वेनेजुएला के बाद ट्रंप के निशाने पर 4 और देश, कोलंबिया से लेकर मेक्सिको तक को दी चेतावनी
वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो को गिरफ्तार कराने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कई देशों को चेतावनी दी है। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कोलंबिया, क्यूबा, मैक्सिको और ग्रीनलैंड पर कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए
वॉशिंगटन। नए साल की शुरुआत में शांति की अपील करने के कुछ ही दिनों बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक राजनीति में तनाव बढ़ा दिया है। बीते 3 जनवरी को वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लेने के अभूतपूर्व कदम के बाद ट्रंप ने न सिर्फ मुनरो डॉक्ट्रिन का हवाला दिया बल्कि एयर फोर्स वन में बयान देते हुए कई देशों को खुली चेतावनियां भी दे दी है। ट्रंप के दूसरे देशों को चेतावनी देने के बाद दुनिया भर में हलचल मच गई है।
ट्रंप के करीबी इसे मजाकिया अंदाज में डॉन-रो डॉक्ट्रिन कहने लगे हैं। दरअसल, एयर फोर्स वन में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए ट्रंप ने एक के बाद एक कई देशों को कड़ी चेतावनियां दी थी। जिससे यह संकेत मिला कि वॉशिंगटन की विदेश नीति और सख्त हो सकती है।
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दक्षिण अमेरिका में ट्रंप के निशाने पर सबसे पहले कोलंबिया आया। ट्रंप ने वहां के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें बीमार आदमी बताया। साथ ही आरोप लगाया कि वे अमेरिका में कोकीन की तस्करी को बढ़ावा देते हैं। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि यह स्थिति ज्यादा समय तक नहीं चलेगी। जब उनसे संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें यह ठीक लगता है।
क्यूबा को लेकर भी ट्रंप का रुख सख्त रहा। उन्होंने लंबे समय से तनावपूर्ण रिश्तों वाले इस देश को असफल राष्ट्र करार दिया। उन्होंने कहा कि क्यूबा ऐसा मुद्दा है जिस पर अमेरिका को आगे बात करनी पड़ेगी। इस बयान को और बल देते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि यदि वे हवाना में सरकार का हिस्सा होते तो निश्चित रूप से चिंतित रहते।
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मेक्सिको के संदर्भ में ट्रंप ने ड्रग कार्टेल्स का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि मेक्सिको खुद इस समस्या से निपटे। लेकिन यदि ऐसा नहीं हुआ तो अमेरिका को हस्तक्षेप करना पड़ेगा। हालांकि, मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शेनबाम पहले ही स्पष्ट कर चुकी हैं कि वे अपने देश में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती नहीं चाहती हैं।
यूरोप से जुड़े एक संवेदनशील मसले में ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बताया है। उन्होंने दावा किया कि इस द्वीप के आसपास चीनी और रूसी पनडुब्बियों की गतिविधियां बढ़ रही हैं। ग्रीनलैंड, जो डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है और नाटो सहयोगी देश के अंतर्गत आता है उन्हें लेकर डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने ट्रंप के बयानों पर कड़ा ऐतराज जताया और ऐसे धमकी भरे वक्तव्यों से बचने की अपील की।
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दरअसल, लैटिन अमेरिका के इन देशों ने राष्ट्रपति ट्रंप और अमेरिका के वेनेजुएला के खिलाफ स्ख्त रूप और वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लेने का विरोध किया था। साथ ही उन्होंने अमेरिकी भाषा को धमकीपूर्ण और अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ करार दिया था। जिसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने इन देशों को लेकर ऐसा बयान दिया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर ये देश नहीं सुधरे तो इनके खिलाफ भी ऐसा ही सलूक किया जा सकता है।




