दफ्तर दरबारी: बीजेपी की राजनीति में एसपी कलेक्‍टर की दुर्गति, जनता बोली लाचार हैं अफसर

क्‍या मध्‍य प्रदेश में सबकुछ ठीक है? यह सवाल इसलिए क्‍योंकि नेता अफसरों को पीट रहे हैं, पुलिस अधिकारी लोगों को धमका रहे हैं, महिला जनप्रतिनिधियों की जगह पतियों को शपथ दिलाई जा रही है। इतना सब होने के बाद भी कार्रवाई नहीं हो रही है। दिखाने के लिए भी नहीं।

Updated: Sep 16, 2022, 09:26 AM IST

दफ्तर दरबारी:  बीजेपी की राजनीति में एसपी कलेक्‍टर की दुर्गति, जनता बोली लाचार हैं अफसर
CEO SK Mishra

मध्‍य प्रदेश में मैदानी अमला तो ठीक आईएएस-आईपीएस भी राजनीतिक दबाव में गलत काम कर रहे हैं। यह आरोप विपक्ष ने नहीं, सत्‍ता दल बीजेपी के विधायक नारायण त्रिपाठी ने लगाया है। सतना क्षेत्र में ब्राह्मण राजनीति के प्रतीक मैहर विधायक नारायण त्रिपाठी दलित महिला सरपंच के साथ हुई मारपीट के मामले में प्रशासन के खिलाफ ही नहीं अपनी पार्टी के नेताओं के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया है। उन्‍होंने सतना के कलेक्‍टर-एसपी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि दबाव में काम किया है तो उसके दुष्‍परिणाम भोगने पड़ेंगे।

मैहर के जरियारी गांव में दलित महिला सरपंच के साथ मारपीट और छीना झपटी हुई थी। दबंग पटेल समूह द्वारा की गई मारपीट के बाद प्रशासन ने गंभीर अपराध की धाराओं को बदल कर सामान्‍य अपराध का प्रकरण दर्ज कर आरोपी की जमानत होने दी। इस पर नारायण त्रिपाठी भड़क गए हैं। उनकी ओर से कहा गया है कि आरोपी पर गांजा तस्‍करी का मुकदमा दर्ज है, वह मुंबई से होने वाली ड्रायफ्रूट तस्‍करी में संलिप्त रहा है। वह कुछ गुंडो के साथ ग्रामसभा में पहुंच कर दलित महिला सरपंच से मारपीट करता है। महिला सरपंच की  शिकायत पर गंभीर अपराध की धाराओं में अपराध दर्ज किया जाता है लेकिन बाद में पटेल सांसद व पटेल मंत्री के दबाव में पटेल आरोपी को बचाने के लिए एसपी और कलेक्टर मामले की धारा बदल देते हैं। आरोपी के विरुद्ध 151 की धारा में अपराध दर्ज कर जमानत दिलवा दी जाती है। 

बीजेपी विधायक नारायण त्रिपाठी ने इसे बीजेपी सरकार के खिलाफ षड्यंत्र कहा है। सवाल तो वाजिब है कि आखिर गंभीर धाराओं में केस दर्ज होने के बाद आरोपी को बचाने के लिए कलेक्‍टर व एसपी ने क्‍या वाकई में बीजेपी सांसद और बीजेपी के ही मंत्री के दबाव में काम किया है और किया है तो क्‍यों? 

इस तरह, सतना में दलित महिला सरपंच की पिटाई और दबंगों को छोड़ दिए जाने के बाद बीजेपी की अंदरूनी राजनीति गर्मा गई है। बीजेपी विधायक नारायण त्रिपाठी ने तो क्षेत्रीय राजनीति समीकरणों के तहत आवाज उठाई है मगर बीजेपी विधायक के मोर्चा खोले देने से साफ हो गया कि प्रशासन किस तरह नेताओं के दबाव में काम कर रहा है। 

रीवा में जनता बोली, लाचार हैं अफसर 

सतना में बीजेपी विधायक नारायण त्रिपाठी ने प्रशासन पर अपनी ही पार्टी के नेताओं के दबाव गलत काम करने का आरोप लगाया तो पड़ोसी जिले रीवा में जनता कलेक्‍टर और एसपी को असहाय और लाचार कह रही है। प्रशासन पर यह तंज जनपद सीईओ एसके मिश्रा पर बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए प्राणघातक हमले के बाद किया जा रहा है। 

