शिव बूटी के नाम पर गांजे का सेवन करने से युवाओं की बर्बादी, लक्ष्मण सिंह की चिंता पर बीजेपी ने गिनाए फायदे

कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह युवाओं में गांजे की बढ़ती चलन को लेकर जताई थी चिंता, बीजेपी प्रवक्ता ने कहा- आयुर्वेद में करीब 200 अलग-अलग जगहों पर गांजे का जिक्र है, किसान नेता का पलटवार- आप यह औषधि कब से शुरू कर रहे हैं

Updated: May 03, 2022, 02:40 AM IST

शिव बूटी के नाम पर गांजे का सेवन करने से युवाओं की बर्बादी, लक्ष्मण सिंह की चिंता पर बीजेपी ने गिनाए फायदे

भोपाल। कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक लक्ष्मण सिंह ने युवाओं में गांजे के बढ़ते चलन को लेकर चिंता व्यक्त की है। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के अनुज लक्ष्मण सिंह ने कहा है कि गांजे को "शिव बूटी" का नाम देकर
युवाओं को बर्बाद किया जा रहा है। जबकि शिव जी ने विष पिया था गांजा नहीं। सिंह की इस टिप्पणी के बाद अब सत्तारूढ़ दल बीजेपी गांजे के बचाव में उतर आई है। भाजपा प्रवक्ता ने आयुर्वेद का हवाला देते हुए कहा है कि गांजे का इस्तेमाल बुरा नहीं है।

कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह ने एक ट्वीट में लिखा था कि, 'गांजे को दुर्भाग्यवश "धर्म" से जोड़ा जा रहा है," शिव बूटी" का नाम देकर। यही कारण है इसका सेवन अत्यधिक बढ़ता जा रहा है, जिससे युवा बर्बाद हो रहे हैं। शास्त्रों के अनुसार शिवजी ने अमृत मंथन में निकला विष पिया था, गांजा नहीं।' 

इसपर मध्य प्रदेश बीजेपी के प्रवक्ता डॉ हितेश बाजपेई ने लिखा कि, 'आयुर्वेद में क़रीब 200 अलग-अलग जगहों में गांजे का ज़िक्र है.. इस पौधे के मादक पदार्थ का नाम गांजा है। संस्कृत में इसे विजया कहते हैं। आयुर्वेद में इसके इस्तेमाल को बुरा नहीं माना जाता। कई आयुर्वेदिक दवाएं हैं जिनमें न केवल विजया का इस्तेमाल किया जाता है बल्कि अफ़ीम का भी इस्तेमाल होता है। ये इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसे कैसे इस्तेमाल करते हैं और इसका इस्तेमाल कितना महत्वपूर्ण है।' 

बीजेपी नेता ने आगे लिखा कि, 'गांजे के पौधे में जो दो रसायन पाए जाते हैं वो हैं टेट्राहाइड्रोकैनाबिनॉल यानी टीएचसी और कैनाबिडॉल यानी सीबीडी. गांजे में नशा टीएचसी की मौजूदगी के कारण होता है। कैनाबिडॉल में नशे के कोई गुण नहीं हैं और इसके इस्तेमाल से किसी को नशे की लत नहीं लगती।' उन्होंने यह भी कहा है कि वैश्विक औसत के मुकाबले भारत में गांजे का इस्तेमाल कम होता है। इसलिए भारत के लिए चिंता का विषय है अफ़ीम से बनने वाला हेरोइन है।'

इसपर लक्ष्मण सिंह ने लिखा कि आप बहुत ज्ञानी हैं, मैं आपका मुकाबला नहीं कर सकता। तो बाजपेई फिर से जवाब देते हैं कि मेरा उद्देश्य आपके मान को ठेस पहुंचाना नहीं था। बहरहाल, कांग्रेस और बीजेपी नेताओं में इस ट्विटर वॉर के बाद अब गांजे को लेकर प्रदेश में एक बार फिर से नई बहस खड़ी हो गई है। सवाल ये है कि आयुर्वेद का हवाला देकर गांजे का बचाव करना कहां तक उचित है। गांजे का औषधीय उपयोग पेशेवर फार्मा कंपनियां ही कर सकती है, आम लोगों के लिए यह स्वाभाविक रूप से जहरीला है।

बीजेपी नेता द्वारा गांजे के बचाव करने के बाद अब कई लोग उन्हें निशाने पर ले रहे हैं। एमपी कांग्रेस किसान प्रकोष्ठ के अध्यक्ष केदार सिरोही ने बाजपेई पूछा है कि आप इस औषधि का उपयोग कब से शुरू कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस प्रवक्ता योगेंद्र परिहार ने लिखा कि स्वयंभू डॉक्टर अब ये बताने में व्यस्त हैं कि गांजा अच्छी चीज होती है। हे! ब्राह्मण देवता, नशे को सही ठहराना गलत है।