चीन 2015 से कोरोना को जैविक हथियार बनाने के लिए कर रहा था शोध, ऑस्ट्रेलियाई मीडिया रिपोर्ट में खुलासा

चीनी वैज्ञानिक पिछले छः साल से कोविड-19 वायरस को हथियार की तरह इस्तेमाल करने की साजिश रच रहे थे, द वीकेंड ऑस्ट्रेलियन ने अपनी रिपोर्ट में ये खुलासा किया है

Updated: May 10, 2021, 03:02 AM IST

चीन 2015 से कोरोना को जैविक हथियार बनाने के लिए कर रहा था शोध, ऑस्ट्रेलियाई मीडिया रिपोर्ट में खुलासा
Photo Courtesy: Foreignaffairs.com

बीजिंग। कोरोना वायरस चीन के लैब में विकसित किया गया है या नहीं, इस बात को लेकर तमाम वाद-विवाद और शक-संदेह के बीच एक दस्तावेज ने दुनियाभर में हड़कंप मचा दिया है। दरअसल, कोविड-19 ने पिछले साल अचानक आकर दुनियाभर में कहर नहीं बरपाया है, बल्कि पिछले छः साल से चीन इसे जैविक हथियार के रूप में विकसित करने के लिए शोध कर रहा था। मानवता के खिलाफ चीन के इस कुटिल चाल का खुलासा एक ऑस्ट्रेलियन मीडिया रिपोर्ट में किया गया है।

ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख मीडिया संस्थाओं में एक 'द वीकेंड ऑस्ट्रेलियन' ने चीन के एक लीक हुए दस्तावेज के हवाले से यह खबर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक चीनी वैज्ञानिक और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी साल 2015 में ही कोरोना के अलग-अलग स्ट्रेन पर चर्चा कर रहे थे। इस दौरान चीनी वैज्ञानिक इस बात पर बातचीत कर रहे थे कि तीसरे विश्व युद्ध के दौरान इसे जैविक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। इतना ही नहीं इस दौरान इस बात पर भी चर्चा की गई कि इसमें हेरफेर कर किस तरह से इसे महामारी में बदला जा सकता है।

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द वीकेंड ऑस्ट्रेलियन की यह रिपोर्ट news.com.au पर भी प्रकाशित की गई है। वैसे तो कोरोना वायरस की उत्त्पत्ति को लेकर चीन शुरू से संदेह के घेरे में रहा है, हालांकि इस बारे में अबतक कोई ठोस सबूत या रिपोर्ट सामने नहीं आई थी जिसमें कोरोना को जैविक हथियार बताया गया हो। इस रिपोर्ट में इस बात को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं कि कोरोना को लेकर जब भी जांच की बात आती है तो चीन हमेशा पीछे हट जाता है। 

रिपोर्ट में ऑस्ट्रेलियाई साइबर सेक्युरिटी एक्सपर्ट रोबर्ट पॉटर के हवाले से बताया गया है कि Covid-19 जैसी बीमारी किसी चमगादड़ के मार्केट से नहीं फैल सकती। यह थ्योरी पूरी तरह से मिथ्य है। रॉबर्ट ने उस दस्तावेज को सही बताया है जिसके हवाले से ऑस्ट्रेलियाई मीडिया रिपोर्ट में चीनी साजिश का दावा किया गया है। रोबर्ट का कहना है कि वह चीनी दस्तावेजों का अध्ययन करते रहते हैं, जिससे चीनी वैज्ञानिकों के मंसूबे पता चलते हैं।

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मामले पर एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऑस्ट्रेलियाई मीडिया के इस रिपोर्ट को फिलहाल न तो पक्के तौर से सच माना जा सकता है, और न ही इसे खारिज किया है। इसे ख़ारिज इसलिए भी नहीं किया जा सकता है क्योंकि पिछले साल तक दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सार्वजनिक रूप से इसे चीनी वायरस कहते रहे हैं। ट्रंप का भी दावा था की इसे चीनी लैब में इसलिए तैयार किया गया ताकि दुनिया का हेल्थ और इकोनॉमिक सेक्टर तबाह हो जाए।

ट्रंप यहां तक कह चुके हैं कि अमेरिका के पास इस बात के पक्के सबूत हैं और सही समय आने पर उन्हें दुनिया के सामने रखा जाएगा। बहरहाल, अब अमेरिका में नई सरकार बन गई है और मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडेन इस बारे में सार्वजनिक टिप्पणी करने से बचते रहे हैं। हालांकि, ब्लूमबर्ग ने बीते दिनों इस बात की ओर इशारा किया था कि बाइडेन प्रशासन इस मामले में काफी तेजी और गंभीरता से पड़ताल कर रही है। कोरोना वायरस को लेकर सच्चाई तो फिलहाल भविष्य के गर्भ में है लेकिन ऑस्ट्रेलियाई मीडिया की इस रिपोर्ट ने दुनियाभर में तहलका मचा दिया है। अब देखना यह होगा कि चीन की ओर से इसपर क्या प्रतिक्रिया आती है।