दफ्तर दरबारी: आईएएस सर्विस मीट में अफसरों को शाबाशी या संदेश 

MP IAS MEET 2023: आईएएस सर्विस मीट 2023 का शुभांरभ करते हुए मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चुनिंदा अफ़सरों की दिल खोलकर प्रशंसा की। बीजेपी सरकार की विकास यात्रा से ठीक पहले इसके सूत्रधार अफसर इस तारीफ़ से खुश भी हैं और आशंकित भी..आखिर सीएम ने एसीएस की प्रशंसा क्यों की जब उनके विभाग के काम से अप्रसन्न हैं..

Updated: Jan 22, 2023, 09:26 PM IST

दफ्तर दरबारी: आईएएस सर्विस मीट में अफसरों को शाबाशी या संदेश 
सीएम शिवराज सिंह चौहान ने किया आईएएस सर्विस मीट 2023 का शुभारंभ

कोरोना संक्रमण के कारण रूकी रही आईएएस सर्विस मीट 2023 भोपाल में शुरू हुई है। खास बात यह है कि मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस सर्विस मीट का शुभांरभ करते हुए अफसरों की दिल खोल कर प्रशंसा की। बीजेपी सरकार की विकास यात्रा के सूत्रधार अफसरों के लिए यह तारीफ असल में अपने लक्ष्‍य को पूरा करने के संदेश भी है। यह संदेश एक तरह से दबाव की तरह कार्य कर रहा है। 

आईएएस सर्विस मीट के उद्घाटन अवसर पर मुख्‍यमंत्री ने जहां सीधी भर्ती के आईएएस की प्रशंसा करते हुए प्रमोटी आईएएस डिंडोरी कलेक्‍टर विकास मिश्रा, बड़वानी के कलेक्‍टर शिवराज वर्मा की भी प्रशंसा की है। अफसरों की तारीफ इसलिए की गई कि दूसरे अफसर भी उनसे प्रेरणा लें। मगर बात सिर्फ प्रेरणा की नहीं है। यह प्रशंसा कई अफसरों पर दबाव का काम कर रही है। खासकर जिलों में पदस्‍थ आईएएस पर। इसकी वजह 5 फरवरी से आरंभ होने जा रही विकास यात्रा है। विकास यात्रा में मंत्री अपने क्षेत्रों में सरकार के विकास के कामों को जनता के बीच ले जाएंगे। इस दौरान शिलान्‍यास, उद्घाटन आदि कार्य होंगे। जनहित की योजनाओं की जानकारी दी जाएगी।

यात्रा के मार्ग में आने वाले सरकारी दफ्तरों, आंगनवाड़ी केंद्रों, अस्‍पताल आदि का निरीक्षण भी किया जाएगा। यानी मिशन 2023 के तहत सरकार की ब्रांडिंग की जाएगी। और इस ब्रांडिंग का जिम्‍मा कलेक्‍टर पर हैं। वे ही विकास यात्राओं के सूत्रधार होंगे। यही कारण है कि सर्विस मिट में लगभग 30 जिलों के कलेक्‍टर नहीं पहुंचे। जानकारी बताती है कि वे जिलों में विकास यात्रा की तैयारी में जुटे हैं।

दूसरी तरफ, सर्विस मीट में अफसर विभिन्‍न गतिविधियों में अपने कौशल का प्रदर्शन करते नजर आए। हालांकि, मीट का एक उद्देश्‍य आईएस अफसरों का तनाव कम करना तथा मेलजोल बढ़ाना भी है लेकिन आईएएस अपने पसंदीदा समूह में ही दिखाई दिए। अमूमन अफसर अपनी बैच के समूह में रहना पसंद करते हैं और ऐसा ही इस मीट में भी दिखाई दिया। 

एसीएस अच्‍छे, मगर विभाग का काम बुरा, सीएम किससे खफा?

मैदान की स्थि‍तियों को भांपते हुए मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मीट में कहा है कि मैं वल्लभ भवन में हमेशा कहता हूं कि फील्ड में दौरा होने चाहिए। इसके बिना वास्तविकता का अंदाजा नहीं लग सकता। अगर हम नीचे वाले से रिपोर्ट लेंगे, तो यही कहेगा कि बहुत बढ़िया। शानदार परफॉर्मेंस है सर। मैं भी जब रिपोर्ट लेता हूं तो अच्छी-अच्छी बातें सामने आती हैं। लेकिन जब मैं सिंचाई की योजना देखने को चला गया तो पता चला कि वहां पानी नहीं हैं। कई जगह नहरें कटी-फटी पड़ी हैं। 

