MP में मानसून की एंट्री में देरी से बढ़ी किसानों की मुश्किलें, कई जिलों में दलहन की बोवनी रुकी

मध्य प्रदेश में मानसून की देरी से खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हुई है। इस बीच बड़वानी में तेज आंधी से 36 लाख रुपये की केले की फसल तबाह होने पर एक किसान सदमे से बीमार हो गया।

Updated: Jun 19, 2026, 01:36 PM IST

मध्य प्रदेश में मानसून की देरी ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। प्रदेश में 1 जून से अब तक सामान्य से 39 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। जिसकी वजह से खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है। इसी बीच बड़वानी जिले में तेज आंधी और बारिश ने केले की तैयार फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। जिससे एक किसान की तबीयत बिगड़ गई और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। मौसम विभाग का अनुमान है कि इस बार मानसून प्रदेश में करीब 25 जून के आसपास दस्तक दे सकता है।

बारिश की कमी का असर सबसे ज्यादा खरीफ सीजन की तैयारियों पर दिखाई दे रहा है। सोयाबीन, उड़द, मूंग और तूअर जैसी प्रमुख फसलों की बोवनी कई क्षेत्रों में रुकी हुई है। ऐसा इसलिए क्योंकि खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बन पाई है। मौसम केंद्र भोपाल के आंकड़ों के अनुसार, जून के शुरुआती दिनों में अपेक्षित बारिश नहीं होने से प्रदेश के कई हिस्सों में कृषि गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। जबकि, पूर्वी जिलों में स्थिति अपेक्षाकृत अधिक गंभीर बनी हुई है।

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वहीं, बड़वानी जिले के खड़की क्षेत्र में मौसम की मार ने दो किसान भाइयों की मेहनत पर पानी फेर दिया। अंबाराम और गंगाराम की लगभग 9 एकड़ में लगी केले की फसल तेज हवाओं और बारिश के कारण पूरी तरह जमीन पर गिर गई। बाजार में बिक्री के लिए तैयार करीब 1500 केले के पौधे नष्ट हो गए। किसानों का कहना है कि फसल तैयार करने में लगभग 14 लाख रुपये की लागत आई थी। जबकि, कुल नुकसान करीब 36 लाख रुपये का हुआ है।

फसल बर्बाद होने के बाद किसान अंबाराम को गहरा सदमा लगा और उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें उपचार के लिए राजपुर स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। प्रभावित किसानों ने प्रशासन से नुकसान का सर्वे कराने और शीघ्र आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में किसानों को जल्दबाजी में बुवाई करने से बचना चाहिए। शाजापुर कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एस.एस. धाकड़ के अनुसार, फसलों की अच्छी अंकुरण क्षमता के लिए मिट्टी में पर्याप्त नमी जरूरी होती है। इसके लिए कम से कम 100 मिलीमीटर यानी लगभग 4 इंच बारिश आवश्यक मानी जाती है। उन्होंने चेतावनी दी कि जिन क्षेत्रों में किसानों ने कम बारिश के बावजूद सोयाबीन की बुवाई कर दी है वहां बीज खराब होने और दोबारा बुवाई की नौबत आने का खतरा बना हुआ है।

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मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में सक्रिय साइक्लोनिक सर्कुलेशन और तीन ट्रफ लाइनों के प्रभाव से कुछ इलाकों में आंधी और हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसी वजह से भोपाल, इंदौर, उज्जैन, रायसेन, सीहोर, विदिशा, गुना, ग्वालियर, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, सागर, पन्ना, छतरपुर और निवाड़ी समेत 39 जिलों में गरज चमक और बारिश की संभावना जताई गई है।

हालांकि, प्रदेश के सभी हिस्सों को इसका समान लाभ मिलने की उम्मीद नहीं है। मौसम विभाग का कहना है कि सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, उमरिया, खंडवा, खरगोन और झाबुआ जैसे जिलों में फिलहाल गर्मी और उमस का असर बना रह सकता है। ऐसे में किसान अब अच्छी और लगातार बारिश का इंतजार कर रहे हैं ताकि खरीफ सीजन की बुवाई समय पर पूरी हो सके और फसलों को नुकसान से बचाया जा सके।

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