्ट के निर्देश के बावजूद लगभग सभी पेड़ काट दिए गए है। अयोध्या बायपास पर ही करीब आठ हजार पेड़ कटाई पर एनजीटी ने स्टे दिया है लेकिन ढ़ाई हजार पेड़ निर्देश की गफलत में पहले ही काट दिए गए। भोपाल के चारों और रोज पेड़ काटे जा रहे हैं जबकि हाई कोर्ट पेड़ कटाई पर सरकार से जवाब तलब कर चुकी है।
ऐसे समय में करीब सात माह पहले उठा सिया की अनुमति का मामला फिर गरमा गया है। आपको याद होगा पर्यावरणीय अनुमति देने वाली कमेटी सिया के चेयरमैन रिटायर्ड आईएएस शिवराज सिंह वर्मा ने आरोप लगाया था कि आईएएस अधिकारियों ने सिया को बायपास कर 237 से ज़्यादा प्रोजेक्ट्स को गलत तरीके से मंजूरी दी है। विवाद बढ़ा तो पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी के निर्देश पर चेयरमैन का दफ्तर सील किया गया। चेयरमैन का आरोप था कि बार-बार याद दिलाने के बाद भी कई महीनों तक सिया की बैठक आयोजित नहीं कर आईएएस अधिकारियों पर खनन माफियाओं को नियमों का लाभ दिया और एक झटके में पर्यावरण अनुमति दे दी।
सिया चेयरमैन रिटायर्ड आईएएस शिवराज वर्मा ने चेताया था कि अफसरों ने माफिया से मिल कर पर्यावरण बर्बाद करने की इबारत लिखी। सरकार ने आईएएस को पद से तो हटा दिया मगर अनुमतियां रद्द नहीं की। इसी का परिणाम है एक सड़क या खनन के लिए लाखों पेड़ों का कटना। अब बाकी अनुमतियां कहां, कितना कहर ढ़ाएगी बताना मुश्किल है।




