गलत धारणा, 44 राउंड फायरिंग और 8 बेकसूर आदिवासियों की हत्या, वे नक्सली नहीं थे: जांच रिपोर्ट

बीजापुर जिले के एडेसमेट्टा में सुरक्षाबलों ने आठ लोगों की नक्सली बताकर हत्या कर दी थी, मामले की न्यायिक जांच रिपोर्ट में पता चला है कि उनमें से कोई नक्सली नहीं था, बल्कि सभी बेकसूर थे

Updated: Sep 10, 2021, 01:55 PM IST

गलत धारणा, 44 राउंड फायरिंग और 8 बेकसूर आदिवासियों की हत्या, वे नक्सली नहीं थे: जांच रिपोर्ट
Photo Courtesy: The Wire

बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर में आठ साल पहले हुई एनकाउंटर की जांच रिपोर्ट आज कई सवाल खड़े कर रही है। दरअसल, बीजापुर जिले के एडेसमेट्टा में सुरक्षाबलों ने आठ लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। सुरक्षाबलों ने तब बताया था कि ये सभी माओवादी थे। आठ साल बाद इस घटना की जांच रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि मारे गए आठ लोगों में से कोई नक्सली नहीं था, बल्कि सुरक्षाबलों ने बेकसूर लोगों की हत्या की थी।

दरअसल, बुधवार को एडेसमेट्टा इन्क्वारी रिपोर्ट कैबिनेट को सौंपी गई है। इस रिपोर्ट में रिटायर्ड जज जस्टिस वीके अग्रवाल ने बताया है कि गलत धारणा होने की वजह से सुरक्षाबलों ने निहत्थे लोगों पर गोलियां चलाई। जस्टिस अग्रवाल ने अपनी रिपोर्ट में इस ऑपरेशन के गलती होने की बात का तीन जगह जिक्र किया है । उन्होंने कहा है कि सभी आदिवासी बेकसूर थे और उनसे सुरक्षाबलों को कोई खतरा नहीं था।

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न्यायिक जांच रिपोर्ट के मुताबिक एडेसमेट्टा में 17-18 मई की रात 25 से 30 आदिवासी लोग बीज पांडम त्योहार मनाने के लिए इकट्ठा हुए थे। इसी दौरान अचानक वहां सुरक्षाबलों की टुकड़ी आ गई। त्योहार मनाने के किए इकट्ठा हुए आदिवासी जबतक कुछ समझ पाते CRPF की गोलियों ने उनके सीने को भेदना शुरू कर दिया था। एक-एक कर आठ बेकसूर लोगों को कोबरा बटालियन ने मार गिराया।

उस रात आदिवासियों पर 44 गोलियां बरसाई गई थी। कोबरा यूनिट के एक कांस्टेबल ने तो अकेले 18 गोलियां चलाई थी। उस वक़्त सुरक्षाबलों ने बताया था कि हम आग के चपेट में आ गए थे। इतना ही नहीं सुरक्षाबलों का दावा था कि क्रॉस फायरिंग में आठ लोग मारे गए। लेकिन रिपोर्ट में साफतौर पर बताया गया है कि आदिवासियों के पास हथियार नहीं थे, ऐसे में क्रॉस फायरिंग का सवाल ही नहीं उठता। 

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न्यायिक जांच रिपोर्ट में लिखा गया है कि गलत धारणा और डर की प्रतिक्रिया की वजह से फायरिंग हुई होगी। यानी डर के मारे सुरक्षाबलों ने फायरिंग शुरू कर दी होगी। इस ऑपरेशन के दौरान कोबरा कॉन्स्टेबल देव प्रकाश की भी मौत हुई थी। सुरक्षाबलों के दावा था कि नक्सलियों की गोली से देव प्रकाश की मौत हुई। हालांकि, जांच के दौरान यह पता चला कि आपसी गोलीबारी में ही देव प्रकाश की मौत हुई। क्योंकि दूसरी ओर से एक भी राउंड फायरिंग नहीं हुई थी।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जब सुरक्षाबलों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू की तो वे लोग चिल्ला रहे थे। वे चिल्ला-चिल्ला कर कह रहे थे कि फायरिंग रोक दो, हमारे परिवार वालों को गोली लगी है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं था। इस अंधाधुंध फायरिंग में मारे गए चार लोग नाबालिग थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई भी इस मामले की अलग से जांच कर रही है। उम्मीद है कि जल्द ही सीबीआई भी अपनी जांच रिपोर्ट पेश करेगी। एडेसमेट्टा बीजापुर जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर की दूरी पर है। पास के सड़क से भी यह लगभग 17 किलोमीटर भीतर है।