विभाग की कार्यप्रणाली की पोल खोलते हुए सीएम शिवराज सिंह चौहान ने विभाग के मुखिया अधिकारी एसीएस एसएन मिश्रा का यह कहते हुए बचाव किया कि वे एसीएस की आलोचना नहीं कर रहे हैं, ममिश्रा तो सिंचाई के लिए अच्छा काम कर रहे हैं। 

मुख्‍यमंत्री का यह कहना तुरंत ही चर्चा का विषय बन गया। वे एक तरफ तो विभाग के मुखिया अधिकारी की प्रशंसा कर रहे हैं और दूसरी तरफ विभाग के कामकाज की आलोचना कर रहे हैं। एक साथ मीठा-कड़वा कैसे? इस सवाल के साथ यह सवाल भी उठा कि क्‍यों जलसंसाधन विभाग पिछले कुछ दिनों से मुख्‍यमंत्री के निशाने पर हैं? विभाग के मंत्री तुलसीराम सिलावट हैं। मंत्री सिलावट केंद्रीय मंत्री ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया के समर्थक हैं। 

मध्‍य प्रदेश के आईपीएस बेचैन

मध्‍य प्रदेश के कई आईपीएस पिछले कुछ समय से मैदानी पोस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं। वे उम्‍मीद कर रहे थे कि जिस तरह आईएएस की मैदानी की पोस्टिंग हुई है उसी तरह नए साल में मध्य प्रदेश पुलिस में बड़ा फेरबदल होगा। लेकिन उनका यह इंतजार और बेचैनी बढ़ती जा रही है। 

वर्ष 2023 चुनावी साल भी है। ऐसे में सरकार अपने हिसाब से नई जमावट करना चाहती है। अक्टूबर-नवंबर में आईएएस अफसरों के तबादले सरकार कर चुकी है। तब प्रमोशन की वजह से आईपीएस की सूची रोक ली गई है। ज‍बकि तबादला सूची पर मुख्यमंत्री की सहमति मिल चुकी थी। अब नए समीकरणों के अनुसार फिर से सूची पर मशक्‍कत होगी। यह इसलिए भी कि जिन अफसरों के फील्ड में तीन साल पूरे हो चुके हैं उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव से पहले नई पदस्थापना करनी जरूरी है। यदि सरकार यह काम नहीं करेगी तो चुनाव आयोग करेगा।

लिहाजा, सरकार सारे समीकरणों को साधने का कार्य करेगी। लेकिन, 5 से 25 फरवरी तक चलने वाली विकास यात्रा को देखते हुए इस तबादला सूची के और टलने की संभावना है। यानी, आईपीएस को मैदानी पोस्टिंग के लिए जरा और इंतजार करना होगा। 

कर्मचारियों के डीए में वृद्धि बनी बीरबल की खिचड़ी 

मध्य प्रदेश के पांच लाख नियमित कर्मचारी और साढ़े चार लाख पेंशनर अपनी मांग को पूरा करवाने के लिए सरकार की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। कर्मचारी सरकार से मांग कर रहे हैं उनका भत्‍ता भी केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर कर दिया जाए मगर अब तक उनकी बात सुनी नहीं गई है। अभी केंद्रीय कर्मचारियों को 38 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिया जा रहा है। जबकि राज्य के कर्मचारियों को 34 प्रतिशत मिल रहा है। वहीं पेंशनरों को 33 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिया जा रहा है, जो केंद्र सरकार के पेंशनरों की तुलना में पांच प्रतिशत कम है।

शिवराज सरकार ने अगस्त 2022 में तीन प्रतिशत भत्ता बढ़ाकर केंद्रीय कर्मचारियों के समान 34 प्रतिशत किया था। सितंबर 2022 में केंद्रीय कैबिनेट ने अपने कर्मचारियों का भत्ता बढ़ाकर 38 प्रतिशत कर दिया। राज्य के कर्मचारी महंगाई भत्ते के मामले में फिर केंद्रीय कर्मियों से पीछे चल रहे हैं। 
कर्मचारी उम्‍मीद कर रहे हैं कि यह गणतंत्र दिवस खुशखबरी लेकर आएगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कर्मचारियों का महंगाई भत्ता चार प्रतिशत बढ़ाकर 38 प्रतिशत करने की घोषणा कर सकते हैं। उनकी उम्‍मीद केवल भत्‍ता बढ़ाने की घोषणा करना ही नहीं है बल्कि उसे जनवरी के वेतन से जुड़कर मिलने की आस भी है।