मुख्यमंत्री रहते हुए धरना प्रदर्शन और सत्याग्रह करना अक्षमता की निशानी

स्वास्थ्य आग्रह! स्वास्थ्य शब्द का तो इस्तेमाल किया गया लेकिन खरीदे हुए विधायक प्रभू राम चौधरी जिन्हें स्वास्थ्य मंत्री बनाकर रखा है उन्हें ही इस स्वास्थ्य आग्रह से दूर रखा गया। समझ नही आ रहा ये जनता के स्वास्थ्य की चिंता के लिए है या भाजपा के अंदर ही बदलते राजनीतिक समीकरणों में खुद की बिगड़ती तबियत को दूर करने व अपनी ही पार्टी के नेताओं को पटखनी देने के लिए किया गया नया नाट्य अभिनय।

Updated: Apr 07, 2021, 04:37 PM IST

मुख्यमंत्री रहते हुए धरना प्रदर्शन और सत्याग्रह करना अक्षमता की निशानी
Photo Courtesy: Jansampark vibhag Madhya Pradesh

मध्यप्रदेश में लगातार 15 वर्षों तक भाजपा की सरकार रही और करीब 13 साल तक शिवराज सिंह चौहान लगातार मुख्यमंत्री रहे। अब कमलनाथ सरकार को गिराकर 1 साल से शिवराज जी मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। मुझे याद नही आता कि मैंने कभी किसी मुख्यमंत्री को अपने ही शासनकाल में धरना प्रदर्शन करते या सत्याग्रह करते देखा हो। मंदसौर गोली कांड तो याद ही होगा सभी को उस दौरान भी शिवराज सिंह चौहान धरने पर बैठ गए थे ये अलग बात है कि मुख्यमंत्री का धरने पर बैठना बीजेपी के शीर्ष नेताओं को गँवारा नही गया और आनन फानन में जबरदस्ती शिवराज सिंह का उपवास तुड़वाया गया था। उस वक़्त उनके उपवास का क्या तुक था ये किसी को आज तक नही पता चला और अब कोरोना महामारी के भीषण संकट में जब शासन प्रशासन को हर परिस्थिति का सामना करने के लिए अपने आप को तैयार रखना था तब स्वयं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का सब काम काज छोड़कर 24 घण्टे के सत्याग्रह में बैठना कौन सा औचित्य है कोई नही समझ सकता।

नौटंकी के लिए नाम भी क्या रखा गया, स्वास्थ्य आग्रह! स्वास्थ्य शब्द का तो इस्तेमाल किया गया लेकिन खरीदे हुए विधायक प्रभू राम चौधरी जिन्हें स्वास्थ्य मंत्री बनाकर रखा है उन्हें ही इस स्वास्थ्य आग्रह से दूर रखा गया। समझ नही आ रहा ये जनता के स्वास्थ्य की चिंता के लिए है या भाजपा के अंदर ही बदलते राजनीतिक समीकरणों में खुद की बिगड़ती तबियत को दूर करने व अपनी ही पार्टी के नेताओं को पटखनी देने के लिए किया गया नया नाट्य अभिनय। खैर बंगाल चुनाव के परिणामों के बाद सारी परतें खुल जाएंगी कि कौन किसको पटखनी देने वाला है।

बड़ा सवाल ये है कि मुख्यमंत्री को बार बार इस तरह सत्याग्रह करने की ज़रूरत क्यों पड़ती है? क्या प्रशासन में उनकी पकड़ नही है? क्या अधिकारी कर्मचारी उनकी सुन नही रहे हैं? ये तो अक्षमता की निशानी है। सरकार खुद ही धरना प्रदर्शन करे तो माथा ही फोड़ लेना चाहिए। मुख्यमंत्री जी आप तमाम तरह की मनमानियां प्रदेश की जनता के साथ कर रहे हैं तब आप जनता के बारे में नही सोचते? आज पेट्रोल-डीजल पर सबसे ज्यादा टैक्स वसूलने वाला राज्य मध्यप्रदेश है। जो आपके हाथ मे है वो तो कर लीजिए। क्यों नही आप इन पेट्रोलियम पदार्थों से टैक्स कम करते? मुख्यमंत्री जी आप जनता के स्वास्थ्य के प्रति यदि वाकई चिंतित हैं तो अस्पतालों में आम जन के लिए सुविधाएं बढ़ाइए। कोरोना की वजह से त्राहि त्राहि मची हुई है अस्पतालों में पलंग उपलब्ध नही हैं, पलंग हैं तो इंजेक्शन उपलब्ध नही है, इंजेक्शन है तो ऑक्सीजन उपलब्ध नही है। आखिर आप की सरकार कर क्या रही है? चारो तरफ दवाओं की कालाबाज़ारी मची हुई है। आखिर गरीब और मजबूर आदमी कहाँ इलाज करवाएं। 

मुख्यमंत्री जी, आप सत्याग्रह की नौटंकी करने की बजाए ये घोषणा करते कि सभी का मुफ्त में इलाज होगा तो शायद जनता को राहत मिलती। लेकिन आपके इस तरह के सत्याग्रह से जनता को कोई लाभ नही मिलने वाला। मुख्यमंत्री जी, अगर आप जनता का हित नही कर सकते, उनका इलाज नही करवा सकते, उनके जान माल की रक्षा नही कर सकते और आप उन्हें चैन से जीने के हक़ नही दे पा रहे हैं तो प्रदेश में जगह जगह शमशान घाट ही बनवा दीजिये क्योंकि जिस तरह आपकी अक्षमता की वजह से लोगों की मौतें हो रही हैं और अंतिम संस्कार के लिए शमशान घाट में कतारें लगी हैं तो नए शमशान घाटों की ज़रूरत ज्यादा समझ मे आ रही है। इसीलिए मुख्यमंत्री जी जो लोग सरकार के कुप्रबंधन की वजह से असमय काल कवलित हो रहे हैं उन्हें कम कम से अच्छे से दाह संस्कार की ही व्यवस्था कर दीजिए। 

भगवान के लिए सत्याग्रह जैसे इवेंट करके आप अपनी लाचारी और बेबसी का सरेआम प्रदर्शन बन्द कर दीजिए। हम सब जानते हैं ऐसे इवेंट आयोजन करके जनता का मज़ाक बनाने का आपका और आपकी पार्टी का शगल पुराना है लेकिन अब बस भी कीजिए अभी तक जनता आपके बताए कथित राष्ट्रवाद के कारण आपका साथ दे देती थी लेकिन माफ कीजिये उन मीठी चुपड़ी बातों में आकर भाजपा को वोट देकर आज जनता की जान पर ही बन आई है। अब पानी सर से ऊपर निकल चुका है। केंद्र सरकार और राज्य सरकार की दोतरफा मार से जनता खून के आंसू पी रही है। आपके जुल्म की इंतहा हो चुकी है और लोगों के सहन करने की क्षमता खत्म हो चुकी है इसीलिए प्रदेश के हर नागरिक का यही कहना है कि आप से राज्य की व्यवस्थाएं नही संभल रही हैं तो सिंहासन खाली कर दीजिए क्योंकि देश को वे ही लोग चला सकते हैं जिन्होंने स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ने के बाद से अब तक उसे मजबूती से खड़ा रखा। 
 

(योगेन्द्र सिंह परिहार, स्वतंत्र लेखक हैं)