भोपाल से सटे केकड़िया गांव में मिले 50 कोरोना मरीज, सड़क किनारे झोलाछाप डाक्टर कर रहे हैं इलाज

दिया तले अंधेरा, राजधानी में कोरोना को लेकर सख्ती, लेकिन 10-12 किलोमीटर दूर भोपाल से लगे गांवों में नहीं है कोरोना से बचने का कोई इंतजाम, केकड़िया गांव के 250 परिवारों में से 50 में मिले मरीज, सर्दी खांसी बुखार के हैं लक्षण

Updated: May 10, 2021, 05:48 PM IST

भोपाल से सटे केकड़िया गांव में मिले 50 कोरोना मरीज, सड़क किनारे झोलाछाप डाक्टर कर रहे हैं इलाज
Photo courtesy: Amar ujala

भोपाल। दिया तले अंधेरा की कहावत राजधानी भोपाल के आसपास के गांवों में देखने को मिल रही है। जहां इलाज और जांच के अभाव में बड़ी संख्या में कोरोना मरीजों की मौत हो रही है। जानकारी के अभाव में लोग सामान्य सर्दी खांसी समझ कर घर पर ही बिना जांच के इलाज करवा रहे हैं। वहीं अगर किसी को बुखार आता है तो उसका इलाज अस्पतालों में करवाने की जगह झोलाछाप डाक्टरों से करवा रहे हैं। वहीं कई गांवों में लोग बुखार को टाइफाइड समझ उसकी झाड़फूंक करवाने लगे हैं।

जब भोपाल शहर के नजदीक के इन गांवों का यह हाल हैं तो प्रदेश के दूर दराज के गांवों की तो सुध लेने वाला भी कोई नहीं है। मध्यप्रदेश के एक प्रतिष्ठित अखबार में छपी रिपोर्ट के अनुसार भोपाल के आसपास के आधा दर्जन से ज्यादा गांवों में कमोबेश हर घर में सर्दी खांसी और बुखार के मरीज हैं। गांवों में लोग कोरोना जांच करवाने से कतराते हैं। बात चाहे बैरसिया रोड स्थित गांवों की हो या कोलार रोड या भदभदा रोड के आसपास के गांवों की यह सभी इलाके भोपाल से 10-15 किलोमीटर की दूरी पर हैं। वहां लोग ना तो सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं और ना ही मास्क लगा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इन इलाकों में प्रशासन को चकमा देकर शादी समारोह समेत अन्य सार्वजनिक कार्यक्रम भी हो रहे हैं।

खबर है कि भदभदा रोड के केकड़िया गांव में करीब 250 परिवार रहते हैं जिनमें से 50 परिवारों में कोरोना के लक्षण वाले मरीज हैं। वहीं भोपाल से पास ही छावनी गांव में एक हफ्ते में सर्दी खांसी बुखार के लक्षणों के बाद तबीयत बिगड़ने पर 10 लोगों की मौत का मामला सामने आया है। छावनी गांव के 50 ग्रामीणों ने कोरोना जांच करवाई तो उसमें से 10 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव मिली है। करोंद स्थित भानपुर इलाके के गांवों में भी लोगों में लक्षण नजर आने के बाद भी अस्पतालों का रुख नहीं कर रहे हैं। वहीं भोपाल से महज 8-9 किलोमीटर दूर के भदभदा रोड स्थित नीलबड़, सूरज नगर में घनी बस्ती है, जहां लोगों में लक्षण होने पर वे शहर के जिला अस्पताल या फीवर क्लीनिक या डिस्पेंसरी की जगह झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज करा रहे हैं। इस इलाके के एक चौथाई घरों में कोई न कोई बीमार है। 

बीते करीब 40 से 50 दिनों में ग्रामीण इलाकों में कोरोना मरीज लगभग तीन गुना तक बढ़ गए हैं। इसकी एक खास वजह यहां बेरोक-टोक सामाजिक आयोजन हैं। हल्की सर्दी और बुखार होने पर भी लोग शादी समारोह में शामिल हो रहे हैं। मृत्यु भोज में खाना खा रहे हैं। इन इलाकों में ग्रामीण ना तो मास्क और ना ही किसी तरह की सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं। बेखौफ होकर सभी कार्यक्रमों शामिल हो रहे हैं। जिसके संक्रमण बढ़ता जा रहा है।

जबकि प्रदेश सरकार द्वारा जारी गाइड लाइन के अनुसार राज्य में 17 मई तक टोटल लॉकडाउन है, 30 मई तक शादी समारोहों पर रोक है, वहीं अब गांवों में बांस बल्लियों से रास्ते बंद कर लोगों के आने जाने तक में बैन लगाया गया है। फिर भी राजधानी के आसपास के गांव में कोई सख्ती नहीं होने की वजह से प्रशासन की नाक के नीचे गांवों में मौतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है।

बीते 24 घंटों में राज्य में कोरोना के 9,715 नए मरीज सामने आए हैं। जिसके बाद प्रदेश में कोरोना एक्टिव मरीजों का आंकड़ा 1 लाख 11 हजार 223 हो गया है।