Chhattisgarh News : अफसर पर भड़का फॉरेस्ट गार्ड

कोरबा के कटघोरा वन परिक्षेत्र में एक बीट गार्ड ने अपने ही सीनियर फॉरेस्ट रेंजर के खिलाफ अवैध बांस कटाई के खिलाफ जमकर धमकाया, और फिर केस दर्ज कर लिया। घटना का वीडियो हुआ वायरल

Publish: Jul 20, 2020 08:43 PM IST

Chhattisgarh News : अफसर पर भड़का फॉरेस्ट गार्ड

छतीसगढ़ के कोरबा जिले में कटघोरा रिजर्व फॉरेस्ट का एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। जहां एक बीट गार्ड ने अवैध बांस की कटाई के आरोप में अपने ही सीनियर रेंजर के खिलाफ केस दर्ज कर दिया। इतना ही नहीं बीट गार्ड ने अपने अधिकारी को जमकर धमकाया, और कहा कि आप अपराधी हैं, आपने मेरे क्षेत्र में अपराध किया है। उसने कई नियमों के तहत रेंजर के खिलाफ केस दर्ज किया है। रेंजर और बीट गार्ड के विवाद का वीडियो जमकर वायरल हो रहा है।

बीट गार्ड ने रेंजर को बांस की अवैध कटाई करते पकड़ा

दरअसल कोरबा जिले के हल्दीबाड़ी बीट में कटघोरा परिक्षेत्र के रेंजर मृत्युंजय सिंह ने 16 जुलाई को हल्दीबाड़ी स्थित बांस बाड़ी में 11 मजदूरों को लाकर 353 नग बांसों की कटाई करवा दी। बांस की कटाई के वक़्त वहां का बीट गार्ड शेखर रात्रे सरकारी काम से मरवाही गया था। शुक्रवार की सुबह जब शेखर रात्रे वापस अपनी ड्यूटी पर पहुंचा तो मौके पर बांस की कटाई के लिए मजदूर बांस बाड़ी में मौजूद थे। बिना किसी सरकारी आदेश के बांस की कटाई करवाने को लेकर बीट गार्ड शेखर गुस्से में आ गया।

रेंजर, डिप्टी रेंजर, 11 मजदूरों पर बनाया केस

बीट गार्ड शेखर ने अपने सीनियर रेंजर समेत 11 मजदूरों पर वन अधिनियम के तहत केस बना दिया। बीट गार्ड शेखर ने अपने सीनियर रेंजर को जमकर धमकाया। बीट गार्ड ने कहा कि आप रेंजर तो अपने लिए होंगे, मेरे गैरमौजूदगी में पेड़ कैसे काट दिए, आप अपराधी हैं, मैं खड़े-खड़े वर्दी उतरवा दूंगा। 

ईमानदारी से कार्य कर रहा हूं, किसी तरह का कोई डर नहीं

अपने सीनियर के खिलाफ कार्रवाई करने वाले बीट गार्ड शेखर का कहना है कि वो अपना कर्तव्य का पालन कर रहे हैं। इसलिए उन्हें किसी बात का डर नहीं है। वो सत्य के साथ खड़े हैं और सत्य कभी पराजित नहीं होता। मुझ पर मेरे अधिकारी क्या कार्रवाई करेंगे, मुझे इस बात की कोई फिक्र नहीं है।

अपनी जिम्मेदारी का है अहसास, सीनियर का किया सम्मान

अपने ही सीनियर अफसरों के खिलाफ केस दर्ज करने वाले बीट गार्ड शेखर सिंह रात्रे ने प्रोटोकाल का पालन भी उसी शिद्दत से किया। वे अगले ही दिन आरोपित अपने रेंजर मृत्युंजय शर्मा के दफ्तर पहुंचे और उन्हें सैल्यूट कर प्रकरण प्रतिवेदन सौंपा। शेखर ने जब पीओआर प्रस्तुत कर एफओसीआर की मांग की।

गार्ड को सिविल कोर्ट जाने की मिली परमीशन

नियमानुसार इस तरह केस पेश करने पर रेंजर को एफओसीआर अलॉट करना होता है। प्रक्रिया पूरी किए बगैर लौटा देने के बाद बीट गार्ड शेखर सिंह डिप्टी रेंजर अजय कौशिक के पास गए और लोकसंपत्ति की धारा 1983 की धारा-3 के अधिकार का प्रयोग करने आवेदन दिया। डिप्टी रेंजर अजय कौशिक ने आवेदन रेंजर को फारवर्ड कर दिया। इसके बाद बीट गार्ड शेखर को सिविल कोर्ट में जाने की अनुमति मिल गई। अब देखना होगा कि सिविल कोर्ट में उसे न्याय मिल पात है या नहीं।