भीषण गर्मी में जनगणना ड्यूटी पर बवाल, 43 डिग्री तापमान में सर्वे के विरोध में उतरे शिक्षक

छत्तीसगढ़ में 43°C तापमान और हीटवेव के बीच 1 मई से शुरू हो रही जनगणना ड्यूटी को लेकर शिक्षक विरोध कर रहे हैं।

Updated: Apr 20, 2026, 01:31 PM IST

छत्तीसगढ़ में पड़ रही तेज गर्मी और हीट वेव के बीच जनगणना ड्यूटी को लेकर शिक्षकों में असंतोष तेजी से बढ़ रहा है। प्रदेश में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। वहीं,1 मई से शुरू होने वाले जनगणना के पहले चरण को लेकर शिक्षक इसे स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा बता रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसे हालात में घर-घर जाकर सर्वे करना बेहद कठिन और खतरनाक है।

राज्य में जनगणना का पहला चरण 1 मई से 30 मई तक निर्धारित किया गया है। इस दौरान हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस के तहत हर घर, परिवार और उपलब्ध सुविधाओं का विस्तृत डेटा जुटाया जाएगा। इसके लिए शिक्षकों सहित कर्मचारियों को डोर टू डोर जाकर जानकारी जुटानी होगी। जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई है।

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शिक्षक संगठनों ने मांग उठाई है कि इस कार्य को मई की बजाय जून से शुरू किया जाए। उनका तर्क है कि मई-जून प्रदेश में सबसे ज्यादा गर्मी वाले महीने होते हैं और इसी दौरान स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश भी रहता है। ऐसे में छुट्टियों के बीच फील्ड ड्यूटी देना अनुचित है। शिक्षकों का आरोप है कि सरकार अवकाश का इस्तेमाल कर उनसे जबरन काम करा रही है।

जनगणना प्रक्रिया के तहत कुल 33 बिंदुओं पर जानकारी एकत्र की जानी है। इसमें मकान की स्थिति, उसका उपयोग (रिहायशी या व्यावसायिक), निर्माण की गुणवत्ता (कच्चा या पक्का), परिवारों की संख्या जैसी जानकारियों के साथ-साथ पेयजल, शौचालय, बिजली कनेक्शन, कुकिंग फ्यूल, इंटरनेट सुविधा और टीवी-रेडियो जैसी सुविधाओं का भी विवरण शामिल रहेगा।

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इस बीच स्मार्टफोन की अनिवार्यता को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है। शिक्षकों का कहना है कि सर्वे के लिए कम से कम एंड्रॉयड 12.0 वर्जन वाले स्मार्टफोन की शर्त रखी गई है। ऐसे में जिनके पास पुराने मोबाइल हैं उन्हें नया फोन खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।

स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर भी शिक्षक गंभीर चिंता जता रहे हैं। उनका कहना है कि एक ओर स्कूल बंद हैं, दूसरी ओर उन्हें तेज धूप में लंबे समय तक सर्वे के लिए भेजा जा रहा है। जिससे लू और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

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छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने कहा कि 43 डिग्री तापमान में डोर टू डोर सर्वे करना न सिर्फ मुश्किल है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक है। वहीं, छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने इसे अनुचित बताते हुए कहा कि शिक्षकों के अवकाश के दौरान ऐसी ड्यूटी लगाना व्यावहारिक नहीं है। छत्तीसगढ़ विद्यालय शिक्षक कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष संजय तिवारी ने भी सरकार से मांग की है कि परिस्थितियों को देखते हुए जनगणना जून से शुरू की जाए।

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