इंदौर में जल संकट पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार के जवाब को बताया असंवेदनशील

इंदौर में दूषित पेयजल से अब तक 17 मौत हो चुकी है। एमपी हाईकोर्ट इंदौर बेंच ने मामले पर कहा कि यह सबसे स्वच्छ शहर की छवि पर धब्बा है। साथ ही HC ने सरकार के जवाब को असंवेदनशील बताया है।

Updated: Jan 06, 2026, 01:32 PM IST

इंदौर। इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से हुई मौतों के मामले ने अब संवैधानिक और प्रशासनिक गंभीरता का रूप ले लिया है। इस प्रकरण की सुनवाई मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में चल रही है जहां अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि इस घटना ने देश के सबसे स्वच्छ शहर की छवि को गहरा आघात पहुंचाया है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि पीने का पानी ही सुरक्षित नहीं है तो यह सीधे तौर पर नागरिकों के जीवन के अधिकार का उल्लंघन है।

हाईकोर्ट ने कहा कि यह समस्या केवल भागीरथपुरा तक सीमित नहीं दिखती बल्कि पूरे इंदौर शहर की जल-आपूर्ति प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। इसी आधार पर कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले में राज्य के मुख्य सचिव को सुनना चाहते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि मामला व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट से जुड़ा है।

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अब तक दूषित पानी पीने से 17 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। अस्पतालों में कुल 421 मरीज भर्ती कराए जा चुके हैं जिनमें से 311 को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है। फिलहाल 110 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं जबकि 15 मरीजों की हालत गंभीर बनी हुई है और वे आईसीयू में हैं। इसके अलावा उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सामने आए हैं जिनमें से 6 मरीजों को अरबिंदो हॉस्पिटल रेफर किया गया है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रभावित इलाकों में अब भी जो पानी सप्लाई किया जा रहा है वह पीने योग्य नहीं है। इस संदर्भ में यह भी याद दिलाया गया कि 31 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को नागरिकों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। इसके बावजूद दायर की गई स्टेटस रिपोर्ट से संतोषजनक परिणाम सामने नहीं आए।

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कोर्ट के समक्ष यह भी रखा गया कि स्थानीय निवासियों ने घटना से पहले कई बार दूषित पानी की शिकायतें की थीं लेकिन प्रशासन ने समय रहते उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। यदि इन शिकायतों को गंभीरता से लिया जाता और रोकथाम के कदम उठाए जाते तो इतनी बड़ी जनहानि टाली जा सकती थी।

वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि साल 2022 में तत्कालीन महापौर द्वारा पेयजल आपूर्ति सुधार के लिए नई पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव पारित किया गया था। लेकिन फंड जारी न होने के कारण यह काम आज तक शुरू नहीं हो सका। इसके अलावा 2017-18 में लिए गए 60 पानी के सैंपलों में से 59 सैंपल पीने योग्य नहीं पाए गए थे। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की इस रिपोर्ट के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की है कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की न केवल सिविल बल्कि आपराधिक जिम्मेदारी भी तय की जाए और पूरे प्रकरण की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाए।

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हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को निर्देश दिए हैं कि वे अपना जवाब दाखिल करें और एक नई विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करें। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में स्वच्छ पेयजल का अधिकार निहित है। अदालत ने इस पूरे मामले को सात श्रेणियों में बांटते हुए राहत, रोकथाम, जिम्मेदारी, अनुशासनात्मक कार्रवाई, मुआवजा, स्थानीय निकायों को निर्देश और जन-जागरूकता जैसे बिंदुओं पर जवाब मांगा है।

गौरतलब है कि बीते 2 जनवरी की पिछली सुनवाई में कुल 4 मौतों की जानकारी दी गई थी जबकि अब यह संख्या बढ़कर 17 हो चुकी है। नगर निगम ने कोर्ट को बताया कि घटना सामने आने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों के माध्यम से स्वच्छ पानी की आपूर्ति शुरू की गई। बीते 30 दिसंबर को 36, 31 दिसंबर को 34 और 1 जनवरी को 33 टैंकरों से पानी सप्लाई किया गया था जिसके फोटो भी अदालत में पेश किए गए।

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स्टेटस रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि प्रशासनिक कार्रवाई के तहत जोन-4 के जोनल अधिकारी और असिस्टेंट इंजीनियर को सस्पेंड कर दिया गया है जबकि एक सब-इंजीनियर की सेवा समाप्त कर दी गई है। हाईकोर्ट ने इन कदमों के बावजूद शासन से विस्तृत और ठोस रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

इस बीच प्रशासनिक स्तर पर भी गतिविधियां तेज हुई हैं। मंगलवार सुबह इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा और नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने भागीरथपुरा क्षेत्र का दौरा किया। अधिकारियों ने लाइन लीकेज सुधार, दवा वितरण और टैंकरों से हो रही जलापूर्ति का निरीक्षण भी किया। कलेक्टर ने बताया कि क्षेत्र में लगातार सैंपल कलेक्शन और रिंग सर्वे किया जा रहा है तथा नागरिकों को पानी उबालकर और छानकर पीने की सलाह दी जा रही है। निगम आयुक्त ने भी जलापूर्ति की गुणवत्ता बनाए रखने और लीकेज कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

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