FSSAI: मध्य प्रदेश में सब्जियों के 25 फीसदी सैंपल जांच में फेल, ताजा रिपोर्ट में खुलासा

Heavy Mettles in Vegetables: देश भर में सब्जियों के 9.21% सैंपल फेल, छत्तीसगढ़ में 13.6% सब्जियों में हैवी मेटल का स्तर खतरनाक

Updated: Oct 10, 2020 03:24 PM IST

FSSAI: मध्य प्रदेश में सब्जियों के 25 फीसदी सैंपल जांच में फेल, ताजा रिपोर्ट में खुलासा
Photo Courtesy: Wed Dunia

भोपाल। शरीर को स्वस्थ्य रखने के लिए फल और सब्जियां खाने की सलाह दी जाती है, लेकिन ये सब्जियां अब स्वास्थ्य के लिए खतनाक साबित हो रही हैं। इस बात का खुलासा FSSAI यानी Food Safety and Standards Authority of India की एक रिपोर्ट में हुआ है। जिसमें कहा गया है कि देश में पैदा होने वाली 9.21 फीसदी सब्जियों में लेड और कैडमियम जैसे हैवी मेटल कई गुना ज्यादा मिलने लगे हैं, जो लोगों की सेहत बिगाड़ रहे हैं।

सबसे ज्यादा चिंताजनक स्थिति मध्य प्रदेश की है। यहां करीब 25 फीसदी सैंपल जांच में फेल हो गए हैं, इनमें हैवी मेटल्स की मात्रा  खतरनाक स्तर तक मिली है। रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बाजारों में बिकने वाली सब्जियों में लेड और कैडमियम खतरनाक स्तर पर मिला है। यह लेड कैडमियम इंसान के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है। FSSAI की रिपोर्ट में बताया गया है कि मध्य प्रदेश में हरी पत्तेदार सब्जियों को छोड़कर दूसरी सब्जियों में लेड की मात्रा 100 माइक्रोग्राम किलोग्राम पाई गई। वहीं टमाटर में 600 माइक्रोग्राम, भिंडी में 1000 माइक्रोग्राम मिली है।

मध्यप्रदेश के पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में पाई जाने वाली सब्जियों में लेड और कैडमियम का लेवल 13.6 प्रतिशत मिला है। सब्जियों की क्वालिटी जांचने के लिए मध्यप्रदेश के भोपाल, इंदौर, सतना और जबलपुर से सैंपल लिए गए थे। इन जिलों से करीब 250 नमूनों की जांच हुई है। इनमें से 25 प्रतिशत सब्जियों के नमूनों में हेवी मेटल्स की घातक मात्रा मिली। जबकि छत्तीसगढ़ के जिलों से लिए नमूनों में हैवी मेटल्स 13.06 प्रतिशत कम मिले।

 

आपको बता दें कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ने ऐसा देशव्यापी रिसर्च पहली बार करवाया है। इसके लिए देश को पांच जोन में बांटा गया और तीन तरह की सब्जियों के सैंपल लिए गए। जांच के लिए पत्तेदार सब्जियां,  फल वाली और जमीन के अंदर उगने वाले कंद शामिल थे। देशभर में सब्जियों के कुल 3323 सैंपल्स की जांच हुई। इनसा पूरे साल अध्ययन किया गया और दो माह में इसकी रिपोर्ट बनकर तैयार हुई है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि सब्जियों के 306 याने 9.21 फीसदी नमूने फेल पाए गए हैं। जोन के हिसाब से देखें तो सेंट्रल जोन में 15.7 फीसदी, ईस्ट जोन में 12.12 फीसदी, वेस्ट जोन में 7.50 फीसदी और नॉर्थ जोन में 5.13 फीसदी सैंपल फेल हो गए हैं।  जबकि साउथ ज़ोन के ज्यातर सैंपल टेस्ट में पास हो गए हैं।

कीटनाशक, मिट्टी और गंदगी से जहरीली होती हैं सब्जियां

सब्जियों में ये जहरीले हैवी मैटल्स कीटनाशकों के इस्तेमाल, मिट्टी में आई खराबी और गंदे पानी से खेती करने पर आते हैं। देशभर में सब्जियों की खेती गंदे पानी में की जा रही है। जिससे लेड, कैडमियम, आर्सेनिक और पारा जैसे खतरनाक तत्व लोगों के शरीर में सब्जियों के माध्यम से पहुंच रहे हैं। ये इसांन को शारीरिक और मानसिक तौर पर बीमार कर सकते हैं। कई बार इनकी ज्यादा मात्रा हो जाने के कारण मौत तक होने की संभावना रहती है।

क्यों हानिकारक हैं हैवी मेटल्सवाली सब्जियां

गौरतलब है कि हैवी मेटल्स लेड, मर्करी, आर्सेनिक और कैडमियम शरीर के लिए हानीकारक होते हैं, इनके उपयोग से मानसिक बीमारियों के साथ-साथ हार्ट, किडनी, तंत्रिका तंत्र और हड्डियों से जुड़ी बीमारियां होती होने की संभावना रहती है।