आईटी कंपनियां अगले साल तक करेंगी 30 लाख कर्मचारियों की छंटनी, बैंक ऑफ अमेरिका की रिपोर्ट में दावा

TCS, Infosys, Wipro, HCL जैसी बड़ी कंपनियां छंटनी के लिए तैयार, ऑटोमेशन की वजह से लाखों लोगों की छीन जाएगी नौकरी,

Updated: Jun 17, 2021, 09:26 AM IST

आईटी कंपनियां अगले साल तक करेंगी 30 लाख कर्मचारियों की छंटनी, बैंक ऑफ अमेरिका की रिपोर्ट में दावा
Photo Courtesy: Mint

मुंबई। बैंक ऑफ अमेरिका (BOA) भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स के लिए बुरी खबर लेकर आया है। BOA ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि ऑटोमेशन की वजह से भारतीय आईटी कंपनियां अगले साल तक बड़े स्तर पर कर्मचारियों की छंटनी करने की तैयारी में है। रिपोर्ट के मुताबिक साल 2022 तक बड़ी कंपनियां करीब 30 लाख आईटी प्रोफेशनल्स को नौकरी से निकाल देंगी।

NASSCOM के मुताबिक घरेलू आईटी क्षेत्र में लगभग 1 करोड़ 60 लाख लोग काम करते हैं, इनमें से लगभग 90 लाख लोग लो-स्किल्ड और बीपीओ में काम करते हैं। इन 90 लाख लो-स्किल्ड सेवाओं और बीपीओ में से, 2022 तक 30 परसेंट या लगभग 30 लाख अपनी नौकरी गंवा देंगे, जो मुख्य रूप से रोबोट प्रोसेस ऑटोमेशन या RPA की वजह से होगा। यानी ऑटोमेशन के रफ्तार पकड़ने के साथ ही 1.6 करोड़ लोगों को रोजगार देने वाली घरेलू सॉफ्टवेयर कंपनियां अगले साल तक 30 लाख कर्मचारियों को नौकरी से निकाल देगी।

यह भी पढ़ें: ट्विटर के पास भारत में नहीं बची अब कानूनी सुरक्षा, मुस्लिम बुज़ुर्ग पिटाई मामले में ट्विटर के खिलाफ मुकदमा दर्ज

BOA रिपोर्ट के मुताबिक छंटनी करने वाली कंपनियों में TCS, Infosys, Wipro, HCL, Tech Mahindra और Cognizant जैसी बड़ी आईटी कंपनियां शामिल होंगी। रिपोर्ट में कहा कि इससे इन आईटी कंपनियों को 100 अरब डॉलर (7.3 लाख करोड़ रुपए) की भारी भरकम बचत होगी, जिसका ज्यादातर हिस्सा वे कर्मचारियों के वेतन पर खर्च करती हैं। हालांकि, लेकिन ऑटोमेशन के लिए 10 अरब डॉलर खर्च भी करने होंगे। इसके अलावा 5 अरब डॉलर नई नौकरियों के वेतन पर खर्च आएगा।

 दूसरी लहर युवाओं पर भारी

देश में कोरोना की दूसरी लहर युवाओं के लिए भारी साबित हुई है। फॉर्च्यून-500 की रिपोर्ट के अनुसार, महामारी की दूसरी लहर में युवा और ज्यादा उम्र वाले कर्मचारियों ने अधिक नौकरियां गंवाई हैं। 24 साल से कम उम्र वाले युवाओं में 11 फीसदी की नौकरियां गईं, जो पिछले साल 10 फीसदी थी। इसी तरह, 55 साल से ज्यादा उम्र वाले नौकरीपेशा में पांच फीसदी लोग बेरोजगार हो गए। पिछले साल यह संख्या 4 फीसदी थी।