मौत के 49 साल भी कायम है मीना कुमारी का मैजिक

बॉलीवुड की ट्रेजडी क्वीन मीना कुमारी ने अपने तीस साल के फिल्मी करियर में 90 से ज्यादा फिल्में कीं, सेट पर उनकी अदाकारी देखकर राजकुमार जैसे दिग्गज भी अपने डायलॉग भूल जाते थे, अपने दौर में सबसे ज्यादा फीस लेने वाली एक्ट्रेस थीं मीना

Updated: Mar 31, 2021, 06:20 PM IST

मौत के 49 साल भी कायम है मीना कुमारी का मैजिक
Photo Courtesy: twitter

बॉलीवुड में ट्रेजडी क्वीन के नाम से फेमस मीना कुमारी एक ऐसी अदाकारा रही हैं जिनका मैजिक उनकी मौत के 49 साल बाद भी बरकरार है। टीवी पर मीना कुमारी की कोई फिल्म आ रही हो तो आप चैनल बदलना भूलकर फिल्म देखने लग जाते हैं। उनका जादू आज भी कायम है। उनकी सहज एक्टिंग, उनकी खूबसूरती की मिसालें दी जाती हैं। उनकी एक्टिंग और डायलॉग्स डिलेवरी को आज की कई टॉप एक्ट्रेस कॉपी करती हैं।

पैदा होते ही पिता ने अनाथ आलय में छोड़ दिया था

1 अगस्त, 1932 को जन्मी मीना कुमारी की दो बड़ी बहने थीं, घर में तीसरी बेटी के पैदा होने पर उनके पिता ने पहले तो उन्हें अनाथ आलय में ले जाकर छोड़ दिया था। बाद में कुछ घंटों बाद उनसे रहा नहीं गया और वे मीना को घर वापस ले आए। मीना कुमारी ने महज सात साल की उम्र में फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था। उन्होंने अपने तीस साल के  फिल्मी कॅरियर में करीब 90 से ज्यादा फिल्मों में एक्टिंग की। सन 1940 की फिल्म एक ही भूल में विजय भट्ट ने बेबी महजबीं से बदल कर बेबी मीना कर दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो मीना कुमारी की नानी गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के छोटे भाई की बेटी थी,

  पाकीजा को बनने में लगे थे 16 साल

मीना कुमारी ने फिल्मी दुनिया में फरजंद-ए-वतन नाम की फिल्म से डेब्यू किया था। यह फिल्म सन 1939 में रिलीज हुई थी। उनकी यादगार फिल्मों में पाकीजा का नाम सबसे पहले लिया जाता है। वहीं साहब बीवी और गुलाम, बैजू बावरा, परिणीता, कोहिनूर,दिल अपना और प्रीत पराई, आजाद, एक ही रास्ता, मिस मैरी, शारदा आरती, भाभी की चूडियां, मैं चुप रहूंगी, चित्र लेखा, काजल,फूल और पत्थर, मंझली दीदी, मेरे अपने में उनकी एक्टिंग की मिसालें दी जाती हैं।  मीना के पति कमाल अमरोही ने उनके लिए फिल्म पाकीजा बनाई थी, फिल्म को पूरा पूरा होने में 16 साल का वक्त लगा। फिल्म की रिलीज के कुछ महीनों बाद मीना कुमारी का निधन हो गया।  

मीना कुमारी को एक्टिंग से ज्यादा पढ़ने का था शौक

मीना कुमारी का असली नाम महजबीन था। उनका फिल्मों में ज्यादा इंट्रेस्ट नहीं था, उन्हें किताबें पढ़ने का शौख था, वे दूसरे बच्चों की तरह स्कूल जा कर पढ़ाई करना चाहती थीं। लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण पढ़ाई आधूरी छोड़ कर उन्हें फिल्मों में एक्टिंग करनी पड़ी।

परिवार के खिलाफ जाकर 15 साल बड़े कमाल अमरोही से की शादी

मीना कुमारी ने महज 19 साल की उम्र में अपने से 15 साल बड़े कमाल अमरोही से निकाह किया था। उनके घर वाले इस शादी के खिलाफ थे। बावजूद इसके उन्होंने शादी की थी। उनकी यह शादी कामयाब नहीं रही, शादी के 8 साल बाद दोनों ने तलाक ले लिया था। जिसके कई साल बाद उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ, मीना और कमाल दोबारा शादी करना चाहते थे, लेकिन धार्मिक मान्यता के अनुसार मीना को किसी औऱ से शादी करके तलाक मिलने पर ही वे कमाल अमरोही से शादी कर सकती थी। इस में एक्ट्रेस जीनत अमान के पिता अमानउल्लाह खान ने मदद की। उन्होंने अमान से पहले शादी की फिर बाकायदा तलाक लिया और कमाल अमरोही से दोबारा शादी की। कहा जाता है जिनदिनों वे कमाल अमरोही से दूर थीं उसी दौर में उन्हें शराब की लत लग गई थी।

सफेद रंग से था खास लगाव

ट्रेजडी क्वीन मीना कुमारी को सफेद रंग से खासा लगाव था। वे सफेद कपड़े पहनना पसंद करतीं थीं, और तो और उनके घर का ज्यादातर सामान भी सफेद हुआ करता था। उन्हें फिल्मी पार्टियों में जाना कतई पसंद नहीं था लेकिन अगर वे किसी पार्टी में जाती तो सफेद साड़ी में नजर आती।

  इनाम में मिला सौ रुपए का नोट

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार डायरेक्टर प्रोड्यूसर केदार शर्मा जब भी किसी एक्टर के काम से खुश होते थे तो उन्हें इनाम के तौर पर एक दुअन्नी देते थे, बाद में उन्होंने चवन्नी देना शुरु कर दिया था।.एक बार मीना कुमारी उनकी फिल्म चित्रलेखा की शूटिंग कर रही थीं, तब किसी शॉट पर केदार शर्मा ने मीना की तारीफ की, तब मीना कुमारी ने कहा कि शर्माजी मेरे पास आपकी दुअन्नी और चवन्नियां बहुत जमा हो गई हैं। अब आप अपने इनाम का दाम बढ़ा दीजिए। उस दिन तो बात हसीं में टाल दी गई। फिर एक दिन एक सीन में मीना कुमारी की अदाकारी से खुश हो कर केदार शर्मा ने मीना को सौ रुपए का नोट इनाम में दिया था।

गुलजार ने मीना कुमारी के बदले रखा था रोजा

मीना कुमारी को गजलें लिखने का शौख था। वे अपना गम मिटाने के लिए शेर लिखा करती थीं। गुलजार उनके अच्छे दोस्त थे। दोनों अक्सर अपनी शेरो-शायरी सुनाया करते थे। कहा जाता है कि जब मीना कुमारी को लीवर की बीमारी हो गई थी, वे रमजान के महीने में रोजा रखने में असमर्थ थीं, तब गुलजार ने मीना के बदले के रोजे तक रखे थे। मीना कुमारी का कहना था कि गुलजार जैसा जहीन दोस्त और इनसान दुनिया में कोई दूसरा नहीं है।

1963 में बेस्ट एक्ट्रेस के सभी नॉमिनेशन में था मीना का नाम

अपने तीस साल के करियर में मीना कुमारी को चार बार बेस्ट ऐक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला। वे 1954 में आयोजित पहले फिल्मफेयर में अवॉर्ड जीतने वाली पहली एक्ट्रेस थीं। इस साल उन्हें बैजू बावरा के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का अवॉर्ड मिला था। फिर परिणीता सम्मानित किया गया। एक दौर वह भी आया जब साल 1963 में बेस्ट ऐक्ट्रेस के सभी नॉमिनेशन में मीना कुमारी का ही नाम था। फिर उन्हें साहब बीवी और गुलाम के लिए बेस्ट ऐक्ट्रेस का अवॉर्ड दिया गया। उनका आखिरी फिल्मफेयर अवार्ड 1966 में फिल्म काजल के लिए दिया गया था।