मध्य प्रदेश की जड़ी-बूटियों में मिलेगा कैंसर का इलाज, AIIMS भोपाल में जारी है रिसर्च

मध्य प्रदेश के मंडला और पातालकोट में पाई जाने वाली 27 जड़ी-बूटियों पर भोपाल AIIMS में रिसर्च जारी, शुरुआत में मिले उत्साह बढ़ाने वाले नतीजे

Updated: Nov 19, 2020, 06:49 PM IST

मध्य प्रदेश की जड़ी-बूटियों में मिलेगा कैंसर का इलाज, AIIMS भोपाल में जारी है रिसर्च
Photo Courtesy: New Indian Express

भोपाल। आयुर्वेदिक दवाओं से कैंसर के इलाज की नई संभावना नजर आई है। भोपाल स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) प्रदेश में पाई जाने वाली जड़ी बूटियों पर रिसर्च कर रहा है, जिसके काफी सकारात्मक परिणाम मिले हैं। प्रदेश के मंडला और पातालकोट में पाई जाने वाली कुछ जड़ी-बूटियों में एंटी कैंसर कम्पाउंड पाए गए हैं। जो कैंसर के इलाज में कारगर साबित हो सकता हैं। एम्स के एक्सपर्ट्स की टीम गहन अध्ययन में जुटी है।

दरअसल मध्य प्रदेश के अगल-अलग स्थानों में पाई जाने वाली 27 तरह की जड़ी-बूटियों पर रिसर्च की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि ये जड़ी-बूटियां कैंसर के इलाज में किस तरह से मददगार साबित होंगी। करीब एक साल से जारी रिसर्च में यह पता चला है कि इन जड़ी बूटियों में एंटी कैंसर कंपाउंड मौजूद हैं। ये कंपाउंड्स कैंसर इलाज में कितने कारगर होंगे इस पर काम किया जा रहा है।

दरअसल मध्यप्रदेश के आदिम जाति अनुसंधान संस्थान की ओर से आदिवासियों द्वारा उपयोग की जानी वाली जंगली जड़ी-बूटियों पर एक प्रोजेक्ट बनाया गया था। इन जड़ी-बूटियों पर रिसर्च की जिम्मेदारी भोपाल एम्स के बायोकेमेस्ट्री डिपार्टमेंट को सौंपी गई। यह रिसर्च तीन साल में पूरी होगी। इन पर शोध के लिए 15 लाख रुपये दिए गए हैं। एक साल पहले यह रिसर्च शुरू हुई थी।

अब तक इन जड़ी-बूटियों में मिले कंपाउंड्स से उम्मीद की किरण जागी है। उम्मीद है कि प्रदेश के जंगलों में मिलने वाली जड़ी-बूटियों से कैंसर समेत कई बीमारियों के इलाज में मदद मिलेगी। ये जड़ी-बूटिया मध्य प्रदेश के कई स्थानों के साथ मुख्यरूप से मंडला, पातालकोट से लाई जाती हैं। किसी भी तहर की भ्रांति फैलने से रोकने के लिए अभी इनका नाम उजागर नहीं किया गया है कि कौन सी जड़ीबूटी कैंसर के इलाज में कारगर साबित होगी।  

आपको बता दें कि एम्स भोपाल के बायोकेमेस्ट्री डिपार्टमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर डाक्टर सुखेश मुखर्जी के साथ अनुभवी रिसर्टर्स की टीम काम में जुटी है। इस टीम को उत्साहजनक परिणाम हाथ लगे हैं। एम्स भोपाल की टीम प्रदेश के कई इलाकों में आदिवासियों की मदद से जड़ी-बूटियों को जमा करती है। जिसे वैज्ञानिक तरीके से भोपाल तक लाया जाता है। एम्स की लैब में जड़ी-बूटियों के अलग-अलग तत्व तैयार कर टेस्टिंग की जाती है

एम्स की टीम जड़ी-बूटियों पर रिसर्च कर रही है। एम्स के डायरेक्टर डॉक्टर सरमन सिंह का कहना है कि शोध आरंभिक अवस्था में है, जड़ी-बूटियों के कारगर होने के बारे में फिलहाल कुछ अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी।