नेपाल में गहराया सियासी संकट, पीएम ओली कैबिनेट के चार मंत्रियों की गई संसद सदस्यता

नेपाली प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने अपने विरोधी प्रचंड के सिफारिश पर छीना अपने मंत्रियों का सदस्यता, छः माह तक रह सकते हैं मंत्री, नेपाल सरकार पर संकट के बादल

Updated: Apr 10, 2021, 06:27 PM IST

नेपाल में गहराया सियासी संकट, पीएम ओली कैबिनेट के चार मंत्रियों की गई संसद सदस्यता
Photo Courtesy: WION

काठमांडू। नेपाल में सियासी संकट दिन-प्रतिदिन गहराता ही जा रहा है। बीते कई महीनों से जारी राजनीतिक उठापटक के बीच नेपाली पीएम केपी शर्मा ओली ने अपने कैबिनेट के चार मंत्रियों का संसद सदस्यता छीन किया है। पीएम ओली ने अपने मंत्रियों पर यह कार्रवाई अपने विरोड़ी पुष्प कमल दहल प्रचंड के सिफारिश पर की है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने नेपाल के ऊर्जा मंत्री तोप बहादुर रायमाझी, उद्योग मंत्री लेखराज भट्टा, शहरी विकास मंत्री प्रभु शाह और श्रम मंत्री गौरीशंकर चौधरी से संसद सदस्यता छीन लिया है। हालांकि, संसद सदस्यता नहीं होने के बावजूद भी इन चार नेताओं को अगले छः महीने तक मंत्री बने रह सकते हैं।

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दरअसल, पिछले साल दिसंबर में पीएम ओली द्वारा सदन को भंग करने के बाद से ही नेपाल में सियासी गतिरोध जारी है। इसका कारण यह है कि नेपाल में हुए साल 2017 के आमचुनाव में कमल दहल प्रचंड की पार्टी सीपीएन माओइस्ट सेंटर पार्टी और केपी शर्मा ओली की पार्टी सीपीएन यूएमएल का विलय हो गया था और दोनों पार्टियों ने साथ मिलकर सरकार बनाई थी।

इसके बाद जब केपी ओली ने सदन को भंग किया तो पुष्प दहल प्रचंड का गुट इसके खिलाफ था। बीते महीने सुप्रीम कोर्ट ने भी सीपीएन माओइस्ट सेंटर और सीपीएन यूएमएल का विलय रद्द कर दिया जिसके बाद दोनों पार्टियां कानूनी रूप से अलग अलग हो गई। विलय खत्म होने के बाद भी प्रचंड की पार्टी के ये चार नेता केपी ओली के साथ ही थे और उनके पार्टी का दामन थाम लिया।

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रायमाझी, भट्टा, शाह और चौधरी चारों मंत्रियों द्वारा सीपीएन माओइस्ट सेंटर का पुनर्गठन होने के बाद भी अपनी पार्टी में नहीं लौटने की वजह से उनके खिलाफ दल-बदल की कार्रवाई की गई। दल बदल कानून के तहत प्रचंड ने इन चारों का सदस्यता रद्द करने की सिफारिश केपी ओली को भेजा और उन्हें मजबूरन इसे स्वीकार करना पड़ा। नेपाल के कानून के मुताबिक अब इन चारों मंत्रियों को छः महीने के भीतर चुनाव जीतकर संसद का सदस्य बनना होगा तभी वे आगे मंत्री बने रह सकते हैं वरना 6 महीने बाद उन्हें मंत्रिमंडल से भी इस्तीफे देना होगा।