Chhattisgarh: सात समंदर पार पहुंची छत्तीसगढ़ के महुए की महक, इंग्लैंड की कंपनी ने दोगुने दाम पर खरीदा महुआ

Chhattisgarh Export: छत्तीसगढ़ सरकार की योजनाओं की वजह से वनवासियों की वनोपजों को मिल रही है अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में जगह

Updated: Oct 15, 2020 11:31 AM IST

Chhattisgarh: सात समंदर पार पहुंची छत्तीसगढ़ के महुए की महक, इंग्लैंड की कंपनी ने दोगुने दाम पर खरीदा महुआ

रायपुर। छत्तीसगढ़ में महुए के बाज़ार को नया विस्तार मिला है, अब राज्य का महुआ देश की सीमाओं का पार करते हुए सात समंदर पार पहुंच गया है। छत्तीसगढ़ का महुआ इंग्लैंड भेजा गया है। फिलहाल पहली खेप में राज्य से 20 क्विंटल महुआ भेजा गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि इंग्लैंड की ही तरह दूसरे देशों से भी महुए की डिमांड आएगी। सबसे अच्छी बात यह है कि वनवासियों की इस उपज को दोगुने दाम पर बेचा गया है। पहले तो सरकार ने तीस रुपये किलो की दर से समर्थन मूल्य पर वनवासियों से महुआ खरीदा और अब इसे 60 रुपए किलो की दर से विदेश भेजा गया है। यह व्यापार वनवासियों और सरकार दोनों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रहा है। कोरोना काल में आर्थिक मंदी की मार झेल रहे प्रदेश और वनवासियों को इससे लाभ मिलने की उम्मीद है।

दरअसल छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश के वनवासियों के लिए कई योजनाएं चला रही है। इन्ही योजनाओं की वजह से वनवासियों की वनोपजों को अंतर्राष्ट्रीय बाजार मिल रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार 31 लघु वनोपजों की खरीदी समर्थन मूल्य पर कर रही है। जिससे प्रदेश के लघु वनोपज संग्रहण करने वाले वनवासियों को रोजगार के साधन मिलने लगे हैं। अपने अथक प्रयासों से सरकार लघुवनोपजों को विदेशों में बेच रही है। इससे सरकार के साथ-साथ वनवासियों को भी फायदा मिल रहा है। छत्तीसगढ़ के वन मंत्री मोहम्मद अकबर का कहना है कि वनांचल में रहने वाले आदिवासियों को उनकी वनोपज के अच्छे दाम मिल रहे हैं। इससे वनवासियों की आर्थिक स्थित मजबूत हो सकेगी। सरकार समाज के हर वर्ग को आर्थिक, सामाजिक सुरक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर वनमंडल से 20 क्विंटल महुआ इंग्लैंड के स्काटलैंड यार्ड में दोगुने दाम पर बेचा गया है। महुए के नए बाजार को लेकर वनवासियों और महुआ संग्राहकों के साथ साथ पूरा वन विभाग भी खुश है। वन विभाग द्वारा अगले साल और ज्यादा महुआ विदेशों में भेजने की तैयारी की जा रही है।

वन मंडलाधिकारी बलरामपुर लक्ष्मण सिंह ने बताया कि इंग्लैंड भेजने के लिए महुआ रघुनाथ नगर, धमनी और वाड्रफ नगर वन परिक्षेत्र के कई गांवों से जमा किया गया है। जिसके बाद इसे मुंबई भेजा गया। 24 सितंबर को मुंबई बंदरगाह से इसे इंग्लैड के स्काटलैंड यार्ड के लिए रवाना किया गया है। इंग्लैंड में महुआ बेचने के लिए बर्किघम सायर की एक कंपनी से संपर्क किया गया। कंपनी को एक क्विंटल महुआ सैंपल के तौर पर भेजा गया था।

छत्तीसगढ़ का महुआ इंग्लैंड की कंपनी के मानदंडों पर खरा उतारा, कंपनी ने इसकी क्वालिटी की तारीफ भी की। जिसके बाद कंपनी की ओर से छत्तीसगढ़ को 2000 किलोग्राम महुआ फूल का आर्डर किया गया। इंग्लैंड भेजने के लिए महुआ संग्रहण मां महामाया स्व-सहायता समूह केसारी ने वन विभाग की निगरानी में किया है।

आपको बता दें कि महुआ संग्रहण के लिए जमीन से तीन फीट ऊपर हारी जाली बिछाकर हवा में ही फूलों को इकट्ठा करते हैं। ताकि महुए के फूलों में धूल-मिट्टी और गंदगी नहीं लगे, और  इसकी क्वालिटी अच्छी बनी रहे। 

छत्तीसगढ़ की वनोपजों में महुए का खास स्थान है। छत्तीसगढ़ के उत्तरी भाग में महुआ के पेड़ प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं। गर्मी के मौसम में इसके फूल पेड़ों से झड़ते हैं। जिसे वन विभाग से जुड़ी स्वसहायता समूह की महिलाओं द्वारा जमा किया जाता है।

प्रदेश के आदिवासी महुए के फूलों को उबालकर इसका सेवन करते हैं। वहीं सूखे महुए से देसी शराब बनती है। महुआ फूल के फल को डोरी कहते हैं इससे वनस्पति तेल बनता है। इंग्लैंड की कम्पनी द्वारा महुआ खरीदन से राज्य को लाभ हो रहा है। वहीं ग्रामीण भी सशक्त हो रहे हैं।

आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ देश में सबसे ज्यादा लघु वनोपजों की खरीदी समर्थन मूल्य पर करता है। इस बात का खुलासा इसी साल अप्रेल में 'द ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया' (ट्राईफेड) द्वारा जारी आंकड़ों में किया गया था। अब इसी महुए को विदेशों में बेचकर राज्य को लाभ मिल रहा है।