23 हज़ार कार्यकर्ताओं के जरिए MP यूथ कांग्रेस जुटाएगी कोरोना मृतकों का आंकड़ा

कोरोना से हुए मौतों का समुचित डेटा जुटाने के लिए यूथ कांग्रेस ने बनाई माइक्रो लेवल कमेटियां, पहले चरण में 10 हजार कार्यकर्ताओं को दी जाएगी जिम्मेदारी, 23 हजार पंचायतों के कार्यकर्ताओं को दी जाएगी जिम्मेदारी

Updated: Jun 04, 2021, 01:25 PM IST

23 हज़ार कार्यकर्ताओं के जरिए MP यूथ कांग्रेस जुटाएगी कोरोना मृतकों का आंकड़ा

भोपाल। मध्य प्रदेश में कोरोना वायरस से हुई कुल मौतों के वास्तविक आंकड़े को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। फिलहाल राज्य में कोरोना से हुई मौतों की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट नहीं है। हालांकि, पूर्व सीएम कमलनाथ ने 1 लाख से ज्यादा मौतों का दावा कर सियासी हलचलें बढ़ा दी हैं। अब कोरोना से हुई मौतों के विधिवत डेटा जुटाने के लिए मध्यप्रदेश यूथ कांग्रेस ने डोर-टू-डोर डेटा कलेक्शन शुरू कर दिया है।

मध्य प्रदेश यूथ कांग्रेस का दावा है कि कोरोना से हुई मौतों को लेकर यह देश का सबसे बड़ा सर्वे होगा। इस सर्वे में करीब 23 हजार युवाओं की जिम्मेदारी तय की जाएगी। युवक कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने सोमवार से राज्य के करीब एक दर्जन जिलों में कैंपेन की शुरुआत कर दी है, वहीं इस हफ्ते तक इसका विस्तार सभी 52 जिलों में हो जाएगा। यूथ कांग्रेस अध्यक्ष विक्रांत भूरिया ने बताया है कि शुरुआत में सभी जिलाध्यक्षों की जिम्मेदारी तय कर दी गई है।

भूरिया के मुताबिक इस महाभियान को मूर्त रूप देने के लिए माइक्रो लेवल पर नियुक्तियां शुरू हो गई है। इस पूरे प्रक्रिया के बारे में हम समवेत से बातचीत के दौरान यूथ कांग्रेस अध्यक्ष ने बताया कि फिलहाल ब्लॉक लेवल पर नियुक्तियां की जा रही है। प्रदेश के सभी ब्लॉक को कई छोटे सेक्टर्स में बांटा जा रहा है। प्रत्येक सेक्टर की जिम्मेदारी दो लोगों को दी जाएगी जो अपनी-अपनी टीम के साथ, घर-घर जाएंगे और कोरोना से हुई मौत का वास्तविक डेटा निकालकर लाएंगे।

भूरिया के मुताबिक इस अभियान के अंतिम चरण में युवक कांग्रेस पंचायत स्तर पर एक-एक जिम्मेदार कार्यकर्ता की नियुक्ति करेगी, जो लोगों से शपथपत्र भरवाएंगे। मध्यप्रदेश में करीब 23 हजार पंचायत हैं, ऐसे में करीब 23 हजार कार्यकर्ताओं को ग्राउंड पर उतारने की योजना है। शुरुआती दौर में शमशान घाट और कब्रिस्तानों से डेटा लेकर उसे वेरिफाइ किया जाएगा। इसके लिए युवक कांग्रेस के कार्यकर्ता कांग्रेस पार्टी के निर्वाचित विद्यायकों से लेकर ब्लॉक और पंचायत अध्यक्ष से कोऑर्डिनेट करेंगे।

क्या है इस अभियान का लक्ष्य

यूथ कांग्रेस ने सर्वे का काम पीसीसी चीफ कमलनाथ के निर्देश पर शुरू किया है। इसका लक्ष्य प्रदेश के सभी कोरोना मृतकों की पहचान कर उन्हें सरकार से मुआवजा दिलवाने का है। इसके लिए जो शपथपत्र बनाया गया है उसमें मृतक के परिजनों के हवाले से यह भरवाया जाएगा कि संबंधित व्यक्ति की कब मृत्यु हुई और उसका कारण क्या था? शपथपत्र में जो कॉलम दिए गए हैं उसमें पीड़ित परिवार का बैंक अकाउंट नंबर भी लिया जाएगा, ताकि मुआवजे की राशि सीधे पीड़ित परिवार के बैंक खाते में जाए।

इस शपथपत्र को इकट्ठा कर कांग्रेस कोर्ट भी जाएगी। कोर्ट में कांग्रेस साल 2015 के प्रावधानों के तहत मुआवजा देने की मांग करेगी। दरअसल, केंद्र ने 2015 में प्रावधान बनाया था कि नोटिफाइड महामारी की वजह से जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को 4 लाख रुपए का सहायता दी जाएगी। हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन को वैश्विक महामारी की श्रेणी में रखने के बावजूद सरकार ने कोरोना मृतकों के परिजनों को इस प्रावधान के तहत सहायता नहीं दे रही है। इसके अलावा राज्य सरकार ने भी हर कोरोना मृतक के परिजनों को 1 लाख रुपए अनुग्रह राशि देने का ऐलान किया है, लेकिन वास्तविक मौतें दर्ज नहीं होने की वजह से हजारों लोगों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा।

मृतकों का संख्या 2 लाख के पार जाने का अनुमान

बीते दिनों कमलनाथ ने दावा किया था कि मार्च और अप्रैल महीने में प्रदेश में 1 लाख 27 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई है, जिनमें से 1 लाख 2 हजार लोगों का अंतिम संस्कार कोरोना प्रोटोकॉल के साथ किया गया था। हालांकि, यूथ कांग्रेस सर्वे अभियान की शुरुआत के बाद से ही अनुमान लगाया जा रहा है कि वास्तविक संख्या इससे भी अधिक हो सकती है। ऐसा इसलिए माना जा रहा है कि क्योंकि कमलनाथ ने यह डेटा कथित रूप से शमशान और कब्रिस्तानों से जुटाई थी।

जबकि आदिवासी बाहुल्य इलाकों में मौत के बाद विश्राम स्थल जाने की बजाय आस पास बाड़े में ही बड़े पैमाने पर अंतिम संस्कार किया गया है। ऐसे में वास्तविक डेटा के लिए प्रदेश के सभी घरों तक पहुंचना होगा। यूथ कांग्रेस का अनुमान है कि जुलाई के आखिरी हफ्ते तक प्रदेश के सभी कोरोना मृतकों का नाम, पता व अन्य डिटेल्स के साथ दस्तावेज तैयार कर लिया जाएगा। आदिवासी बाहुल्य झाबुआ के यूथ कांग्रेस अध्यक्ष विजय भावर के मुताबिक सर्वे के दौरान इस तरह के खुलासे हो रहे हैं कि छोटे-छोटे कस्बों में 15-20 लोगों की कोरोना से मौत हुई लेकिन एक भी का व्यक्ति का नाम कोरोना मृतक के रूप में दर्ज नहीं किया गया।