रीवा जिले में सिरमौर जनपद पंचायत सीईओ एसके मिश्रा पर जानलेवा हमले पहले बीजेपी विधायक केपी त्रिपाठी से विवादित बातचीत का ऑडियो वायरल हुआ था। बाद में एसके मिश्रा पर हमले के लिए पुलिस ने जिन बीजेपी पदाधिकारियों को पकड़ा वे सेमरिया बीजेपी विधायक केपी त्रिपाठी के करीबी निकले। मामला साफ हो गया कि विधायक केपी त्रिपाठी से हुई बातचीत सीईओ को भारी पड़ी। विधायक समर्थकों की इस हरकत से बीजेपी घिर गई। मामला गर्माता देख आरोपी पदाधिकारियों को तो बाहर का रास्‍ता दिखाया ही गया विधायक केपी त्रिपाठी को भी भोपाल तलब किया गया। 

इस तरह, पार्टी ने भले ही डैमेज कंट्रोल की कोशिश की है लेकिन मैदान में बात संभाले नहीं संभल रही है। इस घटना के बाद लोग चौक चौराहों के साथ सोशल मीडिया मंचों पर एसपी नवनीत भसीन और कलेक्‍टर मनोज पुष्‍प को असहाय और लाचार कह रहे हैं। लोग खुल कर कह रहे हैं कि बीजेपी के विधायक की दबंगई के आगे आईएएस व आईपीएस रैंक के अधिकारि‍यों की कोई पॉवर ही नहीं है। इसलिए एक अफसर पर हमला हुआ और कार्रवाई करने की जगह वे अस्‍पताल में लाचार खड़े रहे। 

अब तो दिखावे के लिए भी नहीं होती कार्रवाई 

सुदर्शन फाकिर का एक शेर है,

‘मेरा कातिल ही मेरा मुंसिफ है/ क्‍या मेरे हक में फैसला देगा।’ 

प्रदेश के प्रशासनिक अमले के साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। पहले पंचायत चुनाव में सत्‍ता और रसूख के आगे नतमस्‍तक होने के आरोप लगे तो अब अफसर संवैधानिक नियमों को ही हवा में उड़ा रहे हैं। क्‍या यह नियम विरूद्ध नहीं है कि पंचायत चुनाव में पत्‍नी विजयी होती है लेकिन शपथ लेता है पति? मैदान में काम कर रहे छोटे दर्जे के अमले से भी यह चूक स्‍वीकार्य नहीं है तो फिर एसडीएम यह गलती करे तो कैसे बर्दाश्‍त हो? एक नहीं नौ पतियों को उनकी निर्वाचित पत्नियों की जगह शपथ दिलवा दी गई और एसडीएम पर अब तक कोई कार्रवाई सार्वजनिक नहीं की गई है। 

मामला श्‍योपुर का है। यहां एसडीएम ने महिला जनप्रतिनिधियों की जगह उनके पति को शपथ दिला दी। विजयपुर के जनपद पंचायत में एक दो नहीं निर्वाचित 9 महिला सदस्यों की जगह उनके पतियों को शपथ दिलाई गई। पतियों को शपथ दिलाए जाने का पूरा मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। जब पंचायत व्‍यवस्‍था में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए ही आरक्षण व्‍यवस्‍था की गई तो एसडीएम नीरज शर्मा और विजयपुर जनपद के सीईओ बलवीर सिंह कुशवाह ने महिला जनपद सदस्यों के पतियों को कैसे शपथ दिलवा दी? क्‍यों उन्‍होंने सरपंच या पंच पति की अवधारणा को पुष्‍ट किया? 

लापरवाही और दबंगई की हद यह है कि जनपद सदस्यों के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में विजयपुर जनपद के 25 निर्वाचित जनपद सदस्यों में से अध्यक्ष सहित सिर्फ 13 सदस्यों को शपथ ग्रहण में बुलाया गया। बाक‍ी जनप्रतिनिधियों को कार्यक्रम की जानकारी तक नहीं दी गई। 

इसके पहले रीवा के ग्राम पंचायत पताई में पंचायत सचिव पवन कुमार पटेल ने उप सरपंच मंजू सिंह की जगह उसके पति पुनीत सिंह को शपथ दिला दी थी। दमोह के गैसाबाद ग्राम पंचायत में भी पंचायत सचिव ने निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की जगह उनके पतियों को शपथ दिलवा दी थी। 

संवैधानिक नियमों की इस तरह से खुलेआम अवहलेना पर पहले सख्‍त कार्रवाई की जाती थी। दूसरी तरफ, सिंगरौली जिले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सिंगरौली के गोंदवाली गांव का बताया जा रहा है जहां एक सड़क हादसे के बाद प्रदर्शन कर रहे लोगों को समझाने के लिए टीआई पहुंचे थे लेकिन उन्होंने अपना आपा खो दिया और समझाइश देने की जगह धमकाते और फर्जी केस डालने की धमकी देने लगे। इसी दौरान उनका किसी ने वीडियो बना लिया जो अब वायरल हो गया है।

