जबलपुर: आदिवासियों के सम्मान में हुए अमित शाह के मेगा इवेंट में अपमानित हुए आदिवासी मंत्री विजय शाह

बलिदान दिवस पर आदिवासी वन मंत्री विजय शाह का अपमान, प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए जाने नहीं दिया, मंत्री बोले- यहीं से अपने पुरखों को प्रणाम करता हूं

Updated: Sep 18, 2021, 09:16 PM IST

जबलपुर: आदिवासियों के सम्मान में हुए अमित शाह के मेगा इवेंट में अपमानित हुए आदिवासी मंत्री विजय शाह

जबलपुर। गोंडवाना सम्राज्य के आदिवासी राजा शहीद शंकर शाह और रघुनाथ शाह के 164 वें बलिदान दिवस पर आज जबलपुर में बीजेपी ने भाव्य कार्यक्रम का आयोजन किया था। इस मेगा इवेंट में चीफ गेस्ट के तौर पर देश के गृह अमित शाह जबलपुर पहुंचे थे। हैरानी की बात ये है कि आदिवासियों के सम्मान के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में आदिवासी नेता व प्रदेश सरकार में वन मंत्री विजय शाह को ही जाने नहीं दिया गया।

बताया जा रहा है कि वन मंत्री कुंवर विजय शाह जब अमर शहीद राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह की प्रतिमा स्थल पर दर्शन करने पहुंचे थे तब गृहमंत्री अमित शाह वहां मौजूद थे। ऐसे में पुलिसकर्मियों ने उन्हें प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए प्रतिमा स्थल तक जाने से रोक दिया। इसपर मंत्री बिफर गए और पुलिस अधिकारियों से उनकी कहासुनी हो गई।

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विजय शाह ने इस दौरान कहा कि, 'हमारे ही पूर्वजों का पूजन करने से हमें रोका जा रहा है। ऐसी व्यवस्था को मैं दूर से ही प्रणाम करता हूं और अपने पुरखों को भी दूर से नमन करता हूं।' इस दौरान कुछ अधिकारी मंत्री विजय शाह को समझाने का प्रयास करते दिखे। इस पर मंत्री ने कहा भी कि मैं निर्वाचित विधायक हूं और प्रदेश सरकार में मंत्री हूं। लेकिन उन्हें जाने नहीं दिया गया और अंत में वे बाहर से ही प्रणाम कर अपने वाहन में बैठकर चले गए।' 

सोशल मीडिया पर इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इसपर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस ने बीजेपी को आदिवासी विरोधी करार दिया है। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने कहा है कि विजय शाह के पास दो विकल्प हैं, या तो वह इस्तीफा दे दें या सीएम शिवराज को हटाने की मुहिम में जुड़ जाएं।

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कांग्रेस प्रवक्ता नरेंद्र सलुजा ने पूछा है कि शिवराज जी की पुलिस आदिवासी मंत्री का बार-बार अपमान क्यों कर रही है? बता दें कि इसके पहले मंत्री विजय शाह को राजधानी भोपाल राजभवन जाने से रोक दिया गया था। यह वाकई अजीबोगरीब घटना है कि कार्यक्रम के दौरान अमित शाह और सीएम शिवराज ने आदिवासियों के लिए बड़ी-बड़ी बातें की। अपनी पार्टी को आदिवासियों का सबसे बड़ा हितैषी बताने का प्रयास किया, वहीं कार्यक्रम में आदिवासी समाज के मंत्री को आने से रोक दिया गया।

कौन थे शंकर शाह

शंकर शाह गोंडवाना साम्राज्य के राजा थे। सन 1857 में रानी लक्ष्मी बाई, वीर कुंवर सिंह व अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के नेतृत्व में जब अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह हुआ था तब शंकर शाह ने भी जंग का ऐलान कर दिया था। शंकर शाह और उनके बेटे रघुनाथ शाह ने साथ मिलकर अंग्रेजों के पसीने छुड़ा दिए थे। लेकिन बाद में अंग्रेजों ने उन्हें पकड़ लिया था। क्रूर अंग्रेजी सैनिकों ने 18 सितंबर 1958 को दोनों बाप बेटे को तोप से बांधकर उड़ा दिया था। आदिवासी समाज के लोगों का शंकर शाह और रघुनाथ शाह से भावनात्मक जुड़ाव है।

क्या हैं गृहमंत्री के दौरे के मायने

अमित शाह के इस दौरे को आदिवासी वोटरों को लुभाने के लिए बीजेपी का हथकंडा के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल, मध्य प्रदेश के करीब 80 सीटों पर आदिवासी वोट निर्णायक साबित होता है। वहीं पारंपरिक रूप से आदिवासी वोटबैंक पर कांग्रेस का कब्जा है। साल 2018 में भी आदिवासी वोटबैंक खिसकने के कारण ही बीजेपी की हार हुई थी। तब आदिवासी समुदाय के लिए आरक्षित 47 सीटों में से 31 पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी।