MP में खाट पर सिस्टम: सड़क नदारद, खाट पर लिटा महिला को अस्पताल ले जा रहे ग्रामीण

बड़वानी जिले के सेंधवा ब्लॉक के ग्राम पंचायत कुमठाना में लोग सड़क जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं, एक किड़नी के मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रमीण कीचड़ भरे रास्ते में तीन किलोमीटर तक चले खाट लेकर चले

Updated: Jul 23, 2022, 09:23 AM IST

MP में खाट पर सिस्टम: सड़क नदारद, खाट पर लिटा महिला को अस्पताल ले जा रहे ग्रामीण

सेंधवा। अमेरिका से अच्छी सड़कों का दावा वाले मध्य प्रदेश में सिस्टम को शर्मसार करने वाला एक और वीडियो सामने आया है। यहां बड़वानी जिले में पक्की सड़क न होने के कारण ग्रामीण एक बीमार महिल को खाट के सहारे अस्पताल लेकर गए। बताया जा रहा है कि मुख्य सड़क गांव से 3-4 किलोमीटर दूर है। ऐसे में सड़क तक जाने के लिए खाट ही एक मात्र सहारा होता है।

मामला बड़वानी जिले के सेंधवा ब्लॉक के ग्राम पंचायत कुमठाना का है। यहां आज भी लोग सड़क जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं। बीते दिनों एक किड़नी की मरीज को खाट पर चार लोग कंधे पर टांग कर कीचड़ भरे रास्ते से अस्पताल लेकर जा रहे थे। जिसका वीडियो अब सामने आया है। बताया जा रहा है कि यह 12 जुलाई की घटना है। जब किडनी की समस्या से जूझ रही 60 वर्षीय बुजुर्ग महिला सिरोटि बाई गंगाराम को तकलीफ होने पर परिजन ग्रामीणों की मदद से कीचड़ भरे रास्ते से मुख्य मार्ग तक लेकर जा रहे थे।

ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के समय इस गांव के बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं। लोग काम के लिए नहीं निकल पाते। यहां लगभग 60 से 70 घरों में लोग निवास करते हैं। इन्हे मुख्य मार्ग तक जाने के लिए रास्ता नहीं है और गांव तक कोई वाहन भी नहीं आता है। सबसे ज्यादा परेशानी बारिश में होती है तीन ओर के रास्ते कीचड़ और पानी से भरे रहते हैं, जिसमें वाहन तो दूर पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है।

ग्रामीणों ने बताया कि तीन साल पहले उन्होंने स्थानीय विधायक को समस्या बताई थी, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिला। पिछले 25 साल से गांव के हर सरपंच को समस्या से अवगत करा रहे हैं, लेकिन आश्वासन के अवाला कुछ नहीं मिलता। सड़क न होने के कारण 6 से 12वीं तक की पढ़ाई करने वाले बच्चों को भी समस्या होती है। कीचड़ भरे रास्ते से स्कूल जाना पड़ता है। ज्यादा बारिश होने पर बच्चे स्कूल नहीं जा पाते।

ग्रामीणों को खाद, घरों के लिए राशन आदि की व्यवस्था बारिश से पहले करनी पड़ती है। प्रतिमाह राशन लेने के लिए 4 किमी दूर जाना पड़ता है। लोगों ने कहा कि बारिश के मौसम में यहां रिश्तेदार भी नहीं आते। यहां तक कि लोग अपनी लड़की का शादी भी इस गांव में करने तक से कतराते हैं।