सुधर्मे रतो सर्वविज्ञैर्नमस्य, स्तमोनाशकृद्वै सदा सौम्यरूप: परिव्राजको ज्ञानिनामग्रगण्य: प्रकाश स्वरूपं गुरुं वै नमाम:

महामोह तमपुंज जासु वचन रविकर निकर

Publish: Nov 10, 2020, 07:57 AM IST

सुधर्मे रतो सर्वविज्ञैर्नमस्य, स्तमोनाशकृद्वै सदा सौम्यरूप: परिव्राजको ज्ञानिनामग्रगण्य: प्रकाश स्वरूपं गुरुं वै नमाम:

सुधर्मे रतो सर्वविज्ञैर्नमस्य-
स्तमोनाशकृद्वै सदा सौम्यरूप:।
परिव्राजको ज्ञानिनामग्रगण्य:
प्रकाश स्वरूपं गुरुं वै नमाम:

श्लोकार्थ- जो शास्त्रीय धर्म मार्ग में निरत हैं,सभी विद्वानों के द्वारा पूज्य हैं, अज्ञान रूपी अन्धकार को नष्ट करने वाले हैं सदा सौम्यरूप हैं। परमहंस परिव्राजक हैं ज्ञानियों में प्रमुख हैं ऐसे सूर्य स्वरूप सदगुरु देव को हम नमन करते हैं।
श्रीमद् गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज ने भी श्री राम चरित मानस में गुरु देव को सूर्य तथा उनके वचनों को सूर्य की किरण से उपमित किया गया है।
महामोह तमपुंज जासु वचन रविकर निकर
जैसे भगवान भुवन भास्कर उदय होते ही तीनों लोकों के अन्धकार को दूर कर देते हैं।उसी प्रकार मोहान्धकार को दूर करने के लिए सद्गुरु सूर्य के समान हैं। गुरु भक्ति के द्वारा अनेक दोषों पर विजय प्राप्त की जा सकती है। शास्त्र कहते हैं कि काम पर विजय संकल्पों के त्याग से मिलती है। और काम के त्याग से क्रोध पर विजय मिलती है।अर्थ को अनर्थ का कारण समझने से लोभ पर विजय प्राप्त की जा सकती है। अध्यात्म विद्या से शोक-मोह का नाश होता है। तत्त्व विचार से भय का नाश होता है।दम्भ का नाश संतों की उपासना से होता है।दया के द्वारा आधिभौतिक, समाधि के द्वारा आधिदैविक और योगबल से आध्यात्मिक तापों पर विजय प्राप्त की जा सकती है। सात्त्विक आहार विहार,संगत आदि से निद्रा पर विजय प्राप्त की जा सकती है।सत्व गुण के द्वारा रजोगुण और तमोगुण पर विजय मिल सकती है और उपरति के द्वारा सत्व गुण को भी जीता जा सकता है।
ये सम्पूर्ण साधन बहुत कठिन हैं। अतः जो सरलता से इन सब पर विजय प्राप्त करना चाहता हो उसके लिए कहा गया है कि-
एतत् सर्वं गुरौ भक्त्या,
पुरुषो ह्यंजसा जयेत् ।

अर्थात् गुरु देव की भक्ति के द्वारा साधक इन सभी दोषों पर सुगमता से विजय प्राप्त कर सकता है।जब ऐसे दुर्गम कार्यों को  हम गुरु भक्ति के द्वारा सुगम बना सकते हैं तो प्रत्येक बुद्धिमान पुरुष को चाहिए कि सदगुरु के चरणारविन्द की सेवा करके आत्मकल्याण की दिशा में निरन्तर अग्रसर हों।