ईरान पर हाइपरसोनिक मिसाइलों से हमले की तैयारी, बचे हुए ईरानी नेताओं को टारगेट करेगा अमेरिका
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी रक्षा मंत्रालय कुछ नए और एडवांस हथियार इस्तेमाल करने पर भी विचार कर रहा है। इनमें डार्क ईगल नाम की हाइपरसोनिक मिसाइल भी शामिल है।
तेहरान। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव गहराता जा रहा है। अमेरिका पहली बार ईरान के खिलाफ हाइपरसोनिक मिसाइलों का इस्तेमाल कर सकता है। अमेरिका की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर ने राष्ट्रपति ट्रम्प को ईरान के खिलाफ संभावित हमला करने के विकल्पों की जानकारी दी है।
फॉक्स न्यूज के मुताबिक एडमिरल ब्रैड कूपर ने व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में ट्रम्प के साथ बैठक में ये विकल्प पेश किए। इसमें बताया गया कि अगर ट्रम्प दोबारा हमले का फैसला लेते हैं, तो एक ‘छोटा लेकिन बहुत ताकतवर हमला’ किया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस हमले में ईरान की बची हुई सैन्य ताकत, उसके नेता और अहम ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) को निशाना बनाया जा सकता है।
रक्षा मंत्रालय कुछ नए और एडवांस हथियार इस्तेमाल करने पर भी विचार कर रहा है। इनमें ‘डार्क ईगल’ नाम की हाइपरसोनिक मिसाइल भी शामिल है। यह मिसाइल करीब 2,000 मील (करीब 3,200 किलोमीटर) दूर तक निशाना साध सकती है और ईरान के बचे हुए बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चरों को टारगेट कर सकती है।
इसके अलावा, B-1B लांसर बॉम्बर विमानों की मौजूदगी भी इलाके में बढ़ाई जा रही है। ये विमान भारी मात्रा में हथियार ले जाने में सक्षम हैं और हाइपरसोनिक हथियार भी ले जा सकते हैं। मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव की वजह से होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है। पहले जहां हर दिन करीब 130 जहाज गुजरते थे, अब सिर्फ 10 से भी कम जहाज जा रहे हैं। यानी इस रास्ते पर 90% से ज्यादा ट्रैफिक कम हो गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो महीनों में इस इलाके में 40 से ज्यादा घटनाएं हुई हैं। कई जहाजों पर हमले हुए, कुछ को नुकसान पहुंचा और कुछ को डराकर वापस भेज दिया गया। इस वजह से करीब 850 बड़े जहाज खाड़ी में फंसे हुए हैं। इन जहाजों पर लगभग 20,000 नाविक (सैलर्स) भी फंसे हैं, जो आगे नहीं जा पा रहे। अधिकारियों का कहना है कि इन लोगों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता है। जहाजों पर जरूरी सामान भी कम होने लगा है और लंबे समय तक फंसे रहने से नाविकों पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है।