लोकतंत्र को धता बताते ऐसे तमाम मामलों में एक्‍शन लिया जाना चाहिए ताकि संदेश दिया जा सके कि इस तरह की लापरवाहियां और ‘पति सरकार’ को बर्दाश्‍त नहीं किया जाएगा। यह संदेश देना तो दूर दिखावे के लिए भी दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की सूचना नहीं है। पति सरकार की स्‍थापना कर रहे अफसरों को नोटिस जारी करने से लेकर उन पर की गई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए ताकि यह संदेश आम हो कि महिला चुनी गई है तो वही सत्‍ता सूत्र संभालेगी उसका पति नहीं। 

अरबपति आरटीओ पर किसका वरदहस्‍त 

जबलपुर में आरटीओ संतोष पाल के घर ईओडब्‍ल्‍यू छापे में आमदनी से 650 गुना ज्यादा संपत्ति का खुलासा हुआ है। संतोष पाल 4 सालों से जबलपुर में पदस्थ हैं। उनके सत्‍ता और उसके बाहर नेताओं, अफसरों तथा प्रभावशाली लोगों से गहरे संबंध है। यही कारण है कि उन पर लगे हर आरोप को अब तक नजरअंदाज किया जाता रहा है। 

जैसे, संतोष पाल पर आरोप लगते रहे हैं उनके कई रिश्तेदार आरटीओ के विभिन्न कामों में ठेका और पार्टनरशिप में शामिल हैं तथा वारे न्‍यारे कर रहे है।  बीते सालों में संतोष पाल के खिलाफ फर्जी जाति प्रमाण पत्र, ऑटो चालक को गांजा बेचने के झूठे आरोप में फंसाने की धमकी देने, रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस, परमिट सहित वीआईपी नंबर्स की मनमानी फीस वसूलने और कमीशन लेने जैसे आरोप लगे हैं। 

तमाम आरोपों और शिकायतों के बाद भी वे बचे हुए थे लेकिन अब हुई ईओडब्‍ल्‍यू की इस कार्रवाई के पेंच टटोले जा रहे हैं। दावे किए गए हैं कि उनके पास अधिक सम्‍पत्ति मिल सकती थी लेकिन छापे का संकेत मिलने के बाद उन्‍होंने कुछ माल रफादफा कर दिया। यदि संकेत था तो संपर्कों के बल पर आरटीओ संतोष पाल अपने यहां छापा रूकवा क्‍यों नहीं सके?  ईओडब्‍ल्‍यू तो राज्‍य सरकार के अधीन ही काम करता है। 

चर्चा है कि अपनी ही सरकार में उसी सरकार के अधीन आने वाले ईओडब्‍ल्‍यू की यह कार्रवाई एक संदेश है। यह छापा भ्रष्‍टाचार की शिकायतों और खुलासे के बाद परिवहन विभाग की बदनामी की शृंखला का एक हिस्‍सा है। परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के विभाग में भ्रष्‍टाचार की शिकायतें पुरानी हैं। कुछ दिनों पहले परिवहन आयुक्‍त को हटाने के पीछे भ्रष्‍टाचार और टोल नाकों पर अवैध वसूली की शिकायत प्रमुख कारण बताया गया था। परिवहन आयुक्‍त को हटाने के पहले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की एक चिट्ठी वायरल हुई थी जिसमें मुख्‍य सचिव से कहा गया था कि मध्‍य प्रदेश में ट्रक संचालकों से हो रही अवैध वसूली रोकी जाए। 

परिवहन आयुक्‍त को हटाने के बाद जबलपुर आरटीओ का नंबर आया है। जिनके यहां आय से 650 गुना अधिक संपत्ति मिलने का आकलन है। यह तो छोटी मछली हैं। पूरे प्रदेश में परिवहन विभाग में भ्रष्‍टाचार का जो सिस्‍टम काम कर रहा है उसकी जड़ तक तो सरकार पहुंची ही नहीं है। संतोष पाल तो केवल मोहरा हैं, निशाना तो कहीं ओर लगाया गया है। अपनी सरकार में अपनी जांच एजेंसी के जरिए यह कार्रवाई राजनीति की ऊंची उड़ान को रोकने के लिए है और जड़ों का सिंचाई स्रोत काटने की जुगत लगती है।