MP में लहसुन उपजाने वाले किसानों का बुरा हाल, कृषि मंत्री बोले- ऐसी फसल उगाई ही क्यों

किसान ने कृषि मंत्री कमल पटेल को फोन लगा बताई परेशानी, कृषि मंत्री बोले- मैं कहां से दूं लहसुन का रेट, ऐसी फसल उगाई ही क्यों

Updated: Sep 09, 2022, 10:48 AM IST

MP में लहसुन उपजाने वाले किसानों का बुरा हाल, कृषि मंत्री बोले- ऐसी फसल उगाई ही क्यों

भोपाल। अच्छी उपज होने के बावजूद मध्य प्रदेश के किसानों की परेशानियां खत्म नहीं हो रही है। यहां की मंडियों में लहसुन और प्याज का रेट लागत मूल्य से काफी कम मिल रहा है। मंडी में लहसुन बेचने पर लागत मूल्य तो दूर वाहन के भाड़े के पैसे भी नहीं निकल पा रहे हैं। स्थिति ये हो गई है कि कड़ी मेहनत से उपजाई फसल को अब किसान नष्ट करने पर मजबूर हो गए हैं। किसानों की समस्या का हल निकालने के बजाए प्रदेश के कृषि मंत्री ने कहा कि आप ऐसी फसल उगाते ही क्यों हो।

दरअसल, लहसुन के सही दाम न मिलने से परेशान धार जिले के सुनील पाटीदार नाम के किसान ने कृषि मंत्री कमल पटेल को फोन किया। किसान ने मंत्री को अपनी मजबूरी बताई, तो मंत्री ने भी अपनी बेबसी बता दी। मंत्रीजी ने कहा कि मैं रेट कहां से दूं। दूसरे मंत्री के पास अपनी समय लेकर जाओ इस बातचीत का ऑडियो भी सामने आया है।

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इसमें सुनील पाटीदार कहते हैं कि सर, ये लहसुन का रेट क्या है? इसपर कृषि मंत्री कहते हैं कि लहसुन का रेट मैं कहां से दूं। थोड़े दिन दो महीने रुको रेट चार गुना हो जाएंगे। किसान जवाब देता है कि कहां से हो जाएंगे, अब तो नई फसल आने वाली है एक महीने बाद। बातचीत के दौरान कृषि मंत्री कहते हैं कि मेरे पास कृषि विभाग है इसमें ये लहसुन-प्याज आता ही नहीं हैं। ये उद्यानिकी में आता है उद्यानिकी मंत्री से बात करो। 

कृषि मंत्री आगे कहते हैं कि कभी-कभी तुमको रेट डबल-ट्रिपल भी मिलता है। इसपर सुनील पाटीदार जवाब देते हैं कि वो तो मिलते हैं, मगर अभी दो साल से किसान परेशान हो रहा है। कृषि मंत्री जवाब देते है कि ऐसी चीजें मत बोओ, जिसके रेट अच्छे मिलें वो उगाओ।

किसान फिर सवाल पूछता है कि हम कौन सी फसल बोएं? प्याज के भी रेट ऐसे मिल रहे। किसान की लागत नहीं निकल रही। सोयाबीन भी राउस आ गए। फसल खराब हो गई। कोई अधिकारी धार जिले में सर्वे को भी नहीं आ रहा। कृषि मंत्री बात को टालते हुए कहते हैं कि मूंग की फसल उगाओ, उसमें बहुत कमाई हो रही है। किसान जवाब देता है कि धार जिले में मूंग की खेती होती ही नहीं है। हमारे जिले में बस सोयाबीन, मटर, गेहूं की खेती होती है। आखिर में मंत्री जी कहते हैं कि चलो ठीक है। तुम्हारे लिए कुछ करते हैं।