महंगाई से जनता बेहाल: 43 महीने के सर्वोच्च स्तर पर पहुंचा थोक महंगाई दर, फ्यूल से लेकर अनाज तक की कीमतें बढ़ीं

महंगाई बढ़ने की वजह रोजमर्रा की जरूरत के सामान और फ्यूल के दाम बढ़ना है। इसके अलावा अनाज और तेल भी महंगा हुआ है।

Updated: Jun 15, 2026, 04:06 PM IST

नई दिल्ली। देश में बढ़ती महंगाई ने आम लोगों की जेब पर बुरा असर डाला है। इस साल मई में थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 9.68 फीसदी पर पहुंच गई है। इससे पहले अप्रैल में यह 8.26 फीसदी पर थी। मई में महंगाई 43 महीने में सबसे ज्यादा है। सितंबर 2022 में ये 10.70 फीसदी पर पहुंच गई थी। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले विभाग 'DPIIT' ने मई 2026 के लिए थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के नए आंकड़े जारी किए हैं

महंगाई बढ़ने की वजह रोजमर्रा की जरूरत के सामान और फ्यूल के दाम बढ़ना है। इसके अलावा अनाज और तेल भी महंगा हुआ है। दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच साढ़े तीन महीने से तनाव है। स्थितियां सामान्य नहीं हुईं तो महंगाई और बढ़ सकती है। इस महीने महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह ईंधन, बिजली और खनिज तेल की कीमतों में आई भारी तेजी है।

आंकड़ों के मुताबिक, इस समय देश में 'ईंधन और बिजली' समूह की महंगाई दर सबसे ज्यादा 30.33 फीसदी पर पहुंच गई है। इसके अलावा विनिर्मित उत्पाद की महंगाई 7.48 फीसदी और खाने-पीने की चीजों का खाद्य सूचकांक 4.49 फीसदी दर्ज किया गया है। प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई दर भी 4.99% रही है।

सरकार ने भारतीय अर्थव्यवस्था के बदलते स्वरूप को देखते हुए महंगाई नापने की सीरीज में बड़े बदलाव किए हैं। अब महंगाई का आकलन करने के लिए आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया गया है। थोक बाजार की बास्केट में वस्तुओं की कुल संख्या को 697 से बढ़ाकर अब 957 कर दिया गया है।

देश में पहली बार बिजली समूह के तहत पारंपरिक बिजली के साथ-साथ सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और परमाणु बिजली को भी शामिल किया गया है। अब वस्तुओं का वजन (वेटेज) तय करने के लिए 'ग्रॉस वैल्यू ऑफ आउटपुट' का इस्तेमाल किया गया है, जिससे घरेलू उत्पादन की सही तस्वीर सामने आएगी।